भारत

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रिपब्लिक ऑफ़ इण्डिया
Republic of India

भारत गणराज्य
क्षैतिज तीन रंग का झण्डा जिसमें उपर से नीचे तक केसरीया (गहरा भगवा), श्वेत (सफेद) और हरे रंगी की क्षैतिज पटियाँ हैं। सफेद रंग की पट्टी के केन्द्र में गहरे-नीले रंग का एक चक्र बना हुआ है जिसमें 24 आरियां हैं। दायें, बायें और दर्शक की ओर देखते हुये तीन शेर दिखाई देते हैं। नीचे के भाग में चित्रवल्लरी में एक भाग एक दौड़नेवाला घोड़े युक्त और दूसरी तरफ एक हाथी दिखाई देता है, इन दोनों के मध्य 24-आरियों वाला एक चक्र है। सबसे नीचे एक आदर्श वाक्य "सत्यमेव जयते" लिखा है।
झंडा प्रतीक चिह्न
मोटो: "सत्यमेव जयते" (संस्कृत)
"सत्य की ही विजय होती है"
राष्ट्रगान: जन गण मन[1][2]
राष्ट्र गीत:
वन्दे मातरम्
"माँ, मैं आपको नमन करता हूँ।"[नोट 1][3][2]
भारत पर केन्द्रित ग्लोब चित्र जिसमें भारत पर प्रकाश डाला गया है।
भारत द्वारा नियंत्रित क्षेत्र को गहरे हरे रंग में दिखाया गया है;
दावाकृत भूभाग जिसपर नियंत्रण नहीं है उसे हल्के हरे रंग में दिखाया गया है।
राजधानी नई दिल्ली
28°36.8′N 77°12.5′E / 28.6133°N 77.2083°E / 28.6133; 77.2083
सबसे बड़ शहर मुम्बई
ऑफिशियल भाषा
मान्यताप्राप्त क्षेत्रीय भाषा
राष्ट्रभाषा कौनों नइखे
लोग के नाँव भारतीय
सरकार संघीय संसदीय
संवैधानिक गणराज्य[6]
 •  राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
 •  उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी
 •  प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (भाजपा)
 •  लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (भाजपा)
 •  भारत के मुख्य न्यायाधीश टी॰ एस॰ ठाकुर[7]
बिधायी संस्था भारतीय संसद
 •  ऊपरी सदन राज्यसभा
 •  निचला सदन लोक सभा
स्वतन्त्रता यूनाइटेड किंगडम
 •  अधिराज्य 15 अगस्त 1947 
 •  गणराज्य 26 जनवरी 1950 
 •  जल (%) 9.6
जनसंख्या
 •  2011 अनुमान 1,210,193,422 (दूसरा)
जी॰डी॰पी॰ (पी॰पी॰पी॰) 2014 अनुमान
 •  Total $5.302 महाशंख[8] (तीसरा)
 •  Per capita $4,209[8] (133वीं)
जी॰डी॰पी॰ (नॉमिनल) 2014 estimate
 •  Total $1.842 महाशंख[8] (10वीं)
 •  Per capita $1,389[8] (148वाँ)
गिनी (2010) 33.9[9]
medium · 39वाँ
ऍच॰डी॰आइ॰ (2012) Increase 0.554[10][11]
medium · 136वाँ (मध्यम)
करेंसी भारतीय रुपया () (INR)
टाइम जोन भारतीय मानक समय (UTC+5:30)
 •  Summer (DST) बदलाव ना (UTC+5:30)
तारीख रूप dd-mm-yyyy (CE)
ड्राइविंग left
कालिंग कोड +91
इंटरनेट टी॰ऍल॰डी॰ डॉट इन

भारत देश (अंग्रेजी: India), या सरकारी रूप से भारत गणराज्य (अंग्रेजी: Republic of India), दक्खिनी एशिया में एगो देश बा। भारतीय साहित्य में एकरा के जम्बूद्वीप, आर्यावर्त, आ अजनाभदेश भी कहल गइल बा। भारत, भौगोलिक क्षेत्रफल के हिसाब से से विश्व के सातवाँ सबसे बड़हन अउरी जनसंख्या के हिसाब से चीन की बाद दुसरा सबसे बड़ देश बाटे। भारत के जनसंख्या 2011 की जनगणना की हिसाब से 1.2 अरब बाटे।

भारत के उत्तर में हिमालय पहाड़, दक्खिन में हिन्द महासागर, पच्छिम में अरब सागर आ पूरुब ओर बंगाल के खाड़ी बाटे। भारत जमीनी सीमा जेवन देशन की संघे साझा बा उनहन में पच्छिम में पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, उत्तर-पूरब में चीन, नेपाल, आ भूटान अउरी पूरुब ओर बांग्लादेशम्याँमार देश बाड़ें। हिन्द महासागर में एकरी दक्खिन-पश्चिम में मालदीव, दक्खिन में श्री लंका अउर दक्खिन-पूरब में इंडोनेशिया हऽ।

