उत्तर प्रदेश

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उत्तर प्रदेश
اتر پردیش
राज्य
उत्तर प्रदेश
बीच में: बनारस क मुंशी घाट; ऊपर से घड़ी के दिसा में: ताज महल; काशी विश्वनाथ मंदिर; बुलंद दरवाजा; एत्मादुदौला के मकबरा; इलाहाबाद में नया यमुना पुल; सारनाथ में धम्मेक स्तूप; प्रेम मंदिर, मथुरा; इलाहाबाद विश्वविद्यालय
बीच में: बनारस क मुंशी घाट; ऊपर से घड़ी के दिसा में: ताज महल; काशी विश्वनाथ मंदिर; बुलंद दरवाजा; एत्मादुदौला के मकबरा; इलाहाबाद में नया यमुना पुल; सारनाथ में धम्मेक स्तूप; प्रेम मंदिर, मथुरा; इलाहाबाद विश्वविद्यालय
Coat of arms of उत्तर प्रदेशاتر پردیش
Coat of arms
भारत में लोकेशन
भारत में लोकेशन
Location of उत्तर प्रदेशاتر پردیش
Coordinates: 26°51′N 80°55′E / 26.85°N 80.91°E / 26.85; 80.91निर्देशांक: 26°51′N 80°55′E / 26.85°N 80.91°E / 26.85; 80.91
देस  भारत
राज्य के दर्जा

26 जनवरी 1950

राजधानी लखनऊ
जिला 75[1]
सरकार
 • संस्था उत्तर प्रदेश सरकार
 • राज्यपाल राम नाइक[2]
 • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (भाजपा)
 • बिधानसभा
 • संसद सीट
 • हाइकोर्ट इलाहाबाद हाइकोर्ट
रकबा
 • कुल 240,928 km2 (93,023 sq mi)
रकबा रैंक 4था
जनसंख्या (2011)[1]
 • कुल 199,281,477
 • रैंक 1
 • जनघनत्व 830/km2 (2,100/sq mi)
भाषा
 • ऑफिशियल हिंदी
 • दूसर ऑफिशियल उर्दू
 • अन्य लोकल भोजपुरी, अवधी
टाइम जोन आइएसटी (यूटीसी+05:30)
UN/LOCODE IN-UP
गाड़ी नंबरप्लेट UP 01—XX
एचडीआइ Increase 0.5415 (medium)
एचडीआइ रैंक 18वाँ (2007-08)
साक्षरता
  • 67.7%
  • 77.3% (पुरुष)
  • 57.2% (महिला)
वेबसाइट www.up.gov.in

उत्तर प्रदेश या यूपी भारत क सभसे ढेर जनसंख्या वाला राज्य आ दुनिया में सभसे ढेर जनसंख्या वाला देस-उपबिभाग बाटे। भारतीय उपमहादीप के उत्तरी-बिचला इलाक में पड़े वाला एह राज्य के कुल आबादी लगभग 200 मिलियन (2 अरब) बाटे। लखनऊ एह राज्य के राजधानी हवे।

ब्रिटिश शासन के दौरान 1 अप्रैल 1937 के यूनाइटेड प्रोविंस के नाँव से ई प्रदेश के रूप में बनावल गइल आ आजादी के बाद 1950 में एकर नाँव बदल के उत्तर प्रदेश रखाइल। 9 नवंबर 2000 के एह राज्य से उत्तरी पहाड़ी इलाका के अलग क के उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य बनल। वर्तमान में, प्रशासन खातिर ई अठारह गो मंडल आ 75 जिला में बिभाजित कइल गइल बा।

