भोजपुरी भाषा

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भोजपुरी (अंग्रेजी: Bhojpuri नस्तालीक:بھوجپوري About this sound listen) भाषाई परिवार के स्तर प एगो इंडो-आर्य भाषा हउवे जेवन मूल रूप से भारत के मध्य गंगा के मैदान के कुछ हिस्सन में आ नेपाल के तराई वाला कुछ हिस्सन में बोलल जाले। भारत में ई भाषा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में, बिहार के पश्चिमी हिस्सा, आ झारखंड के उत्तरी पश्चिमी हिस्सा में बोलल जाले.[१] भोजपुरी जाने-समझे वाला लोगन के विस्तार विश्व के सगरी महाद्वीपन पर बा जेकर कारण बा  अंग्रेजीराज के  समय में  उत्तरपरदेश आ बिहार से अंग्रेजन के  द्वारा ले जाइल गइल मजदूर हवें जिनहन लोगन के वंशज अब ओहीं जा बस गईल बाड़े  लोग जहाँ उनहन लोगन क पूर्वज लोग गइल रहल। एइसन देशन में मारीसस सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद आ टोबैगो, फिजी नीयन देश प्रमुख बाड़ें जहाँ भोजपुरी प्रमुख भाषा की रूप में बोलल आ समझल जाले। भारत की जनगणना आंकड़ा २००१ के  अनुसार भारत में लगभग ३.३ करोड़ भोजपुरी बोले वाला लोग बा ।[२] पूरा विश्व में भोजपुरी जाने वाला लोगन के संख्या लगभग ३.५ करोड़ बा। [३]

नामकरण[संपादन]

भोजपुरी अथवा ‘भोजपुरिया’ भाषा के नामकरण बिहार राज्य के बक्सर जिला में (पहिले आरा (शाहाबाद) जिला में स्थित) भोजपुर नामक गाँव की नाम पर भइल हवे।[४] भोजपुर नाम के एगो बड़ा परगना बा जेवना में "नवका भोजपुर" अउरी "पुरनका भोजपुर" नाँव के दू गो गाँव बाड़ें ।[५] मध्य काल में एह अस्थान के राजपूताने के मूल निवासी भोजवंशी परमार राजा जेवन लोग उज्जैन हो के आइल रहे, बसावल आ एकर नाँव अपनी पूर्वज राजा भोज के नाम पर ‘भोजपुर’ रक्खल । [४] एही भोजपुर राज्य के भाषा के नाँव भोजपुरिया अथवा भोजपुरी भइल ।

पैदाइश[संपादन]

भोजपुरी भाषा के पैदाइश संस्कृत से मानल जाला । हालाँकि कुछ बिद्वान लोग एकर उत्पत्ति प्राकृत से मानेलें । [६] दूसरी ओर कुछ लोग के मानल बा कि भोजपुरी संस्कृत से निकलल हवे । हवलदार त्रिपाठी लंबा समय तक अन्वेषण कार्य कइके इस निष्कर्ष पर पहुँचलें कि भोजपुरी संस्कृते से निकलल हवे । उनके कोश-ग्रन्थ [७] में मात्र 761 धातु सभ के खोज उहाँके कइले बाड़ी आ उहाँ की हिसाब से 761 पद सभ की मूल धातु की वैज्ञानिक निर्माण प्रक्रिया में पाणिनि सूत्र के अक्षरश: अनुपालन भइल बाटे । सब कि बावजूद एह बहस में भोजपुरी के तीसरी प्राकृत से उत्पन्न माने वालन के तर्क ढेर मजबूत बाटे। एकरी अलावा भोजपुरी पाली पर भी काफी मात्रा में आश्रित बाटे । बाद की समय में एह में उर्दू-फ़ारसी के शब्द भी एतना स्वाभाविक रूप से घुल मिल गइल बाडेन कि ऊ भोजपुरी भाषी खातिर बिदेसी ना लागेलें । साथे-साथ अंग्रेजी के शब्द भी देसी उच्चारण की साथ अब भोजपुरी में बहुत पावल जालें जेवन एह भाषा के शब्द-ग्राहकता के प्रबल प्रमाण बा ।

भौगोलिक वर्गीकरण[संपादन]

भौगोलिक वर्गीकरण में उत्तर भारत लगभग सगरी भाषा सभ इण्डो-यूरोपियन परिवार के इण्डो-ईरानियन समूह के भाषा ठहरेलीं । डॉ0 ग्रियर्सन महोदय भारतीय भाषा सभ के अन्तरंगबहिरंग दू तरह की बिसेसता की आधार प अलग-अलग श्रेणी में बँटले बाडीं जेवना में बहिरंग की आधार पर उहाँ के भारतीय भाषा सभ के तीन गो प्रमुख शाखा स्वीकार कइलीं [५]-

