भोजपुरी

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भोजपुरी
रोमन लिपि में:bhōjpurī
Bhojpuri Word in Devnagari Script.png
देवनागरी लिपि में लिखल "भोजपुरी" शब्द
उच्चारण /bˈpʊəri/[१]
मूलभाषा बाटे भारत, नेपाल, बंगलादेस, मॉरिशस, त्रिनिदाद आ टोबैगो, गयाना, सूरीनाम, आ दक्खिन अफ्रीका
क्षेत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मधेस, मध्य प्रदेश, आ छत्तीसगढ़
मूल बोले वाला
४ करोड़ (२००१ के जनगणना)[२]
जनगणना मे हिंदी के बढ़ा के देखावल गइल बा[३]
इंडो-यूरोपियन
बोली सभ
उत्तरी (गोरखपुरी, सरवरिया)
पच्छिमी (पुरबी, बनरसी)
दक्खिनी (खरवारी)
थारू भोजपुरी
मधेसी
डोमरा
मुसहरी
देवनागरी (वर्तमान), कैथी (ऐतिहासिक)[४]
ऑफिशियल स्टेटस
सरकारी भाषा बाटे
नेपाल, त्रिनिदाद आ टोबैगो, गयाना, फिजी, मॉरिशस, आ सूरीनाम
भाषा कोड
ISO 639-2 bho
ISO 639-3 bhoinclusive code
Individual code:
hns – कैरेबियन हिंदुस्तानी
Glottolog bhoj1246[५]
Linguasphere 59-AAF-sa
Bhojpuri region.jpg
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भोजपुरी (अंग्रेजी: Bhojpuri उर्दू:بھوجپوري About this sound सुनीं) भाषाई परिवार के स्तर प एगो इंडो-आर्य भाषा हउवे जेवन मूल रूप से भारत के मध्य गंगा के मैदान के कुछ हिस्सन में आ नेपाल के तराई वाला कुछ हिस्सन में बोलल जाले। भारत में ई भाषा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में, बिहार के पश्चिमी हिस्सा में, आ झारखंड के उत्तरी पश्चिमी हिस्सा में बोलल जाले।[६] मूल क्षेत्र के अलावा भोजपुरी जाने-समझे वाला लोगन के बिस्तार बिस्व के सगरी महादीप कुल पर बा जहाँ यूरोपियन कॉलोनी रहल अंग्रेज लोग उत्तरपरदेश आ बिहार से भारी संख्या में मजदूरी करे खातिर लोग के ले गइल जिनहन लोग के भाषा भोजपुरी रहल। एइसन देशन में मारीसस सूरिनाम, गुयाना, त्रिनिदाद आ टोबैगो, फिजी नीयन देश प्रमुख बाड़ें जहाँ भोजपुरी प्रमुख भाषा की रूप में बोलल आ समझल जाले, या फिर इहाँ भोजपुरी के मूल में अन्य भाषा सभ के तत्व मिल के नया भाषा सभ के निर्माण भइल बा। भारत की जनगणना आंकड़ा २००१ के अनुसार भारत में लगभग ३.३ करोड़ भोजपुरी बोले वाला लोग बा।[३] पूरा बिस्व में भोजपुरी जाने वाला लोगन के संख्या लगभग ३.५ करोड़ बा।[७]

इतिहास[संपादन]

नाँव[संपादन]

भोजपुरिया या भोजपुरी भाषा के नामकरण बिहार राज्य के पुरनका शाहाबाद जिला (जेकरे बिभाजन से पहिले भोजपुर जिला आ बाद में बक्सर जिला बनल) के एक ठो जगह आ परगना भोजपुर के नाँव पर भइल हवे।[८][९][१०] ग्रियर्सन इहाँ, शाहाबाद के उत्तरी-पच्छिमी हिस्सा में, एक ठो कसबा आ परगना बतलवले बाने जेकरा नाँव पर ए भाषा के नाँव पड़ल।[११] बतावल जाला की मध्य काल में राजपूताना के मूल निवासी भोजवंशी परमार राजा लोग, जे उज्जैन हो के आइल रहे, बसावल आ एकर नाँव अपनी पूर्वज राजा भोज के नाम पर भोजपुर रक्खल। ई गाँव उनहन लो के राजधानी बनल आ एही भोजपुर राज्य के भाषा के नाँव भोजपुरिया अथवा भोजपुरी भइल।[१२] वर्तमान समय में पुरनका भोजपुरनवका भोजपुर नाँव के दू गो गाँव बक्सर जिला के डुमराँव ब्लॉक में बाड़ें। हालाँकि, कृष्णदेव उपधिया अपने पुस्तक में राहुल संकृत्यायन के हवाला दे के लिखले बाने कि पुरनका भोजपुर (जे भोज राजा लो के राजधानी रहल) अब मौजूद नइखे आ ऊ गंगा जी मे दहि गइल।[१२]