भूगोलीय रूप से ई राज्य गंगा के मैदान के सपाट हिस्सा में स्थित बा आ इहाँ उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पावल जाले। राज्य के पछिम ओर राजस्थान; उत्तर-पच्छिम में हरियाणा, दिल्लीहिमाचल प्रदेश; उत्तर में उत्तराखंडनेपाल; पूरुब ओर बिहार आ दक्खिन ओर मध्य प्रदेश बाड़ें; जबकि एकदम दक्खिन-पूरुब के छोर पर एकर कुछ सीमा झारखंडछत्तीसगढ़ के साथ भी सटल बा। कुल 243,290 बर्ग किलोमीटर (93,933 बर्गमील) रकबा वाला ई राज्य भारत के 7.33% भाग हवे आ चउथा सबसे बड़ राज्य भी हवे।

अर्थब्यवस्था के आकार के मामिला में ई भारत के तीसरा सभसे बड़ राज्य बा जहाँ जीडीपी ₹9,763 बिलियन (US$150 बिलियन) बाटे। खेती आ सर्विस क्षेत्र प्रमुख आर्थिक कामकाज बाड़ें; सर्विस सेक्टर में परिवहन, पर्यटन, होटल, अचल संपत्ति, इंशोरेंस आ फाइनेंस संबंधी चीज सामिल बाटे। गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर, गोरखपुर, इलाहाबाद, भदोही, रायबरेली, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, सोनभद्र, आ बनारस एह राज्य में औद्योगिक रूप से महत्व वाला शहर बाने।

प्राचीन आ मध्य्कालीन दौर में उत्तर प्रदेश ताकतवर राज सभ के भूमि रहल बा। इहाँ प्राकृतिक आ इतिहासी पर्यटन के कई जगह बा जइसे की आगरा, बनारस, कौशांबी, बलियाँ, श्रावस्ती, गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ, इलाहाबाद इत्यादि। धार्मिक रूप से हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख शाखा वैष्णव मत के दू गो अवतार रामकृष्ण एही राज्य में पैदा भइल बतावल जालें आ अजोध्यामथुरा प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ हवें। गंगा के तीरे बसल बनारस आ गंगा आ यमुना नदी के संगम पर मौजूद इलाहाबाद के हिंदू धरम में बहुत महत्व बा। दूर उत्तर-पूरुब कोना पर मौजूद गोरखपुर नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक गोरखनाथ के भूमि मानल जाले।

इतिहास[संपादन]

आदिकाल[संपादन]

शिकार आ भोजन संग्रह करे वाला आदिम मनुष्य लोग के उपस्थिति एह इलाका में रहल जहाँ आज के उत्तर प्रदेश बा[3][4][5] आ अनुमान बा की ई लोग[6] 85,000 से 72,000 साल पहिले इहाँ रहे। इहाँ से पुरापाषाणकाल के चीज भी मिलल बा जे 21,000–31,000 साल पुरान बतावल गइल बा[7] आ मेसोलिथिक/माइक्रोलिथिक जमाना के आदिम लोग के 10550–9550 ईसा पूर्व के बस्ती के अवशेष प्रतापगढ़ जिला से मिलल बा जेह में पालतू मवेशी, बकरी आ भेड़ पाले आ खेती के सुरुआत के प्रमाण कम से कम 6000 ईसा पूर्व तक ले के मिलल बा जे धीरे-धीरे c. 4000 से 1500 ईसापूर्व ले बिकसित भइल; सिंधु घाटी सभ्यता आ हड़प्पा संस्कृति के दौर से होत वैदिक काल आ लोहा के जुग ले आइल।[8][9][10]

प्राचीन जुग[संपादन]

राम क पेंटिंग, बगल में सीता आ लक्ष्मन भी बाने
राम के बनगमन के दृश्य, सीता आ लछमन के साथ।

