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गोरखनाथ

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गुरु गोरखनाथ
लक्ष्मणगढ़ के मंदिर में गोरखनाथ के मूर्ती
Personal life
Born~ 11वीं सदी
Known forहठ योग, नाथ संप्रदाय, गोरखा, गोरखपुर
Honorsमहायोगी
Religious life
Religionहिंदू धर्म
Founder ofनाथ मठ आ मंदिर
Senior posting
Guruमछेंदरनाथ

गुरु गोरखनाथ (संस्कृत: गोरक्षनाथ) हिंदू परंपरा में के जोगी लोग के नाथ पंथ के स्थापना करे वाला संत रहलें।[1] इनके जीवन के बारे में बहुत जानकारी ना बा। कथा के मोताबिक ई मछेंदरनाथ के चेला रहलें। गोरखनाथ द्वारा स्थापित मत के माने वाला लोग जोगी, दर्शनी, भा कनफटवा कहाला आ ई लोग हिमालय के तराई के इलाका में पंजाब से ले के बिहार ले फइलल बा आ नैपालो में मजिगर संख्या में बा।

गोरखनाथ के हिंदू परंपरा में "महायोगी" मानल जाला। ऊ नवनाथ परंपरा के नौ गो संत लोगन में आवे लें। एह आध्यात्मिक परंपरा में हिंदू देवता (त्रिदेव में सामिल) शिव के पहिला गुरु मानल जाला। गोरख के जिनगी के बारे में जे कथा-कहानी चलन में बाड़ी उनहन में बतावल जाला कि ऊ समय के बंधन से बाहर रहलन आ अलग-अलग जुग में धरती पर प्रकट भइलन।

गोरखनाथ कवनो एक खास दार्शनिक सिद्धांत चाहे अंतिम सत्य पर जोर ना देलन। उनकर मानन रहे कि बिना पक्षपात के सत्य के खोज कइल मनुष्य के स्वाभाविक आ मूल्यवान लक्ष्य हवे। ऊ योग, आध्यात्मिक अनुशासन आ अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन के समाधि के आ आध्यात्मिक मुक्ति तक ले पहुँचे के सबसे जरूरी साधन मनलन।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर इनहीं के नाँव पर बसल शहर बा जहाँ परसिद्ध गोरखनाथ मठ बाटे। नेपाल में एगो जिला गोरखा जिला इनहीं के नाँव पर हवे आ नेपाल आ भारत के तराई इलाका में रहे वाला गोरखा लोग के नाँव इनहीं के नाँव पर पड़ल हवे। नेपाल के राजशाही के दौरान इनका के मूल देवता मानल जाव। पशुपतिनाथ मंदिर में गोरखनाथ के अलगा से अस्थान दिहल गइल बाटे।

गुरु गोरख के प्रसिद्ध रचना सभ में गोरख गीता, योग सिद्धांत पद्धति, योगबीज, आ योगचिंतामणि नियन कई ग्रंथ बाड़ें। गोरखनाथ के कबितई में रचल चीज सभ हिंदी साहित्य के अंग के रूप में गोरखबानी के नाँव से संकलित कइल गइल बाड़ी स।

इतिहासी मत

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इतिहासकार लोग एह बात पर सहमत बा कि गोरखनाथ के जीवनकाल ईस्वी सन् के दुसरी सहस्राब्दी (मिलेनियम) के पहिला आधा हिस्सा में पड़ेला, हालाँकि ऊ ठीक कवन सदी में रहलें, एह पर मतभेद बा। पुरातात्त्विक आ साहित्यिक प्रमाणन के आधार पर कुछ विद्वान उनका के 11वीं–12वीं सदी के मानेलें,[2] जबकि कुछ अउरी बिद्वान लोग उनका के 14वीं सदी में रखेलें।[3] एबॉट के अनुसार, बाबा फरीद से जुड़ल दस्तावेज आ ज्ञानेश्वरी के पांडुलिपि गोरखनाथ के 13वीं सदी में स्थापित करेली।[4] दुसरे ओर, ग्रियर्सन गुजरात से मिलल प्रमाणन के आधार पर उनका के 14वीं सदी के मानेलें।[4] गोरखनाथ के उल्लेख कबीरगुरु नानक के कविता सभ में भी मिलेला, जहाँ उनका के बहुत प्रभावशाली नेता आ विशाल अनुयायी समूह वाला संत के रूप में वर्णित कइल गइल बा।[5]