हिमालय से निकले वाली नद्दी कुल के ले आवल निक्षेप से उत्तरी भारत के मैदान बनल बा जेवन बहुत ऊपजाऊ बा। एही मैदान क पच्छिमी तटीय हिस्सा विश्व की प्राचीनतम सभ्यता सिन्धु घाटी सभ्यता के जनम भइल हऽ आ एही उत्तर भारत की मैदान में विश्व के चार गो प्रमुख धर्म:हिंदू, बौद्ध, जैन अउरी सिख धर्म जनम लिहलन अउर विकसित भइलें। गंगा नदी भारत के राष्ट्रीय नदी बाटे जेवन इहाँ की संस्कृति में बहुत पबित्र मानल जाले।

जहाँ तक भारत की लोगन का सवाल बा जनसंख्या के हिसाब से ई विश्व के सबसे बड़हन लोकतंत्र हऽ। इहवाँ संसदीय प्रणाली के आधार पर शासन चलेला आ देश के मुखिया राष्ट्रपति होलें लेकिन परधानमंत्री सभसे शक्तिशाली पद होला। 1991 ई. मे आर्थिक सुधार की बाद भारत के अर्थव्यवस्था में तेज़ वृद्धि देखल गइल बा। भारत नामिक जी॰डी॰पी॰ के अनुसार बिस्व में दसवां सबसे बड़हन आ पी॰पी॰पी॰ की हिसाब से दुनिया में तीसरी सबसे बड़हन अर्थव्यवस्था हऽ।

भारतीय संस्कृति के सभसे मुख्य बिसेसता बा एकर बहुरंगी रूप। भारत में बहुत प्रकार के जाति, प्रजातिधर्म के लोग बाटे आ भारत के एक क्षेत्र से दूसरा क्षेत्र में खान-पान, रहन-सहन जइसन चीजन में बहुत अंतर देखे के मिलेला। एकरा बावजूद भारतीय संस्कृति के एगो अलग पहचान बा। अंग्रेज लोग भारत के एही भूगोलिक आ सांस्कृतिक विविधता के देख के ए के एगो उप-महाद्वीप के लोग हालाँकि अब भारतीय एकता आ अखंडता क समर्थक ए शब्द क प्रयोग ना कइल चाहेला लोग।

नाँव के उत्पत्ति[संपादन]

मुख्य लेख: भारत के नाँव

भारत, एगो भूगोलीय पहिचानक बाटे जवन भारत के संबिधान द्वारा देस के नाँव के रूप में स्वीकार कइल गइल बाटे,[12] कई ठे भारतीय भाषा सब में कुछ हेर-फेर के साथ इस्तेमाल होला। ई नाँव, पुरान भारतवर्ष के आधुनिक रूप हवे जवन 19वीं सदी के बिचला समय में भारत के देशी नाँव के रूप में प्रचलन में महत्व पवलस।[13] बिद्वान लोग के मान्यता बाटे की ई नाँव दूसरी सदी ईसा पूर्व के वैदिक जन भारत लोग के नाँव से उपजल हवे।[14] परंपरागत रूप से ई नाँव कथा में बर्णित राजा भरत के साथ भी जोड़ल जाला।[15] गणराज्य (शब्दशः, जनता के राज्य) संस्कृत/हिंदी में रिपब्लिक खातिर प्रयोग होखे वाला प्राचीन शब्द हवे।[16][17][18]

इंडिया (अंग्रेजी: India) शब्द इंडस (अंग्रेजी: Indus) से पड़ल हवे, जवन पुरान फ़ारसी भाषा भाषा के शब्द सिंधी से निकलल हवे।[19] सिंधी शब्द खुदे संस्कृत के सिंधु, जवन ऐतिहासिक रूप से सिंधु नदी खातिर इस्तेमाल होखे, से निकलल।[20] प्राचीन यूनानी लोग भारत के लोग के इंडोई (Ινδοί) कहे जवना के शाब्दिक अरथ होखे "सिंधु (के इलाका) के लोग"।[21]

हिंदुस्तान तीसरी सदी ईसा पूर्व के, एगो प्राचीन फारसी नाँव हवे, जवन मुगल लोग के समय एह इलाका में चलन में आइल, आ तबसे ब्यापक रूप से इस्तेमाल होला, अक्सरहा एकर अरथ "हिंदू लोग के देस" के रूप में भी कइल जाला। एकर मतलब परिवर्तनशील रहल बाटे, कबो ख़ाली उत्तरी भारत आ पाकिस्तान खातिर आ कबो पूरा भारत खातिर।[13][22][23]

इतिहास[संपादन]

मुख्य लेख: भारत के इतिहास

प्राचीन भारत[संपादन]

मानव के सभसे पुरान अवशेष दक्खिन एशिया में मिलले के प्रामाणिक तिथि 30,000 साल पहिले के बतावल जाला।[24] लगभग एही काल के मेसोलिथिक रॉक आर्ट के साइट सभ भारत के कई सारा भाग में पावल गइल बाड़ी, जवना में मध्य प्रदेश में मौजूद भीमबेटका के गुफा उल्लेख जोग बाड़ी सऽ।[25] उपमहादीप में, लगभग 7,000 ईसा पूर्व के नियोलिथिक आबादी के पहिला चीन्हा मेहरगढ़ आ कुछ अन्य पच्छिमी पाकिस्तानी इलाका में मिले ला।[26] ईहे क्रमशः बिकास करिके सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माण कइलें,[27] जवन दक्खिनी एशिया में पहिला शहरी संस्कृति रहल;[28] ई लगभग 2500–1900 ई॰पू॰ के समय में वर्तमान समय के पाकिस्तान आ पच्छिमी भारत के इलाका में फलल-फुलाइल।[29] मुअनजोदारो (मोहनजोदड़ो), हड़प्पा, धौलावीरा, राखीगढ़ी आ कालीबंगा जइसन शहरन के इर्द-गिर्द केंद्रित, बिबिध प्रकार के रोजगार पर आजीविका खातिर निर्भर, ई सभ्यता शिल्प उत्पादन आ तरह-तरह के बाणिज्य-ब्यापार में काफी आगे रहल।[28]