महाजनपद काल में कोसल राज्य के बिस्तार ओही इलाका में रहे जवन आज के जमाना के उत्तर प्रदेश के सीमा के भीतर आवे ला।[11] हिंदू कथा के मोताबिक अवतारी पुरुष राम अजोध्या के राजा रहलन जे कोसल के राजधानी रहे।[12] कृष्ण, हिंदू कथा के अन्य पात्र, जिनके महाभारत में प्रमुख भूमिका रहल आ जिनके बिष्णु के अवतार मानल जाला, उत्तर प्रदेश के मथुरा में पैदा भइल बतावल जालें।[11] महाभारत के लड़ाई ऊपरी दुआबा आ दिल्ली के आसपास के इलाका में भइल रहल जहाँ कुरु महाजनपद रहल आ पांडव लोग के शासन भइल। इतिहास के हिसाब से कुरु जनपद के काल उहे हवे जे करिया आ लाल माटी के बर्तन वाला जुग हवे, यानि उत्तरी-पच्छिमी भारत में लोहा जुग के सुरुआत, लगभग 1000 ईसा पूर्व के समय।[11]

दक्खिन भारत पर हमला करे वाला ज्यादातर लोग गंगा के मैदान के इलाका से जरूर गुजरल जेकरा आज के उत्तर प्रदेश कहल जाला। एह इलाका पर कंट्रोल कइल सगरी भारतीय साम्राज्य सभ खातिर बहुत महत्व के चीज रहल बा आ अपना स्थायित्व आ बिकास खातिर सगरी बड़हन साम्राज्य सभ एह इलाका के महत्व दिहले बाने, एह में मौर्य (320–200 BC), कुषाण (CE 100–250), गुप्त (350–600), आ गुर्जर-प्रतिहार (650–1036) साम्राज्य के नाँव गिनावल जा सकत बाटे।[13] गुप्त साम्राज्य के तूर देवे वाला हूण आक्रमण के पाछे-पाछे गंगा के मैदान के एह इलाका में कन्नौज के उदय भइल।[14] हर्षवर्धन (590–647) के राज में कन्नौज के राजघराना अपना चरम पर पहुँच गइल।[14] एह समय ई पंजाब से लेके गुजरात ले आ पूरुब में बंगाल से उड़ीसा ले बिस्तार लिहले रहल।[11] एह में मध्य भारत के कुछ अइसन इलाका भी शामिल रहल जे नर्मदा नदी के दक्खिन के इलाका रहल, पूरा गंगा-जमुना मैदान टेम्पलेट एकर भाग रहबे कइल।[15] वर्तमान भारत में कई समुदाय बाने जे अपना के एह कन्नौज के राज से फइलल लोग के बंसज बतावे ला।[16] हर्ष के मउअति के बाद उनके ई साम्राज्य कई राजघराना सभ में टूट गइल, इनहन पर गुर्जर-प्रतिहार लोग आक्रमण कइल आ शासन कइल, एकरा बाद ई लोग के बंगाल के पाल बंस के भी चुनौती दिहल।[15] कन्नौज पर दक्खिनी भारत के राष्ट्रकूट बंस के लोग द्वारा आठवी से दसवीं सदी के बीच भी कई गो आक्रमण भइल।[17][18]

मध्यकाल आ सुरुआती आधुनिक जुग[संपादन]

