सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता (अंग्रेजी: Indus Valley Civilization) चाहे सिंधु सभ्यता, काँसा जुग (ब्रोंज एज) के एगो प्राचीन सभ्यता रहे। ई दक्खिन एशिया (भारतीय उपमहादीप) के उत्तर-पच्छिमी इलाका में करीबन 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक मौजूद रहल। एकर सबसे बिकसित (परिपक्व) काल 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच मानल जाला। प्राचीन मिस्र के सभ्यता आ मेसोपोटामिया की सभ्यता के साथे, सिंधु घाटी सभ्यता दुनिया के सबसे शुरुआती सभ्यतन में से एगो रहे। एह तीनों में सिंधु सभ्यता के बिस्तार सबसे बेसी रहे। ई आज के समय के पाकिस्तान, उत्तर-पच्छिमी भारत आ उत्तर-पूर्वी अफ़गानिस्तान के बहुत बड़हन हिस्सा में फइलल रहे। ई सभ्यता मुख्य रूप से सिंधु नदी के जलोढ़ मैदान में बिकसित भइल आ अपना समृद्धी के ऊँचाई ले चहुँपल। एकरे अलावा, ई ओह स्थायी नदियन के तीरे बिकसित भइल, जिनहना के पानी मानसून से मिलत रहे आ जे कभी घग्घर-हकरा नदी के आसपास बहत रहलीं। आज घग्घर-हकरा उत्तर-पश्चिमी भारत आ पूर्वी पाकिस्तान के एगो मौसमी नदी के रूप में जानल जाले।
कई बेर हड़प्पा नाँव के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता के हड़प्पा सभ्यता कहल जाला। एह सभ्यता के ई नाम हड़प्पा से मिलल, जहाँ 20वीं सदी के शुरुआत में सबसे पहिले आर्कियोलोजिकल खोदाई कइल गइल। ओह समय ई स्थान ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत में रहे, जबकि आज ई पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित बा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के स्थापना 1861 में भइला के बाद शुरू भइल आर्कियोलोजिकल खोज के चलते हड़प्पा आ एकरा कुछ समय बाद मोहनजोदड़ो (मुअन-जो-दरो lit. 'मुर्दन के टीला') के खोज भइल। एही क्षेत्र में प्रारंभिक हड़प्पा आ उत्तरकालीन हड़प्पा संस्कृति भी मौजूद रहल। प्रारंभिक हड़प्पा संस्कृति के विकास नवपाषाण (नियोलिथिक) संस्कृति से भइल रहे। एह नवपाषाण संस्कृति में सबसे पुरान आ सबसे प्रसिद्ध संस्कृति मेहरगढ़ के नाम से जानल जाले। कई बेर हड़प्पा सभ्यता के मैच्योर हड़प्पा सभ्यता कहल जाला, ताकि एकरा के एहसे पहिले के हड़प्पा संस्कृति सभ से अलग पहचानल जा सके।
सिंधु सभ्यता के प्राचीन शहर अपना एकदम बेवस्थित नगर नियोजन खातिर परसिद्ध रहलें। एह शहरन में पक्का ईंट से बनल मकान, बढ़ियाँ जल निकासी बेवस्था, पानी के सप्लाई के व्यवस्था, बड़-बड़ गैर-आवासीय भवनन के समूह, आ हस्तशिल्प तथा धातु-कला के उन्नत तकनीक बिकसित रहल। मोहनजोदड़ो आ हड़प्पा में किदा लगभग 30,000 से 60,000 लोग रहत रहे। अपना उत्कर्ष काल में पूरा सिंधु सभ्यता के जनसंख्या लगभग 10 लाख से 50 लाख के बीच रहल हो सकेला। तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के दौरान एह क्षेत्र के जलवायु धीरे-धीरे नम से सूखा जलवायु में बदले शुरू भइल। मानल जाला कि एही बदलाव से शहरन के बिकास के शुरुआत भइल। बाद में पानी के उपलब्धता एतना कम हो गइल कि सभ्यता के पतन शुरू हो गइल आ एकर बहुत लोग बसे खातिर पूरब दिशा के ओर जाए लागल।
संदर्भ
[संपादन करीं]| विकिमीडिया कॉमंस पर संबंधित मीडिया सिंधु घाटी सभ्यता पर मौजूद बा। |
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