वैदिक काल में भारतीय उपमहादीप के स्थिति देखावत नक्शा
तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक द्वारा बनावल गईल मध्य प्रदेश में साँची के स्तूप

2000–500 ई॰पू॰ के समय में संस्कृति में मामिला में, उपमहादीप के कई गो क्षेत्र चाल्कोलिथिक से लोहा जुग में प्रवेश कइलें।[30] हिंदू लोग के सभसे पुरान ग्रंथ वेद[31] एही काल में रचल गइलें [32] आ इतिहासकार लोग पंजाब क्षेत्र आ ऊपरी गंगा मैदान में एगो वैदिक संस्कृति प्रकल्पित कइले बा।[30] ज्यादातर इतिहासकार लोग एह काल के दौरान, उपमहादीप में कई ठे लहर के रूप में इंडो-आर्यन माइग्रेशन भइले के भी स्वीकार करे ला।[33][31] कास्ट सिस्टम एही काल में पैदा भइल आ समाज में ऊँच-नीच के बिभाजन भइल जवना में क्रम से पुजारी, जुद्ध करे वाला आ खेती आ बाणिज्य करे वाला, आ सबसे नीचे अशुद्ध मानल जाये वाला पहिले के लोग; आ छोट जनजातीय इकाई सभ एकट्ठा हो के धीरे-धीरे राजसत्ता वाले राज्य में बदलत गइल।[34][35] पुरातत्व के खोज में, दक्कन पठार इलाका में एह काल में मुखिया आधारित राजनीतिक इकाई होखला के परमान मिलल बा।[30] दक्खिनी भारत में एह समय के स्थाईत्व वाली जिनगी के परमान के रूप में कई ठे मेगालिथिक स्मारक मिलल बानें,[36] संगहीं अगल-बगल खेती के परमान मिलल बा, सिंचनी खातिर बनल तालाब, आ कारीगरी के परमान भी मिलल बाटे।[36]

लेट वैदिक काल में, छठवीं सदी ईसा पूर्व के आसपास, गंगा के मैदान आ उत्तरी पच्छिमी इलाका के छोट-छोट राज्य मिल के 16 गो "महाजनपद", जिनहना में कुछ राजतन्त्र वाला रहलें कुछ गणतंत्र नियर, में समाहित हो गइलें।[37][38] एही काल में नगरीकरण के उपज के बाद गैर-वैदिक धार्मिक आंदोलन के परिणाम के रूप में दू गो नया स्वतंत्र धर्म पैदा भइलें। जैन धर्म एकरे उपदेशक महावीर के समय में महत्व हासिल कइलस।[39] गौतम बुद्ध के उपदेश पर आधारित बौद्ध धर्म के अनुयायी समाज के सगरी वर्ग से आ के जुड़लें, मध्य वर्ग के छोड़ के; बुद्ध के जीवन के घटना के संग्रह से भारत में रेकार्डेड इतिहास के सुरुआत भइल।[40][41][42] शहरी संपन्नता के एह युग में त्याग के आदर्श घोषित कइलें,[43] आ दुनों धर्म लंबा समय खातिर एगो संन्यासी परंपरा के अस्थापना कइलें। राजनीतिक रूप से, तीसरी सदी ईसा पूर्व में, मगध राज ज्यादातर छोट राज्यन के अपना में मिला के एगो बिसाल राज के स्थापना कइलस जवना के मौर्य साम्राज्यके नाँव से जानल जाला।[44] ई साम्राज्य ओह समय में सुदूर दक्खिन के कुछ इलाका के छोड़ के बाकी पूरा उपमहादीप पर शासन कइलस; हालाँकि,अब इहो मानल जाए लागल बा कि एकर कोर इलाका के बीच-बीच में कई गो बड़हन स्वशासित (ऑटोनॉमस) इलाका भी रहलें।[45][46] मौर्य राजा लोग के उनहन लोग के साम्राज्य-स्थापना खातिर लगन आ पब्लिक सुबिधा के मैनेजमेंट खातिर भी ओतने जानल जाला जेतना कि अशोक के जुद्ध के त्याग आ बौद्ध धम्म के परचार-प्रसार खातिर जानल जाला।[47][48]