16वीं सदी में, फरगाना घाटी (आधुनिक उजबेकिस्तान) के रहे वाला आ तैमूर आ चंगेज खान के बंसज, बाबर द्वारा खैबर दर्रा से हो के दक्खिनी एशिया में आक्रमण कइल गइल आ मुग़ल साम्राज्य के स्थापना भइल जेह में वर्तमान समय के अफगानिस्तान, पाकिस्तान, उत्तर भारत आ बांग्लादेश के हिस्सा आवे लें।[19] मुग़ल लोग मध्य एशिया के तुर्क लोग के बंसज रहे आ इनहन लोग के बंस में मंगोल पूर्वज लोग के भी मिलावट रहे। मुग़ल काल में उत्तर प्रदेश के इलाका साम्राज्य के हिरदय (हार्टलैंड) नियर बन गइल।[16] मुग़ल शासक बाबर आ हुमायूँ दिल्ली से शासन कइल।[20][21] साल 1540 में अफगान योद्धा, शेर शाह सूरी द्वारा मुग़ल बादशाह हुमायूँ के हरा के उत्तर प्रदेश पर अधिकार जमा लिहल गइल।[22] शेर शाह आ उनके लड़िका इस्लाम शाह द्वारा उत्तर प्रदेश पर ग्वालियर से शासन कइल गइल।[23] इस्लाम शाह के मौत के बाद उनके परधानमंत्री हेमू उत्तर प्रदेश के डि फैक्टो शासक बन गइल अ एह राज में बिहार, मध्य प्रदेश, आ बंगाल के पच्छिमी हिस्सा भी शामिल रहल। हेमू आपन टाइटिल हेमचंद्र विक्रमादित्य रखलें आ उनके औपचारिक राज्यारोहण दिल्ली के पुराना किला में 7 अक्टूबर 1556 के भइल। पानीपत के दूसरा जुद्ध में हेमू के निधन भइल आ उत्तर प्रदेश पर अकबर क शासन स्थापित भइल।[24] अकबर द्वारा आगरा आ फतेहपुर सीकरी से शासन चलावल गइल।[25] 18वीं सदी में मुगल साम्राज्य के पतन के बाद खाली जगह के मराठा साम्राज्य द्वारा भरल गइल आ मराठा लोग उत्तर प्रदेश पर हमला कइल जेह में रोहिल्ला लोग हार गइल आ रुहेलखण्ड पर रघुनाथ राव आ मल्हाराव होलकर के शासन हो गइल। मराठा आ रोहिल्ला लोग के बिचा में संघर्ष के अंत भइल 18 दिसंबर 1788 के, जब नजीबुद्दौला के पोता गुलाम कादिर के महादजी सिंधिया द्वारा हरा के गिरफ्तार क लिहल गइल। 1803 में दूसरा आंग्ल-मराठा जुद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा मराठा लोग के हरा दिहल गइल आ उत्तर प्रदेश पर अंगरेजी राज स्थापित हो गइल।[26]

ब्रिटिश राज में[संपादन]

उत्तर प्रदेश के नाँव बदलाव आ क्षेत्र बदलाव के समयरेखा[27]
1807 सीडेड एंड कॉन्कर्ड प्रोविंस
14 नवं 1834 आगरा प्रेसिडेंसी
1 जन 1836 नार्थ-वेस्टर्न प्रोविंस
3 अप्रै 1858 ब्रिटिश अवध अलग भइल, दिल्ली के नार्थ-वेस्टर्न प्रोविंस से बिलगा के पंजाब में सामिल कइल गइल
1 अप्रै 1871 अजमेर, मेवाड़ आ केकरी के अलग कमिश्नर-शिप में डालल गइल
15 फर 1877 नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस में अवध के शामिल कइल गइल
22 मार्च 1902 'आगरा अवध संजुक्त प्रांत' नाँव कइल गइल
3 जन 1921 'ब्रिटिश भारत के संजुक्त प्रांत' नाँव कइल गइल
1 अप्रै 1937 'संजुक्त प्रान्त (यूनाइटेड प्रोविंस)' नाँव कइल गइल
1 अप्रै 1946 खुद शासन के स्वीकार कइल गइल
15 अग 1947 आजाद भारत के राज्य
24 जन 1950 नाँव बदल के 'उत्तर प्रदेश' कइल गइल
9 नवं 2000 वर्तमान उत्तराखंड के 'उत्तरांचल' के नाँव से अलग राज्य बनावल गइल।

18वीं सदी के दूसरा हिस्सा में उत्तर भारत में कई गो लड़ाई, बंगाल से सुरू हो के पच्छिम के ओर बढ़त क्रम में, भइल आ इलाका धीरे-धीरे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन में आ गइल।[28] अजमेरजयपुर के राजघराना एही कंपनी राज में नार्थ-वेस्टर्न टेरीटरी (उत्तर-पच्छिमी इलाका) में शामिल कइल गइल रहल आ एकर नाँव तब "नार्थ-वेस्टर्न प्रोविंस" (आगरा के) रखल गइल रहे। बाद में यूपी भारत के पाँचवाँ सभसे बड़ राज्य बनल, बाकिर ई तबो ब्रिटिश भारत के सभसे छोट राज्य रहे।[29] एकर राजधानी दू बेर आगरा आ इलाहाबाद के बीच एहर-ओहर कइल गइल।[30]