पैदाइश[संपादन]

बिद्वान लो भोजपुरी भाषा के पैदाइश मागधी अपभ्रंस से मानेलें।[१३] हवलदार त्रिपाठी के कहनाम बा कि भोजपुरी संस्कृते से निकलल हवे।[१४] भोलानाथ तिवारी एकर उतपत्ति संस्कृत-प्राकृत से मागधी अपभ्रंस, आ मागधी अपभ्रंस से बिहारी भासा सभ (जे में भोजपुरी भी सामिल कइल जाले) बतवले बाने।[१५]

भोजपुरी पर पच्छिमी बोली सभ के प्रभाव भी नोटिस कइल गइल बाटे।[१६] बाद की समय में एह में हिंदी-उर्दू के परभाव भी देखे के मिले ला आ फारसी के शब्द भी एतना स्वाभाविक रूप से घुल मिल गइल बाडेन कि ऊ भोजपुरिहा बेकति खातिर बिदेसी ना लागेलें। साथे-साथ अंग्रेजी के शब्द भी देसी उच्चारण की साथ अब भोजपुरी में बहुत पावल जालें जेवन एह भाषा के शब्द-ग्राहकता के प्रबल प्रमाण बा।

भूगोलीय बिस्तार[संपादन]

भूगोलीय बर्गीकरण[संपादन]

भौगोलिक वर्गीकरण में उत्तर भारत क लगभग सगरी भाषा कुल इण्डो-यूरोपियन परिवार के इण्डो-ईरानियन समूह के भाषा ठहरेलीं। ग्रियर्सन महोदय भारतीय भाषा सभ के अंतरंगबहिरंग, दू तरह की बिसेसता की आधार, प अलग-अलग श्रेणी में बँटलें जेवना में बहिरंग की आधार पर ऊ भारतीय भाषा सभ के तीन गो प्रमुख शाखा स्वीकार कइलें:

  1. उत्तर पच्छिमी शाखा,
  2. दक्खिनी शाखा, अउरी
  3. पुरबी

एह में अन्तिम शाखा के अन्तर्गत उड़िया, असमी, बँग्ला अउरी बिहारी भाषा सभ के गणना कइल जाला। बिहारी में मैथिली, मगही अउरी भोजपुरी – ई तीन गो क्षेत्रीय भाषा बाड़ी। क्षेत्रविस्तार अउरी भाषाभाषी लोगन की संख्या की आधार पर भोजपुरी अपनी बहिन मैथिली अउरी मगही से बड़ ठहरेले।

उत्तर प्रदेश के भाषा सभ के नक्शा, भोजपुरी सभसे दहिने, गहिरा नीला रंग में
Bihari languages
लाल रंग से - भोजपुरी
गुलाबी - मगही, भूरा गहिरा - मैथिलि, मैरून - अंगिका

भोजपुरी क्षेत्र[संपादन]

भोजपुरी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिला कुल अउर बिहार राज्य के पश्चिमी जिला कुल में बोलल जाले। उत्तरप्रदेश के वाराणसी, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थ नगर आदि जिला के रहेवाला आ बिहार राज्य के शाहाबाद, सारन, चंपारन आदि जिला के रहेवाला लोग के मातृभाषा भोजपुरी ह। एकरा अलावा कलकत्ता नगर में, बंगाल के "चटकल" में आ आसम राज्य के चाय बगान में आ बंबई के अंधेरी-जोगेश्वरी नियन जगह में लाखन के संख्या में भोजपुरी भाषी लोग रहेले। अतने ना, मारिशस, फिजी, ट्रिनीडाड, केनिया, नैरोबी, ब्रिटिश गायना, दक्खिन अफ्रीका, बर्मा (टांगू जिला) आदि देश कुल में बड़ संख्या में भोजपुरिया लोग मिलेले।

भारत आ नेपाल के मूल भोजपुरी क्षेत्र के जिलावार बिस्तार:

जिला राज्य/देस जिला राज्य/देस जिला राज्य/देस
कुशीनगर उत्तर प्रदेश महाराजगंज उत्तर प्रदेश गोपालगंज बिहार
गाजीपुर उत्तर प्रदेश मिर्जापुर उत्तर प्रदेश पश्चिम चम्पारण बिहार
गोंडा उत्तर प्रदेश वाराणसी उत्तर प्रदेश पुर्वी चम्पारण बिहार
गोरखपुर उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश बक्सर बिहार
चंदौली उत्तर प्रदेश सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश भभुआ बिहार
जौनपुर उत्तर प्रदेश कपिलवस्तु नेपाल भोजपुर बिहार
देवरिया उत्तर प्रदेश चितवन नेपाल रोहतास बिहार
फैजाबाद उत्तर प्रदेश नवलपरासी नेपाल वैशाली बिहार
बलियाँ उत्तर प्रदेश बारा नेपाल सारण बिहार
बस्ती उत्तर प्रदेश बिरगञ्ज नेपाल सिवान बिहार
बहराईच उत्तर प्रदेश रुपनदेही नेपाल गढ़वा झारखंड
मऊ उत्तर प्रदेश रौतहट नेपाल पर्सा झारखंड
पलामु झारखंड