तमिल भाषा के संगम साहित्य ई उजागिर करे ला की 200 ईपू से 200 ईसवी के बीच, दक्खिनी प्रायदीप पर चेर, चोल, आ पांड्य लोग के शासन रहल, आ ई राज्य सभ बड़ा पैमाना पर रोमन साम्राज्य, पच्छिमदक्खिन पूर्ब एशिया के साथ ब्यापार करें।[49][50] उत्तरी भारत में, हिंदू धर्म के अंदर परिवार पर पितृसत्तात्मक कंट्रोल मजबूत भइल आ, औरतन के स्थिति पहिले से कमोजर भइल।[51][44] 4थी-5वीं सदी ले गुप्त साम्राज्य, बृहत् गंगा मैदान के इलाका में प्रशासन आ टैक्स कलेक्शन के एगो ब्याबस्थित सिस्टम दिहलस जवन बाद के राजा लोग खातिर मॉडल के काम कइलस।[52][53] गुप्त लोग के शासन में, हिंदू धर्म के पुनरुत्थान भइल आ ई भक्ति आ श्रद्धा पर आधारित हो गइल बजाय कर्मकांड पर जोर दिहले के आ ई फिर से महत्व हासिल करे शुरू कइलस।[54] एह नवीनीकरण के चीन्हा मूर्तिकलाआर्किटेक्चर में प्रगट होला, जवन नगरीय अभिजात वर्ग के संरक्षण पा के बिकसित भइल।[53] क्लासिकल संस्कृत साहित्य में उत्कर्ष भइल, आ भारतीय बिज्ञान, ज्योतिष, आयुर्वेद, आ गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति भइल।[53]

मध्यकाल[संपादन]

12वीं शताब्दी के शुरुआत में, भारत पर इस्लामी आक्रमणन के बाद, उत्तरी अउर केन्द्रीय भारत के अधिकांश भाग दिल्ली सल्तनत के शासनाधीन हो गईल; आ बाद में, अधिकांश उपमहाद्वीप मुगल वंश के अधीन हो गईल। दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य शक्तिशाली बनल। मुगलन के संक्षिप्त अधिकार के बाद सत्रहवीं सदी में दक्षिण और मध्य भारत में मराठन का उत्कर्ष भयल। उत्तर पश्चिम में सिक्खन के शक्ति में बढ़त भइल।

17वीं शताब्दी के मध्यकाल में पुर्तगाल, डच, फ्रांस, ब्रिटेन सहित अनेक यूरोपीय देशन, जे भारत से व्यापार करे के चाहत रहलन, देश के आतंरिक शासकीय अराजकता के फायदा उठईलन। अंग्रेज दूसरे देशों से व्यापार के चाहे वाला लोगन के रोके में सफल भइलेन और 1840 तक लगभग पूरा देश पर शासन करे में सफल भइलेन। 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम से भी जानल जला, के बाद भारत के अधिकांश भाग सीधे अंग्रेजी शासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गईल। [55]

आधुनिक काल[संपादन]

बीसवी सदी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा क प्रसार और विश्वपटल पर बदलती राजनीतिक परिस्थितियन के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन क सूत्रपात भयल जे सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर अनेक बदलाव और कई आन्दोलन क नीव रखलस। 1885 में इन्डियन नेशनल कांग्रेस क स्थापना स्वतन्त्रता आन्दोलन के एक गतिमान स्वरूप देहलस। बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में लम्बा समय तक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये बहुत बड़ा अहिंसावादी संघर्ष चलल, जेकर नेतृत्‍व महात्मा गांधी, जिनके आधिकारिक रुप से आधुनिक भारत क 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित करल जाला, कईलेन। एकरे साथ-साथ चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, सावरकर आदि के नेतृत्‍व में चलल क्रांतिकारी संघर्ष के फलस्वरुप 15 अगस्त, 1947 के भारत ने अंग्रेजी शासन से पूर्णतः स्वतंत्रता प्राप्त कईलस। ओकरे बाद 26 जनवरी, 1950 के भारत एक गणराज्य बनल।

भारत के पड़ोसी राष्ट्रन के साथ अनसुलझा सीमा विवाद ह। एही खातिर एके छोटा पैमाना पर युद्ध का भी सामना करे के पड़ल। 1962 में चीन के साथ, अउर 1947, 1965, 1971 अउर 1999 में पाकिस्तान के साथ लड़ाई हो चुकल बा।

भारत गुटनिरपेक्ष आन्दोलन अउर संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थापक सदस्य देशन में से एक बाटे। 1974 में भारत आपन पहिला परमाणु परीक्षण कईले रहल जेकरे बाद 1998 में 5 अउर परीक्षण भयल। 1990 के दशक में भयल आर्थिक सुधारीकरण क बदौलत आज देश सबसे तेज़ी से विकासशील राष्ट्रन क सूची में आ गयल बा।

प्रशासनिक भाग[संपादन]