(1.) उत्तर पश्चिमी शाखा,

(2) दक्षिणी शाखा, अउरी

(3) पूर्वी शाखा ।

एह में अन्तिम शाखा की अन्तर्गत उड़िया, असमी, बँग्ला अउरी पुरबिया भाषा सभ के गणना कइल जाला । पुरबिया भाषा सभ के बिहारी भाषा भी कहल जाला जेवना में मैथिली, मगही अउरी भोजपुरी – ई तीन गो क्षेत्रीय भाषा बाड़ी । क्षेत्रविस्तार अउरी भाषाभाषी लोगन की संख्या की आधार पर भोजपुरी अपनी बहिन मैथिली अउरी मगही से बड़ ठहरेले ।

क्षेत्रविस्तार[संपादन]

भोजपुरी भाषा प्रधानतया उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिला  अउर बिहार राज्य के पश्चिमी जिला  में बोलल जाले। उत्तरप्रदेश के वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थ नगर आदि जिला के  के रहेवाला  आ बिहार राज्य के शाहाबाद, सारन, चंपारन आदि जिला के  के रहेवाला लोग   के  मातृभाषा भोजपुरी ह।  एकरा अलावा  कलकत्ता नगर में, बंगाल के "चटकल" में असम राज्य के चाय बगान में आ  बंबई के अंधेरी और जोगेश्वरी नामक जगह  में लाखों के संख्या में, भोजपुरी भाषी लोग रहेले।  । अतने ना, मारिशस, फिजी, ट्रिनीडाड, केनिया, नैरोबी, ब्रिटिश गाइना, दक्षिण अफ्रीका, बर्मा (टांगू जिला) आदि देश में बड़ संख्या में भोजपुरी लोग मिलेले ।

  • मुख्यरुप से भोजपुरी बोले जाये वाला जिला :-
बिहार उत्तर प्रदेश नेपाल झारखंड
सारण जिला बलिया जिला रौतहट जिला पलामु जिला
सिवान जिला वाराणसी जिला बारा जिला गढ़वा जिला
गोपालगंज जिला गोरखपुर जिला बिरगञ्ज पर्सा जिला
पुर्वी चम्पारण जिला चन्दौली जिला चितवन जिला
पश्चिम चम्पारण जिला गाजीपुर जिला नवलपरासी जिला
वैशाली जिला मिर्जापुर जिला रुपनदेही जिला
भोजपुर जिला मऊ जिला कपिलवस्तु जिला
रोहतास जिला इलाहाबाद जिला
बक्सर जिला जौनपुर जिला
भभुआ जिला प्रतापगंज जिला
सुल्तानपुर जिला
फैजाबाद जिला
बस्ती जिला
गोंडा जिला
बहराईच जिला
सिद्धार्थ नगर
महाराजगंज जिला
कुशीनगर जिला
देवरिया जिला

भोजपुरी भाषा के बोलि[संपादन]

(1) आदर्श भोजपुरी,

(2) पश्चिमी भोजपुरी

(३) अन्य दू   उपबोलि (सब डाइलेक्ट्स) "मघेसी" तथा "थारु" के नाम से प्रसिद्ध बा |

आदर्श भोजपुरी[संपादन]

जेकरा के  डॉ0 ग्रियर्सन स्टैंडर्ड भोजपुरी कहलेबाड़े  उ  मुख्यरूप से  बिहार राज्य के आरा जिला आ  उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर जिला के पूर्वी भाग आ  घाघरा (सरयू) आ  गंडक के दोआब में बोलल जाले। ई  लम्बा भूभाग में फैलल बा  । एकरा में  अनेक स्थानीय विशेता मिलेला। जहाँ शाहाबाद, बलियागाजीपुर आदि दक्षिणी जिला में "ड़" के   प्रयोग होला ओहिजे  उत्तरी जिला में "ट" के प्रयोग होला । एह प्रकार उत्तरी आदर्श भोजपुरी में जहाँ "बाटे" के प्रयोग होला ओहिजे दक्षिणी आदर्श भोजपुरी में "बाड़े"के प्रयोग होला ।गोरखपुर के  भोजपुरी में "मोहन घर में बाटें" कहल जाला लेकिन  बलिया में "मोहन घर में बाड़ें" कहल जाला। पूर्वी गोरखपुर के  भाषा को 'गोरखपुरी' कहल जाला लेकिन  पश्चिमी गोरखपुर आ  बस्ती जिला   के भाषा के  "सरवरिया" कहल जाला।। "सरवरिया" शब्द "सरुआर" से निकल बा जवन "सरयूपार" के अपभ्रंश रूप ह। "सरवरिया" और गोरखपुरी के शब्द - विशेषत: संज्ञा शब्द- के प्रयोग में भिन्नता मिलेला बलिया (उत्तर प्रदेश) और सारन (बिहार) इ दुनो  जिला  में 'आदर्श भोजपुरी' बोलल जाला। लेकिन  कुछ शब्द के उच्चारण में तनी  अन्तर बा । सारन के लोग "ड" का उच्चारण "र" करेले । जहाँ बलिया निवासी "घोड़ागाड़ी आवत बा" कहेले , ओहिजे  छपरा या सारन का निवासी "घोरा गारी आवत बा" कहिहें। आदर्श भोजपुरी के  एकदम  निरखत  रूप बलिया आ  आरा में बोलल  जाला ।