ब्रिटिश शासन से गम्हिराहे असंतोख के चलते बंगाल रेजीमेंट के सिपाही लोग जे मेरठ में तैनात रहल, बिद्रोह क दिहल। एह घटना में उत्तर प्रदेश के मंगल पांडे के बिद्रोह के सुरुआत करे के श्रेय दिहल जाला।[31] एकरे बाद क्रम से बिद्रोह के बिस्तार होत गइल आ इतिहास में ई 1857 के बिद्रोह भा भारत के पहिली आजादी के लड़ाई के रूप में देखल जाला। कानपुर में नाना साहेब, तात्यां टोपे, आ अजीमुल्ला, लखनऊ में बेगम हजरत महल, झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई, बरेली में खान बहादुर खान, फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह, कालपी में ताँत्या टोपे, इलाहाबाद में लियाकत अली, मेरठ में कदम सिंह आ मथुरा में देवी सिंह एह बिद्रोह के अगुआई कइल लोग। कुछ दिन बाद जब ब्रिटिश सासन दोबारा आपन सत्ता कायम क लिहलस, 1 नवंबर 1958 के इलाहाबाद में दरबार के आयोजन कइल गइल आ लार्ड कैनिंग महारानी के घोषणापत्र पढ़लें आ एकरे बाद भारत के सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ से सीधे इंग्लैंड के महारानी के हाथ में चल गइल। बिद्रोह के बिफलता के बाद के राजीनीतिक स्थिति में अंग्रेज लोग आपन स्थिति अउरी पोढ़ करे खाती बिद्रोही प्रदेश सभ के बाँट के नया तरीका से राजनीतिक बिभाजन कइल। नार्थ-वेस्ट प्रोविंस के दिल्ली इलाका के पंजाब के संघे बिलय क दिहल गइल, अजमेर आ मारवाड़ के राजपुताना में बिलय कइल गइल, अवध के नया राज्य के रूप में स्थापित कइल गइल आ एकर नाँव 'नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध' रखल गइल, जेकरा के 1902 में 'यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध' क दिहल गइल।[32] आमतौर पर एकरा के यूनाइटेड प्रोविंस भा यूपी कहल जाए लागल।[33][34]

1920 में राजधानी के इलाहाबाद से लखनऊ ले जाइल गइल। हाईकोर्ट के इलाहाबादे में रहे दिहल गइल बाकी एगो बेंच के स्थापना लखनउओ में कइल गइल। इलाहाबाद आज भी बिबिध प्रशासनिक आ सरकारी बिभागन के मुख्यालय बा आ महत्व के शहर हवे।[35] उत्तर प्रदेश भारत के राजनीति में आपन केंद्रीय महत्व बाद में भी कायम रखले रहल आ भारत के आजादी के लड़ाई में ई इलाका बहुत गरमागरमी वाला रहल। एही दौर में उत्तर प्रदेश में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, आ दारुल-उलूम देवबंद जइसन आधुनिक शिक्षा के केंद्र सभ के स्थापना भइल। क्रांतिकारी लोग में राम प्रसाद बिस्मिल आ चंद्रशेखर आजाद नियर लोग आ मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, मदन मोहन मालवीय, गोबिंद बल्लभ पंत नियर लोग उत्तर प्रदेश के रहल जे भारत के आजादी के आंदोलन में राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहल आ एकर अगुआई कइल। कांग्रेस के लखनऊ सत्र में 11 अप्रैल 1936 के आल इंडिया किसान सभा के स्थापना भइल आ परसिद्ध राष्ट्रवादी स्वामी सहजानंद सरस्वती के पहिला अध्यक्ष बनावल गइल,[36] एकर मकसद ढेर दिना से चल आइल रहल खेतिहर लोग के असंतोख के दूर कइल आ जमींदारी ब्यवस्था के तहत बड़हन भूस्वामी लोग के द्वारा खेतिहर लोगग के जमीन अधिकार पर हमला के खिलाफ खेतिहर लोग के आगे कइल आ भारत में किसान आंदोलन के सुरुआत कइल भी एकर उद्देश्य रहल।[37] सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में, बलियाँ जिला में चित्तू पांडे के अगुआई में ब्रिटिश राज के कुछ दिन खातिर खतम क दिहल गइल रहे। बलियाँ के, एकरे आजादी के लड़ाई में उग्र योगदान खातिर "बागी बलियाँ" के नाँव से जानल जाला।[38]