भारत में 29 गो राज्य आ 7 गो केन्द्रशासित प्रदेश बा।

राज्यन के नाँव नीचे दिहल बाटे- (कोष्टक में राजधानी के नाँव)
हिन्द महासागर बंगाल के खाड़ी अंडमान सागर अरब सागर लक्षद्वीप सागर सियाचीन अण्डमान अउरी निकोबार द्वीपसमूह चण्डीगढ़ दादरा अउरी नगर हवेली दमन अउरी दीव दिल्ली लक्षदीप पुदुच्चेरी पुदुच्चेरी पुदुच्चेरी आंध्र प्रदेश अरुणाचल प्रदेश असम बिहार छत्तीसगढ़ गोवा गुजरात हरियाणा हिमाचल प्रदेश जम्मू और कश्मीर झारखण्ड कर्णाटक केरल मध्य प्रदेश महाराष्ट्र मणिपुर मेघालय मेघालय नागालैण्ड ओड़िशा पंजाब राजस्थान सिक्किम तमिलनाडु त्रिपुरा उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड पश्चिम बंगाल अफ़्गानिस्तान बांग्लादेश भूटान म्यान्मार चीन नेपाल पाकिस्तान श्रीलंका ताजिकिस्तान दादरा और नगर हवेली दमन और दीव पुदुच्चेरी पुदुच्चेरी पुदुच्चेरी पुदुच्चेरी आंध्र प्रदेश गोवा गुजरात जम्मू और कश्मीर कर्णाटक केरल मध्य प्रदेश महाराष्ट्र राजस्थान तमिलनाडु असम मेघालय अरुणाचल प्रदेश नागालैण्ड मणिपुर मिज़ोरम त्रिपुरा पश्चिम बंगाल सिक्किम भूटान बांग्लादेश बिहार झारखण्ड ओड़िशा छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड नेपाल दिल्ली हरियाणा पंजाब हिमाचल प्रदेश चण्डीगढ़ Pakistan श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका श्रीलंका
भारत के २९ गो राज्यन आ ७ गो केंद्र शासित प्रदेश सभ के एगो क्लिक करने लायक नक्शा
केन्द्रशासित प्रदेश

† चंडीगढ़ एगो केंद्रशासित प्रदेश बाटे आ पंजाब आ हरियाणा दुन्नों राज्यन के राजधानी भी बा।

भूगोल[संपादन]

मुख्य लेख: भारत के भूगोल
भारत के नक्शा। भारत के ज्यादातर हिस्सा पीयर रंग के बा (ऊँचाई 100–1000 मीटर)। दक्खिन आ बिचला-पूरब में कुछ हिस्सा भूअर रंग के बा (1000 मीटर से ऊपर)। प्रमुख नदी घाटी सभ हरियर रंग के बाड़ी (100 मीटर से नीचे)।
भारत के टोपोग्राफी

भारत, भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट के ऊपर स्थित बा, आ इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के हिस्सा हवे।[56] भारत के बर्तमान रूप के रचना करे वाली भूबिज्ञानिक प्रक्रिया सभ के सुरुआत अबसे 75 मिलियन बरिस पहिले भइल जब भातरीय प्लेट, ओह समय के गोंडवाना नाँव के महामहादीप के हिस्सा, अपना जगह से उत्तर-पूरुब ओर घुसुके सुरु कइलस। एकर वजह समुंद्रतल फइलाव रहल जे एकरा दक्खिन-पच्छिम में, आ बाद में, दक्खिन आ दक्खिन पूरुब में सुरू भइल।[56] साथै-साथ, बिसाल आकार के टीथियन समुंद्री क्रस्ट, जे एकरा उत्तर-पूरुब में रहल, यूरेशियन प्लेट के नीचे धँसके सुरू हो गइल।[56] ईहे दुन्नों प्रासेस, जवन पृथ्वी के मैंटल में चले वाली तरंग के परिणाम रहली, हिंद महासागर के निर्माण आ भारतीय महादीपी क्रस्ट के यूरेशिया के नीचे पेस के एह हिस्सा के ऊपर उठा के हिमालय के उठान, दुन्नों चीज के कारन बनली।[56] भारतीय प्लेट के धँसाव जहाँ यूरेशियन प्लेट के नीचे होत रहे आ जवना से हिमालय के उठान होत रहल ओही इलाकाके ठिक दक्खिन में एगो बिसाल दोना के आकार के धँसल हिस्सा के रचना भइल जे नदी सभ के ले आइल गाद-माटी से तेजी से भर गइल[57] बर्तमान समय के सिंधु-गंगा मैदान के रूप लिहलस[58] प्राचीन अरावली परबत द्वारा मैदान से बिलग होखे वाला पच्छिमी हिस्सा थार के रेगिस्तान के रूप में मौजूद बाटे।[59]

मूल आ पुरान भारतीय प्लेट अब प्रायदीपीय भारत के रूप में बाँचल बाटे आ ई भारत के सभसे पुरान आ भूबिज्ञान के हिसाब से सभसे स्थाई हिस्सा हवे। ई उत्तर के ओर अपना बिस्तार में मध्य भारत के सतपुड़ा परबत श्रेणी आ बिंध्याचल परबत श्रेणी ले बिस्तार लिहले बाटे। ई दुनों, लगभग समानांतर श्रेणी, गुजरात राज्य के अरब सागर के तट से ले के झारखंड राज्य में मौजूद छोटानागपुर के पठार ले फइलल बाड़ी।[60] दक्खिन में, बाकी के पठारी हिस्सा, दक्कन पठार अपना पच्छिम सीमा पर पच्छिमी घाट से आ पूरुब में पूरबी घाट नाँव के पहाड़ी कड़ी से बनल सीमा वाला बाटे;[61] पठार भारत के कुछ सभसे पुरान चट्टान वाला बाटे जेवना में से कुछ एक बिलियन बरिस से भी पुरान बाड़ी। एह प्रकार के संरचना वाला भारत बिसुवत रेखा के उत्तर में 6° 44' आ 35° 30' उत्तर अक्षांस[नोट 2] आ 68° 7' से 97° 25' पूरबी देशांतर ले बिस्तार वाला बाटे।[62]