पश्चिमी भोजपुरी[संपादन]

जौनपुर, आजमगढ़, बनारस, गाजीपुर के पश्चिमी भाग और मिर्जापुर में बोली जाती है। आदर्श भोजपुरी और पश्चिमी भोजपुरी में बहुत अधिक अन्तर है। पश्चिमी भोजपुरी में आदर सूचक के लिये "तुँह" का प्रयोग दीख पड़ता है परंतु आदर्श भोजपुरी में इसके लिये "रउरा" प्रयुक्त होता है। संप्रदान कारक का परसर्ग (प्रत्यय) इन दोनों बोलियों में भिन्न भिन्न पाया जाता है। आदर्श भोजपुरी में संप्रदान कारक का प्रत्यय "लागि" है परंतु वाराणसी की पश्चिमी भोजपुरी में इसके लिये "बदे" या "वास्ते" का प्रयोग होता है। उदाहरणार्थ :

पश्चिमी भोजपुरी -

हम खरमिटाव कइली हा रहिला चबाय के।
भेंवल धरल बा दूध में खाजा तोरे बदे।।
जानीला आजकल में झनाझन चली रजा।
लाठी, लोहाँगी, खंजर और बिछुआ तोरे बदे।। (तेग अली-बदमाश दपर्ण)

मधेसी[संपादन]

मधेसी शब्द संस्कृत के "मध्य प्रदेश" से निकला है जिसका अर्थ है बीच का देश। चूँकि यह बोली तिरहुत की मैथिली बोली और गोरखपुर की भोजपुरी के बीचवाले स्थानों में बोली जाती है, अत: इसका नाम मधेसी (अर्थात वह बोली जो इन दोनो के बीच में बोली जाये) पड़ गया है। यह बोली चंपारण जिले में बोली जाती और प्राय: "कैथी" लिपि में लिखी जाती है।

"थारू" लोग नेपाल की तराई में रहते हैं। ये बहराइच से चंपारण जिले तक पाए जाते हैं और भोजपुरी बोलते हैं। यह विशेष उल्लेखनीय बात है कि गोंडा और बहराइच जिले के थारू लोग भोजपुरी बोलते हैं जबकि वहाँ की भाषा पूर्वी हिन्दी (अवधी) है। हॉग्सन ने इस भाषा के उपर प्रचुर प्रकाश डाला है।

भोजपुरी जन एवं साहित्य =[संपादन]

भोजपुरी बहते सुंदर, सरस, तथा मधुर भाषा हवे । भोजपुरी भाषियन के संख्या भारत के समृद्ध भाषा- बँगला, गुजराती आ मराठी आदि बोले वालन से कम नइखे । यह दृष्टियन से यह भाषा क महत्व बहुत अधिक ह आ एकर भविष्य उज्जवल आ गौरवशाली प्रतीत होला ।

भोजपुरी भाषा में निबद्ध साहित्य प्रचुर परिमाण में ह . अनेक सरस कवि और अधिकारी लेखक एकरे भंडार के भरला में संलग्न बाड़न । भोजपुरिया-भोजपुरी प्रदेश के निवासी लोगन के अपन भाषा से बड़ा प्रेम ह । अनेक पत्र-पत्रिका तथा ग्रन्थ एम्मे प्रकाशित हो रहल बाड़न तथा भोजपुरी सांस्कृतिक सम्मेलन, वाराणसी एकरे प्रचार में संलग्न ह । विश्व भोजपुरी सम्मेलन समय-समय पर आंदोलनात्मक , रचनात्मक आ बैद्धिक तीन स्तरन पर भोजपुरी भाषा, साहित्य आ संस्कृति के विकास में निरंतर जुटल ह । विश्व भोजपुरी सम्मेलन से ग्रन्थ के साथ-साथ त्रैमासिक 'समकालीन भोजपुरी साहित्य' पत्रिका क प्रकाशन हो रहल बा । भारते ना , ग्लोबल स्तर पर भोजपुरी भाषा आ साहित्य क सम्मान ह .