आजादी के बाद[संपादन]

भारत के आजादी के बाद, यूनाइटेड प्रोविंस के नाँव बदल के "उत्तर प्रदेश" कइल गइल, एकर छोट नाँव यूपी के ओही तरे रखे खातिर,[39][40] एकरा संबंधी नोटिफिकेशन के संघ के गजट में 24 जनवरी 1950 के छापल गइल।[41] ई राज्य से अबले आठ गो भारतीय परधानमंत्री हो चुकल बा लोग आ संसद में लोकसभा में सभसे ढेर हिस्सेदारी एही राज्य के बा। एकरा बावजूद भी, राजीनीतिक रूप से एतना महत्व वाला ई राज्य अपराध आ भ्रष्टाचार के चलते आर्थिक आ सामाजिक रूप से पिछड़पन के सिकार बा। जातीय आ सामुदायिक हिंसा से कई बेर परभावित भइल बा।[42] 1992 में अजोध्या में बाबरी महजिद के ध्वस्त करे के घटना के बाद राज्य में आ भारत भर में हिंसा भइल।[43] साल 2000 एकर उत्तरी पहाड़ी भाग के बिलगा के अलग राज्य उत्तराखंड बनावल गइल।[44]

भूगोल[संपादन]

"photograph"
गंगा के मैदान के हिस्सा

उत्तर प्रदेश के कुल रकबा 2,43,290 बर्ग किलोमीटर बा, आ एह मायने में ई भारत के चउथा सभसे बड़हन राज्य बा। ई भारत के उत्तरी भाग में स्थित बा आ एकर अंतरराष्ट्रीय चौहद्दी नेपाल के साथ बा। एह राज्य के उत्तर में हिमालय परबत शुरू हो जाला,[45] बाकी प्रदेश के ज्यादातर इलाका मैदानी बा आ ई मैदान हिमालय के पहाड़ी इलाका के तुलना में एकदम्मे अलग चीज बाड़ें।[46] मैदानी इलाका के भी कई भाग में बाँटल जाला: ऊपरी गंगा मैदान, गंगा-जमुना दुआबा, घाघरा मैदान, आ तराई के मैदान।[47] प्रदेश के दक्खिनी इलाका में बिंध्य परबत के पठारी हिस्सा बा।[48] ई दक्खिनी हिस्सा में मुख्य रूप से कड़ेर चट्टानी इलाका, पहाड़ी आ पठार आ मैदानी घाटी पावल जालीं। मैदान के उत्तरी हिस्सा में भाबर आ तराई के इलाका पावल जाला, तराई में दलदली जमीन, जंगल आ लमहर हाथी घास पावल जाले।[49] भाबर के इलाका में नदी सभ के पानी काफी हद तक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बहे ला आ तराई के समानांतर ई पातर पट्टी के रूप में बा।[49] मुख्य मैदानी इलाका के तीन हिस्सा में बाँटल जाला: पूरबी उत्तर प्रदेश, जेह में 14 गो जिला सामिल बाने, अक्सर सूखा या बाढ़ के स्थिति पैदा हो जाले, बहुत घन आबादी होखे के कारण प्रति बेकती जमीन के रकबा कम बा आ बिपन्नता के इलाका मानल जाला; बिचला उत्तर प्रदेश आ पच्छिमी उत्तर प्रदेश के स्थिति कुछ बेहतर बा आ नहर इत्यादी के बिकास के कारण सिंचनी के सुबिधान बा।[49] उत्तर प्रदेश के कई इलाका सभ में जलजमाव (वाटरलॉगिंग) या फिर ऊसर जमीन के टुकड़ा भी पावल जालें।[49] एकरे अलावा, राज्य के बहुत सारा हिस्सा सूखा वाला इलाका भी बा। राज्य में कुल 32 गो गिनावे लायक छोट-बड़ नदी बाड़ी जिनहन में गंगा, यमुना, सरजू, बेतवा इत्यादि के हिंदू धरम में भी महत्व बाटे।[50]