चमकदार उज्जर बरब से तोपाइल पहाड़ के चोटी, नीला आसमान पाछे। बीच में, फोटो के दाहिने से एगो रिज आ के बीच में एगो काठी के निर्माण करत बाटे, कुछ छाया में। फोटो के सामने के हिस्सा में, सड़क के मोड़ देखात बाटे।
ग्रेटर हिमालय के केदार श्रेणी, केदारनाथ मंदिर के पाछे, उत्तराखंड

भारत के समुंद्री तट के लंबाई 7,517 kilometres (4,700 mi) बाटे; एकर 5,423 kilometres (3,400 mi) लंबा हिस्सा प्रायदीपी भारत के हवे आ 2,094 kilometres (1,300 mi) लंबा हिस्सा अंडमान निकोबार दीपसमूह आ लक्षदीप के टापू सभ के समुंद्र तट से बनल बाटे।[63] भारतीय नेवी के हाइड्रोग्राफिक चार्ट सभ के मोताबिक भारत के मुख्य जमीन के समुंद्री किनारा, 43% बलुआ बीच वाला; 11% चट्टानी किनारा, जवना पर क्लिफ बाड़ी; आ 46% कीच तट आ दलदली इलाका वाला बाटे।[63]

भारत में बहे वाली प्रमुख हिमालयी नदी सभ में गंगाब्रह्मपुत्र बाड़ी, दुन्नों बंगाल के खाड़ी में पानी छोड़े ली।[64] गंगा के मुख्य सहायिका नदिन में यमुनाकोसी बाड़ी; जहाँ कोसी बहुत कम ढाल वाला मैदान में बहे ले आ बेर-बेर आपन रस्ता बदले आ भयावन बाढ़ खातिर जानल जाले।[65] प्रायदीपी भारत के मुख्य नदी, जिनहन के ढाल तेज होखे से के कारन ई बाढ़ के परभाव से फिरी बाड़ी, गोदावरी महानदी, कृष्णाकावेरी बाड़ी जे बंगाल के खाड़ी में गिरे ली;[66]नर्मदाताप्ती अरब सागर में गिरे ली।[67] समुंद्र किनारे के हिस्सा में दलदली जमीन वाला कच्छ के रन पच्छिम में आ सुंदरबन के जलोढ़ मैदान पूरुब में बा; सुंदरबन के कुछ हिस्सा बंगलादेश में पड़े ला।[68] भारत के हिस्सा में दू गो दीपमाला बा: लक्षदीप, जे मूंगा के एटॉल हवे आ पच्छिमी किनारा से कुछ दूर पर बा; आ अंडमान आ निकोबार दीपसमूह, जे अंडमान सागर में ज्वालामुखी कड़ी के ऊपर बा।[69]

भारत के जलवायु हिमालय आ थार के रेगिस्तान से बहुत प्रभावित बा, दुन्नों मिल के भारत खातिर आर्थिक आ सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानसून के संचालन में आपन परभाव छोड़े लें।[70] हिमालय, बिचला एशिया के ठंढा कैटाबेटिक हवा सभ से बचाव करे ला आ इनहन के भारत में प्रवेश करे से रोके ला, भारत, एही अक्षांस वाला बाकी जगहन के तुलना में जाड़ा में गरम रहे ला।[71][72] थार के रेगिस्तान, मानसून के हवा सभ के खींचे ला आ नमी से भरल ई हवा जून से अक्टूबर के बीच भारत के ज्यादातर हिस्सा में बरखा करे लीं।[70] भारत में मुख्य रूप से चारि गो जलवायु प्रकार मिले ला: उष्णकटिबंधीय नम, उष्णकटिबंधीय सूखल, उप-उष्णकटिबंधीय नम, आ परबती[73]

अर्थब्यवस्था[संपादन]