भोजपुरी भाषा के बोली[संपादन]

(1) आदर्श भोजपुरी

(2) पच्छिमी भोजपुरी

(३) अन्य दू उपबोलि (सब डाइलेक्ट्स) "मधेसी" आ "थारु" के नाम से प्रसिद्ध बा |

आदर्श भोजपुरी[संपादन]

जेकरा के  डॉ0 ग्रियर्सन स्टैंडर्ड भोजपुरी कहलेबाड़े  उ  मुख्यरूप से  बिहार राज्य के आरा जिला आ  उत्तर प्रदेश के बलिया, गाजीपुर जिला के पूर्वी भाग आघाघरा (सरयू) आ गंडक के दोआब में बोलल जाले। ई  लम्बा भूभाग में फैलल बा। एकरा में  अनेक स्थानीय विशेता मिलेला। जहाँ शाहाबाद, बलियागाजीपुर आदि दक्षिणी जिला में "ड़" के   प्रयोग होला ओहिजे  उत्तरी जिला में "ट" के प्रयोग होला। एह प्रकार उत्तरी आदर्श भोजपुरी में जहाँ "बाटे" के प्रयोग होला ओहिजे दक्षिणी आदर्श भोजपुरी में "बाड़े"के प्रयोग होला ।गोरखपुर के  भोजपुरी में "मोहन घर में बाटें" कहल जाला लेकिन  बलिया में "मोहन घर में बाड़ें" कहल जाला। पूर्वी गोरखपुर के  भाषा को 'गोरखपुरी' कहल जाला लेकिन  पश्चिमी गोरखपुर आ बस्ती जिला के भाषा के "सरवरिया" कहल जाला। "सरवरिया" शब्द "सरुआर" से निकल बा जवन "सरयूपार" के अपभ्रंश रूप ह। "सरवरिया" और गोरखपुरी के शब्द - विशेषत: संज्ञा शब्द- के प्रयोग में भिन्नता मिलेला बलिया (उत्तर प्रदेश) और सारन (बिहार) इ दुनो  जिला  में 'आदर्श भोजपुरी' बोलल जाला। लेकिन  कुछ शब्द के उच्चारण में तनी  अन्तर बा । सारन के लोग "ड" का उच्चारण "र" करेले । जहाँ बलिया निवासी "घोड़ागाड़ी आवत बा" कहेले, ओहिजे  छपरा या सारन का निवासी "घोरा गारी आवत बा" कहिहें। आदर्श भोजपुरी के  एकदम निरखत रूप बलिया आ आरा में बोलल  जाला ।

पच्छिमी भोजपुरी[संपादन]

जौनपुर, आजमगढ़, बनारस, गाजीपुर के पच्छिमी हिस्सा आ मिर्जापुर में बोलल जाले। बनारसी भोजपुरी के एगो नीक उदाहरण बा:

हम खरमिटाव कइली हा रहिला चबाय के।
भेंवल धरल बा दूध में खाजा तोरे बदे।।
जानीला आजकल में झनाझन चली रजा।
लाठी, लोहाँगी, खंजर और बिछुआ तोरे बदे।। (तेग अली-बदमाश दपर्ण)

भोजपुरी के लिखाई[संपादन]

कैथी लिखाई[संपादन]

मुख्य लेख: कैथी

पहिले के समय में उत्तर भारत में नॉर्थ-वेस्टर्न प्रोविंस, अवध आ भोजपुरी क्षेत्र में आ नेपाल के मधेस क्षेत्र में आम चलन में कैथी लिखाई के इस्तमाल होखे। एह लिपि में कानूनी दस्तावेज, प्रशासनिक कामकाज के ब्यौरा आ निजी दस्तावेज लिखल जायँ।[१७] भोजपुरी लिखे खातिर भी एही के इस्तमाल होखे।

कैथी लिखाई बायें से दाहिने लिखल जाले।[१८]आबूगीडा प्रकार के लिखाई हवे। एह में व्यंजन में स्वर के चीन्हा मिला के लिखल जालें। स्वर के अक्षर सभ के अलग से भी लिखल जा सके ला। स्वर के चीन्हा व्यंजन अक्षर के ऊपर, नीचे आगे आ पाछे (अलग-अलग स्वर अनुसार) लागे लें। कैथी लिपि के एक ठो खासियत हवे कि एह में उपर के पड़ी पाई ना लागे ला।[१९]