उत्तर परदेश में गहन खेती होला।[51] मैदानी हिस्सा के निचला इलाका सभ में बहुत उपजाऊँ जमीन बा। कुछ पहाड़ी ढाल सभ पर भी गहन खेती होले हालाँकि ई सिंचनी के सुबिधा पर निर्भर होला।[52] शिवालिक के पहाड़ी ढाल, जे एह प्रदेश के सभसे उत्तरी हिस्सा में बाने, के बाद तुरंते नीचे दक्खिन के ओर "भाबर" के इलाका हवे जहाँ हिमालयी नदी सभ द्वारा ले आइल बोल्डर आ मोट बालू के बनल जमीन हवे।[53] तराई आ भाबर के एह पातर पट्टी में इतिहासी रूप से घन बन रहल हवें, अभिन ले भी कुछ इलाका में बन मिले लें।[54]

जलवायु[संपादन]

refer to adjacent text
लखनऊ शहर के ऊपर मानसून के बादर।

उत्तर प्रदेश में नम उपोष्णकटिबंधी जलवायु होले आ साल में चार गो सीजन होला।[55] दिसंबर से फरवरी के बीच जाड़ा, आ मार्च से मई ले गरमी के सीजन होला। एकरे बाद मानसून के सीजन आवे ला जून से सितंबर ले रहे ला।[56] गर्मी के सीजन बहुत ढेर अतिमान वाला होला जब अधिकतम तापमान 48 °C से ऊपर ले चहुँप जाला।[57] गंगा के मैदान में जलवायु उप-आर्द्र से ले के अर्द्ध-शुष्क के बीच पावल जाले।[56] राज्य के औसत सालाना बरखा 650 मिमी होले जबकि उत्तरी-पूरबी कोने के जिला सभ में ई 1000 मिमी होले,[58] क्रम से पच्छिम के ओर बरखा के मात्रा में कमी आवत जाले। इहाँ ज्यादातर बरखा मानसून के बंगाल के खाड़ी वाली शाखा से होला। जाड़ा के सीजन में भी कुछ बरखा होले जे पच्छिमी डिस्टर्बेंस के कारण होले आ चक्रवाती प्रकार के होले।[55][59]