कोचीन में मछुआरा, चीनी जाल के संघे। भारत में मछरी उत्पादन एगो प्रमुख पेशा हवे, खासतौर पर समुंद्र के किनारे वाला इलाक सभमें आ एह काम में लगभग 140 लाख लोग लागल बा। 1990 से 2010 के बीच में भारत में मछरी के उत्पादन दुगुन्ना हो गइल।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइऍमऍफ़) के अनुसार, साल 2015 में भारत के अर्थब्यवस्था US$2.183 ट्रिलियन नौमिनल कीमत वाली रहल; बजार ऍक्सचेंज रेट के हिसाब से ई दुनिया के 7वीं, आ US$8.027 ट्रिलियन कीमत के साथ, परचेजिंग पावर पैरिटी (पीपीपी) के हिसाब से तीसरी सभसे बड़ अर्थब्यवस्था रहल[8] पछिला दू दसक में औसत सालाना जीडीपी बढ़ती 5.8% के दर से रहल जे 2011-12 में बढ़ के 6.1% हो गइल[74] आ एह तरे भारत दुनिया के सभसे तेज बढ़ती करे वाला अर्थब्यवस्था बा।[75] हालाँकि, प्रति बेकती जीडीपी के हिसाब से एकर दुनिया में 140वाँ स्थान बा आ पीपीपी पर गिनल प्रति बेकती जीडीपी के हिसाब से ई 129वाँ नंबर पर बा।[76] साल 1991 ले, भारत में सगरी सरकार सभ संरक्षणवादी आर्थिक नीति के लागू कइलीं जे सोशलिस्ट अर्थशास्त्र से प्रभावित रहे। ब्यापक पैमाना पर सरकारी हस्तक्षेप आ रेगुलेशन सभ, बैस्विक अर्थब्यवस्था आ भारतीय अर्थब्यवस्था के बिचा में देवाल नियन खड़ा रहलें। साल 1991 में पैदा भइल एक ठो आर्थिक संकट के बाद भारतीय अर्थब्यवस्था के खोलल गइल;[77] आ एकरे बाद से ई बजार-आधारित अर्थब्यवस्था के ओर बढ़े लागल[78][79] जेकरा खातिर बिदेसी ब्यापार आ बिदेसी निवेस के आगमन के बढ़ावा दिहल गइल।[80] भारत के हाल के आर्थिक मॉडल पूँजीवादी बाटे।[79] भारत 1 जनवरी 1995 से डब्लूटीओ के मेंबर बा।[81]

2011 तक ले , 4,866 लाख कार्यशील लोग के साथ भारतीय श्रमिक दल दुनिया के दुसरा सभसे बड़ बा।[82] सर्विस सेक्टर द्वारा जीडीपी के 55.6%, उद्योग सेक्टर द्वारा 26.3% खेती सेक्टर द्वारा 18.1% हिस्सेदारी कइल जात बा। भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिमिटेंस साल 2014 में US$70 बिलियन रहल जे दुनिया में एक नंबर रहल आ ई 250 लाख भारतीय लोग द्वारा कमा के ले आइल गइल रहल जे लोग बिदेस में नोकरी करत बा।[83] खेतीबारी से पैदा होखे वाला प्रमुख चीज में चाउर, गोहूँ, तेलहन, कपास, जूट, चाय, ऊख, आ आलू बा।[84] प्रमुख उद्योग सभ में कपड़ा-उद्योग, टेलीकम्युनिकेशन, केमिकल, फार्मास्यूटिकल, बायोटेक्नोलॉजी, फ़ूड प्रोसेसिंग, स्टील, परिवहन के साधन, सीमेंट, खनन, पेट्रोलियम, मशीनरी, आ सौफ्टवेयर उद्योग बाने।[84] साल 2006 में, भारत के जीडीपी में बिदेसी ब्यापार के हिस्सा बढ़ के 24% हो गइल जवन कि सन् 1985 में खाली 6% भर रहल।[78] साल 2008 में, बिस्व ब्यापार में भारत के भागीदारी 1.68% रहल;[85] साल 2011 में, दुनिया के दसवाँ सभसे बड़ आयातक आ उन्नईसवाँ सभसे बड़ निर्यातक देस रहल।[86] मुख्य निर्यात (बाहर भेजल जाए वाला सामान) में पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़ा उद्योग के उत्पाद, गहना, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरी के सामान, केमिकल, आ चमड़ा के उत्पाद सामिल रहलें;[84] आयात में कच्चा पेट्रोलियम, मशीनरी, रतन, खाद, आ केमिकल रहल।[84] साल 2001 से 2011 के बिचा में, कुल निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद के हिस्सेदारी 14% से बढ़ के 42% हो गइल।[87] साल 2013 में भारत कपड़ा उद्योग के चीज बाहर भेजे के मामिला में, चीन के बाद, दुसरा नंबर के सभसे बड़ निर्यातक देस रहल।[88]

भारत के भाषा[संपादन]

मुख्य लेख: भारत के भाषा

भारतीय संविधान कौनों एक राष्ट्रभाषा के वर्णन ना करेला। भारत में कउनो एक राष्ट्रभाषा न हऽ। संविधान के अनुसार केंद्रीय सरकार में काम हिंदी आ अंग्रेज़ी भाषा में होला, आ राज्यन में हिंदी या फिर आपन-आपन क्षेत्रीय भाषा में काम होला। ईहाँ मुख्यतः बोलल जाये वाली भाषवन के सूची नीचे दिहल बाटे:

संस्कृति[संपादन]

हंपी, विजयनगर साम्राज्य के राजधानी'

भारत के सांस्कृतिक इतिहास 4,500 साल से ढेर लमहर बाटे।[89] वैदिक काल (c. 1700 – 500 BCE) में हिंदू दर्शन, पौराणिक कथा, धर्मदर्शनसाहित्य के नेंइ रखाइल, आ बहुत सा परंपरा सभ के स्थापना भइल जिनहन के आज भी पालन हो रहल बा, जइसे कि धर्म, कर्म, योग, आ मोक्ष[21] भारत देस अपना धार्मिक बिबिधता खातिर जानल जाला, जहाँ हिंदू, बौद्ध, सिख, इस्लाम, ईसाइयत, आ जैन प्रमुख धर्म बाने।[90] सबसे प्रमुख, हिंदू धर्म, ऐतिहासिक रूप से कई मत आ संप्रदाय सभ के बिकास से, आ उपनिषद,[91] योग सूत्र, भक्ति आंदोलन,[90]बौद्ध दर्शन के परभाव[92] आज के वर्तमान रूप में आइल बा।