ऐतिहासिक ग्रंथन से संकेत मिलेला कि गोरखनाथ शुरुआत में अइसन क्षेत्र में बौद्ध परंपरा से जुड़ल रहलें जहाँ शैव धर्म के प्रभाव मजबूत रहे। बाद में ऊ हिंदू धर्म से जुड़ गइलें आ शिवयोग के प्रमुख समर्थक बनलें।[6] गोरखनाथ के जीवन आ विचार पर कुमारिल भट्टआदि शंकराचार्य के प्रभाव देखल जाला जेकरा चलते ऊ योग आ अद्वैत वेदांत के दृष्टिकोण से उपनिषद सभ के व्याख्या के समर्थन कइलें।[7] गोरखनाथ के मत में मध्यकालीन भारत में द्वैतवादअद्वैतवाद के बीच के विवाद व्यावहारिक दृष्टि से बहुत उपयोगी ना रहे। उनका अनुसार, असली महत्त्व एह बात के बा कि योगी कवन मार्ग अपनावेला। ऊ मानत रहलें कि आध्यात्मिक अनुशासन, साधना आ योगाभ्यास के माध्यम से, चाहे कवनो मार्ग चुनल जाव, साधक आखिरकार व्यक्तिगत चेतना के पूर्ण रूप से प्रकाशित समाधि अवस्था तक पहुँच सकेला।[8]

हैगियोग्राफिक विवरण

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गोरखनाथ से जुड़ल संत-चरित (हैगियोग्राफी) साहित्य में उनकरा पृथ्वी पर कई बेर प्रकट होखे के वर्णन मिलेला। एह लोककथा आ धार्मिक विवरणन में उनका जनम के निश्चित समय भा जगह (लोकेशन) के उल्लेख ना मिले ला, बलुक उनका के अलौकिक आ मानवीय सीमा से परे व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत कइल जाला। उत्तर भारत के हैगियोग्राफिक परंपरा के अनुसार गोरखनाथ के उत्पत्ति उत्तर-पश्चिम भारत, खासकर पंजाब क्षेत्र से मानल जाला, जबकि कुछ विवरण में पेशावर के भी उल्लेख मिले ला। एकरा विपरीत, बंगाल आ बिहार के कुछ हैगियोग्राफी में उनका के भारत के पूर्वी क्षेत्र, विशेष रूप से आसाम, से संबंधित बतावल गइल बा।

उपलब्ध हैगियोग्राफिक स्रोत गोरखनाथ के आध्यात्मिक गुरु-परंपरा के बारे में भी अलग-अलग विवरण देलें। सभे बिबरन आदिनाथमछेंदरनाथ के गोरखनाथ से पहिले के गुरु के रूप में स्वीकार करे लें। हालाँकि, कुछ परंपरन में आदिनाथ से पहिले पाँच गो अउरी गुरु लोगन के जिकिर मिलेला, जबकि दुसरे बिबरन में मछेंदरनाथ आ गोरखनाथ के बीचा में छह गो गुरु लोग के नाँव बतावल गइल बा। वर्तमान नाथ परंपरा के अनुसार आदिनाथ, जिनका के आमतौर पर शिवजी के रूप मानल जाला, मछेंदरनाथ के के प्रत्यक्ष गुरु रहलें। मछेंदर के बाद गोरखनाथ उनका प्रत्यक्ष शिष्य आ उत्तराधिकारी मानल जालें।

इहो देखल जाय

[संपादन करीं]
  1. George Weston Briggs (1938), Gorakhnath and the Kanphata Yogis, 6th Edition (2009 Reprint), Motilal Banarsidass. ISBN 978-8120805644, p. 228
  2. Briggs 1938, p. 249.
  3. Briggs 1938, pp. 228–230.
  4. 1 2 Briggs 1938, pp. 230, 242–243.
  5. Briggs 1938, pp. 236–242.
  6. Briggs 1938, pp. 229, 233–235.
  7. Akshaya Kumar Banerjea 1983, pp. xli, 303–307.
  8. Akshaya Kumar Banerjea 1983, pp. xli, 307–312.