परिचय दास भोजपुरी के आज के कविता में नया शिल्प के सूत्रपात करे वाला कवि बाड़न . उनकर भाषा में एगो क्लासिक रचाव हवे आ ऊ अपना समय के नई दृष्टि से सृजित करेलन . ऊ ' परिछन ' भोजपुरी-मैथिली पत्रिका क सम्पादन कइलन . उनकर लिखल किताबिन के नाम बा - ' एक नया विन्यास' , 'चारुता' , 'पृथ्वी से रस ले के' , 'संसद भवन की छत पर खड़ा हो के' , 'युगपत समीकरण में' , 'लिपि- अलिपि' , 'धूसर कविता' , 'कविता चतुर्थी' , 'आकांक्षा से अधिक सत्वर' , 'मद्धिम आंच में' . ऊ अनन्य ललित निबंधकार , नई समझ क आलोचक आ महत्त्वपूर्ण गद्यकार बाड़न . ऊ मैथिली -भोजपुरी अकादमी , दिल्ली सरकार आ हिन्दी अकादमी , दिल्ली सरकार के सचिव रह चुकल बाड़न . उन कर लिखल रचना आ जीवनी भारत के कई गो विश्वविद्यालयन में पढ़ाई जालीं.

संस्कृत से ही निकली भोजपुरी[संपादन]

आचार्य हवलदार त्रिपाठी "सह्मदय" लम्बे समय तक अन्वेषण कार्य करके इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि भोजपुरी संस्कृत से ही निकली है। उनके कोश-ग्रन्थ ('व्युत्पत्ति मूलक भोजपुरी की धातु और क्रियाएं') में मात्र 761 धातुओं की खोज उन्होंने की है, जिनका विस्तार "ढ़" वर्ण तक हुआ है। इस प्रबन्ध के अध्ययन से ज्ञात होता है कि 761 पदों की मूल धातु की वैज्ञानिक निर्माण प्रक्रिया में पाणिनि सूत्र का अक्षरश: अनुपालन हुआ है।

इस कोश-ग्रन्थ में वर्णित विषय पर एक नजर डालने से भोजपुरी तथा संस्कृत भाषा के मध्य समानता स्पष्ट परिलक्षित होती है। वस्तुत: भोजपुरी-भाषा संस्कृत-भाषा के अति निकट और संस्कृत की ही भांति वैज्ञानिक भाषा है। भोजपुरी-भाषा के धातुओं और क्रियाओं का वाक्य-प्रयोग विषय को और अधिक स्पष्ट कर देता है। प्रामाणिकता हेतु संस्कृत व्याकरण को भी साथ-साथ प्रस्तुत कर दिया गया है। इस ग्रन्थ की विशेषता यह है कि इसमें भोजपुरी-भाषा के धातुओं और क्रियाओं की व्युत्पत्ति को स्रोत संस्कृत-भाषा एवं उसके मानक व्याकरण से लिया गया है।

सन्दर्भ[संपादन]

  1. [http://www.ethnologue.com/show_map.asp?name=NP&seq=30 पश्चिमी नेपाल में बोलल जाए वाली भाषा क नक्शा,
  2. [ http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement1.aspx] भारत के जनगणना – २००१: अलग-अलग मातृभाषा बोलेवालन के संख्या
  3. Gordon, Raymond G., Jr. (ed.), 2005. Ethnologue: Languages of the World, Fifteenth edition. Dallas, Tex.: SIL International.
  4. ४.० ४.१ [कृष्णदेव उपाध्याय : ‘भोजपुरी लोकगीत’, हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रेस, इलाहबाद, ‘पेज नं. १२’]
  5. ५.० ५.१ []
  6. [किशोरीदास वाजपेयी : 'हिंदी शब्दानुशासन, नगरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी; पेज नं.]
  7. [हवलदार त्रिपाठी:'व्युत्पत्ति मूलक भोजपुरी की धातु और क्रियाएं']

वाह्य सूत्र[संपादन]

टेम्पलेट:हिन्दी की बोलियाँ