आबूगीडा

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19वीं सदी के देवनागरी लिखाई के नमूना।

आबूगीडा (अंगरेजी: Abugida) एक किसिम के लिखाई ब्यवस्था सभ हईं जिनहना में व्यंजन आ स्वर के एकसाथ मिला के लिखल जाला। ई अल्फाबेट वाला सिस्टम, जेह में स्वर आ व्यंजन दुनों के खातिर चीन्हा होला आ अलग-अलग लिखल जाला; या ऐब्जाद सिस्टम जेह में स्वर के लिखल कौनों जरूरी ना होला, से अलग किसिम के हईं। उदाहरन खातिर देवनागरी लिखाई में "क्" एक ठो व्यंजन हवे जेह में स्वरन के अलग अलग मात्रा लगा के "क", "का", "कि", "को" नियर लिखल जाला जबकि अंगरेजी अल्फाबेट वाला सिस्टम हवे जेह में "कि" लिखल जाई त "ki" दू गो अक्षर से लिखल जाई।

आबूगीडा नाँव के इस्तेमाल पीटर टी॰ डेनियल्स द्वारा 1990 में लिखाई सभ के किसिम बतावे में कइल गइल।[1] ई वास्तव में इथियोपिया के गी'ज भाषा के शुरुआती चार गो अक्षर (आ, बू, गी, डा) से बनल नाँव हवे; ठीक ओइसहीं जइसे अल्फ़ा आ बीटा नाँव के पहिला दू गो यूनानी अक्षर से "अल्फाबेट" शब्द बनल हवे, या भोजपुरी में पहिला व्यंजन "क" के आधार पर अक्षर सभ के "ककहरा" कहल जाला।

देवनागरी, कैथी नियर ब्राह्मी परिवार के सगरी लिखाई सभ आबूगीडा किसिम के हईं।

संदर्भ[संपादन]

  1. पीटर टी॰ डेनियल्स (Oct–Dec 1990), "फंडामेंटल्स ऑफ ग्रामैटोलॉजी", जर्नल ऑफ दि अमेरिकन ओरिएंटल सोसाइटी 119 (4): 727–731, JSTOR 602899