कला आ आर्किटेक्चर[संपादन]

भारत के भवन निर्माण कला, जेह में ताजमहल, अन्य दूसर मुग़ल आर्किटेक्चर, आ दक्खिन भारतीय आर्किटेक्चर सामिल बा, प्राचीन स्थानीय परंपरा आ बाहरी शैली सभ के सुघर मेरवन हवे।[93] भारत के देसी भवन निर्माण कला में भी बिबिध रंग देखाई पड़े लें। संस्कृत ग्रंथ वास्तु शास्त्र से ले के तमिल मामुनि मायन तक ले[94] एह बात के खोज करे लें कि कइसे प्रकृति के शक्ति सभ मानव आवास के निर्धारित करे लीं;[95] इनहन में सटीक ज्यामिति आ दिशा आधारित योजना बतावल गइल बा जेकरा अनुसार ब्रह्मांड के ताकत सभ के साथ समरस बइठा के भवन बनावल जा सके लें।[96] शिल्प शास्त्र, कई ठो मिथकीय ग्रंथ सभ के लड़ी हवे जेकरा से प्रभावित हिंदू मंदिर आर्किटेक्चर में "पूर्ण" के संकल्पना आधारित वर्ग, "वास्तु-पुरुष मंडल", के बिधान मिले ला।[97] आगरा के ताजमहल, जे शाह जहाँ के आदेश पर उनके पत्नी मुमताज महल के याद में 1631 से 1648 के बीच में बनावल गइल, "भारत में मुस्लिम कला के गहना आ बैस्विक रूप से प्रशंसित मास्टरपीस बिस्व धरोहर" के रूप में यूनेस्को के बिस्व धरोहर लिस्ट में शामिल बा।[98] 19वीं सदी में अंग्रेजी शासन में बिकसित इंडो-सारसेनिक आर्किटेक्चर मूल रूप से इंडो-मुस्लिम आर्किटेक्चर के आगे बढ़ावे वाला शैली हवे।[99]

साहित्य[संपादन]

मुख्य लेख: भारतीय साहित्य

भारत में साहित्य के रचना के सुरुआत सभसे पुरान समय में संस्कृत भाषा में भइल जे 1700 ईसा पूर्व से 1200ईसवी के बीच के बा।[100][101] संस्कृत साहित्य में प्रमुख रचना सभ में रामायण आ महाभारत नियर महाकाव्य, कालिदास के नाटक, जइसे कि अभिज्ञानशाकुन्तलम्, आ अन्य महाकाव्य गिनावल जा सके ला।[102][103][104] साहित्य के बिबिध रूप देखे के मिले ला आ कामसूत्र नियर रचना भारते में सभसे पहिले भइल। दक्खिनी भारत में 600 ईसा पूर्व से 300 ईसवी के बीचे के संगम साहित्य के रचना में 2,381 कविता सभ तमिल साहित्य के पूर्ववर्ती मानल जालीं।[105][106][107][108] 14वीं से 18वीं सदी के बीचे में, भारतीय साहित्य में भक्ति आंदोलन के जोर लउके ला आ कबीरदास, तुलसीदास, आ गुरु नानक नियर संत आ कवि लोग एह काल के प्रतिनिधि के रूप में देखल जाला। एह काल के रचना सभ में बिबिध बिचार आ भाव के निरूपण भइल आ ई क्लासिकल (शास्त्रीय) युग के रचना सभ से पर्याप्त रूप से अलग किसिम के बाड़ी सऽ।[109] 19वीं सदी में, भारतीय लेखक लोग के रूचि सामाजिक बराबरी आ मनोबैज्ञानिक बिबरन नियर बिसय में जागल। बीसवीं सदी में बंगाली लेखक रबींद्रनाथ टैगोर के परभाव साहित्य पर देखे के मिले ला[110] जिनका के साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिलल रहल।

नोट[संपादन]

  1. "[...] जन गण मन भारत के राष्ट्रगान हऽ, समय पड़ले पर जइसन भी सरकार निर्धारित करे एक शब्द बदलाव के बिसय बाने; आ गीत वंदे मातरम्, जवन भारत के आजादी के संघर्ष में ऐतिहासिक भूमिका निभा चुकल बा, के जन गण मन के बराबर इज्जत मिले के चाहीं आ एकरा के बराबरी के दर्जा होखी।(Constituent Assembly of India 1950).
  2. भारत के नियंत्रण में आवे वाला सभसे उत्तरी बिंदु बिबादित जम्मू काश्मीर के सियाचिन ग्लेशियर में एक ठो जगह बाटे; हालाँकि, भारत सरका पुरनका जम्मू काश्मीर राज के सगरी इलाका के आपन राज्यक्षेत्र माने ले, जेह में पाकिस्तान प्रशासित गिलगित-बालिस्तान इलाका भी बा। एही से, सरकार सभसे उत्तरी बिंदु 37° 6' के बतावे ले।

संदर्भ[संपादन]

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बाहरी कड़ी[संपादन]

निर्देशांक: 21°N 78°E / 21°N 78°E / 21; 78