बिहार में जमीन के खतियान के रिकार्ड पुरान समय से कैथी लिखाई में बा। आ अभिन ले इनहन के पढ़े खातिर कैथी के जानकार लोग के जरूरत पड़े ला।[२०] वर्तमान में एह लिखाई के बस इहे महत्व रहि गइल बाटे आ बतावल जात बा कि एकरा जानकार लोग के कमी से काफी दिक्कत भी हो रहल बाटे। हाल में कैथी लिपि सिखावे खातिर कुछ कोसिस भइल बा।[२१]

देवनागरी लिखाई[संपादन]

मुख्य लेख: देवनागरी

संदर्भ[संपादन]

  1. "Bhojpuri - definition of Bhojpuri in English". Oxford Dictionaries. तारीख 2016-10-18 के उतारल गइल. 
  2. भोजपुरी at Ethnologue (18th ed., 2015)
    कैरेबियन हिंदुस्तानी at Ethnologue (18th ed., 2015)
  3. ३.० ३.१ "Census of India: Abstract of speakers’ strength of languages and mother tongues –2001". Censusindia.gov.in. तारीख 2016-10-18 के उतारल गइल. 
  4. Bhojpuri Ethnologue World Languages (2009)
  5. Nordhoff, Sebastian; Hammarström, Harald; Forkel, Robert; Haspelmath, Martin, संपा. लोग (2013). "Bhojpuric". Glottolog 2.2. Leipzig: Max Planck Institute for Evolutionary Anthropology. 
  6. "Nepal - Maps" (in English). Ethnologue. तारीख 2016-10-18 के उतारल गइल. 
  7. "Bhojpuri" (in English). Ethnologue. तारीख 2016-10-18 के उतारल गइल. 
  8. L.S.S. O'malley (1 जनवरी 2007). Bihar And Orissa District Gazetteers : Saran. Concept Publishing Company. pp. 40–. ISBN 978-81-7268-136-4. 
  9. Dineschandra Sircar (1966). Indian Epigraphical Glossary. Motilal Banarsidass Publ. pp. 56–. ISBN 978-81-208-0562-0. 
  10. Pradyot Kumar Maity (1989). Human Fertility Cults and Rituals of Bengal: A Comparative Study. Abhinav Publications. pp. 34–. ISBN 978-81-7017-263-5. 
  11. ग्रियर्सन, जॉर्ज अब्राहम (1903). Linguistic Survey of India, Vol. V, Part-2 [भारत क भाषाबैज्ञानिक सर्वे, खंड पाँच, भाग-२] (in English). कलकत्ता: गवर्नमेंट प्रेस. p. 40. तारीख 19 अक्टूबर 2016 के उतारल गइल. 
  12. १२.० १२.१ उपाध्याय, कृष्णदेव. भोजपुरी लोकगीत. इलाहाबाद: हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रेस. p. 12. 
  13. वाजपेयी, आचार्य किशोरीदास. हिंदी शब्दानुशासन. बनारस: नागरी प्रचारिणी सभा. 
  14. त्रिपाठी, हवलदार. व्युत्पत्ति मूलक भोजपुरी की धातु और क्रियाएं. 
  15. भोलानाथ तिवारी. हिंदी भाषा का इतिहास. दिल्ली: वाणी प्रकाशन. pp. 107–. 
  16. रामविलास शर्मा (1 सितंबर 2008). भरत के प्राचीन भाषा परिवार और हिंदी (भाग-१). राजकमल प्रकाशन. pp. 189–. ISBN 978-81-267-0352-4. 
  17. King, Christopher R. 1995. One Language, Two Scripts: The Hindi Movement in Nineteenth Century North India. New York: Oxford University Press.
  18. Akira Nakanishi (1990). Writing Systems of the World. Tuttle Publishing. pp. 68–. ISBN 978-0-8048-1654-0. 
  19. Saroja Agravāla (2004). Hindī ke janajātimūlaka upanyāsoṃ kī samājaśāstrīya cetanā aura usakā aupanyāsika pratiphalana. Star Publications. pp. 115–. ISBN 978-81-85244-86-0. 
  20. Khabar, Prabhat (2016-05-12). "ढूंढ़ने से भी जिले में नहीं मिल रहे कैथी लिपि के अनुवादक". Prabhatkhabar.com. तारीख 2016-11-20 के उतारल गइल. 
  21. "कैथी लिपि का प्रशिक्षण शिविर 11 जुलाई से". Bhaskar.com. 2015-07-02. तारीख 2016-11-20 के उतारल गइल.