उत्तर प्रदेश खातिर जलवायु आँकड़ा
महीना जन फर मार्च अप्रै मई जून जुला अग सित अक्टू नवं दिस सालभर
औसत अधिकतम °C (°F) 29.9
(85.8)
31.9
(89.4)
35.4
(95.7)
37.7
(99.9)
36.9
(98.4)
31.7
(89.1)
28.4
(83.1)
27.4
(81.3)
29.4
(84.9)
31.4
(88.5)
30.1
(86.2)
28.9
(84)
31.59
(88.86)
औसत कम °C (°F) 11.0
(51.8)
12.1
(53.8)
15.8
(60.4)
19.9
(67.8)
22.4
(72.3)
22.9
(73.2)
22.2
(72)
21.6
(70.9)
20.8
(69.4)
18.5
(65.3)
14.4
(57.9)
11.5
(52.7)
17.76
(63.96)
औसत वर्षण mm (inches) 0
(0)
3
(0.12)
2
(0.08)
11
(0.43)
40
(1.57)
138
(5.43)
163
(6.42)
129
(5.08)
155
(6.1)
68
(2.68)
28
(1.1)
4
(0.16)
741
(29.17)
औसत बरखा वाला दिन 0.1 0.3 0.3 1.1 3.3 10.9 17.0 16.2 10.9 5.0 2.4 0.3 67.8
औसत माहवार दिन लंबाई 291.4 282.8 300.7 303.0 316.2 186.0 120.9 111.6 177.0 248.44 270.0 288.3 2,896.34
Source: [60]
उत्तर प्रदेश के बिबिध शहर सभ के औसत ऊपरी आ निचला तापमान
शहर जन फर मार्च अप्रै मई जून जुल अग सित अक्टू नवं दिसं
लखनऊ[61] 73/44 79/49 90/58 101/69 105/76 102/81 92/79 90/78 92/76 91/66 79/53 75/45
कानपुर[62] 91/71 92/72 92/75 93/78 92/78 85/74 84/73 84/72 88/78 88/74 89/74 90/71
गाजियाबाद[63] 70/45 73/50 84/59 97/70 102/79 100/82 93/81 91/79 93/75 91/66 82/55 73/46
इलाहाबाद[64] 74/47 81/52 92/62 103/73 108/80 104/83 93/79 91/78 92/77 92/69 86/57 77/49
आगरा[65] 72/45 75/51 90/60 101/72 107/80 105/84 95/79 91/78 93/76 93/67 85/55 75/47
बनारस[66] 74/47 80/52 92/61 102/72 106/80 102/83 92/79 91/794 91/77 90/69 85/57 76/49
गोरखपुर[67] 74/49 80/53 91/72 103/77 99/79 92/78 91/78 91/76 91/70 85/59 76/51 76/49
बरेली[68] 71/47 77/57 88/60 99/70 105/77 102/81 93/79 91/78 92/76 90/67 83/56 74/48


बनस्पति आ जियाजंतु[संपादन]

उत्तर प्रदेश के राजकीय चीन्हा[69][70]
राजकीय पशु बारहसिंगा The barasingha.jpg
राजकीय पक्षी सारस Grus antigone Luc viatour.jpg
राजकीय वृक्ष अशोक Ashoka (Polyalthia longifolia) flowers W IMG 7050.jpg
राजकीय फूल पलाश STS 001 Butea monosperma.jpg
राजकीय नाच कत्थक Kathak 3511900193 986f6440f6 b retouched.jpg
राजकीय खेल हाकी Field hockey.jpg
तराई के इलाका
घड़ियाल (Gavialis gangeticus) गंगा नदी में पावल जाला

राज्य में प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त रूप से मौजूद बा।[71] साल 2011 में राज्य में कुल दर्ज कइल गइल बन क्षेत्र 16,583 km2 (6,403 sq mi) रहे जे राज्य के कुल भूगोली रकबा के 6.88% इलाका पर बिस्तार लिहले रहल।[72] तेजी से बनकटाई आ जानवरन के शिकार के बावजूद अभिन ले राज्य में बनस्पति आ जियाजंतु के मामिला में भरपूर बिबिधता देखे के मिले ला। कई प्रकार के फेड़न के प्रजाति, बिबिध छोट-बड़ मैमल, रेप्टाइल आ कीड़ा-मकोड़ा के प्रजाति ऊपरी समशीतोष्ण जंगली इलाका में पावल जालीं। कई प्रकार के पौधा जंगली रूप से पावल जालें जे जड़ी-बूटी के तौर पर इस्तेमाल होलें[73] आ एह तरह के दवा-बीरो वाला पौधा सभ के ब्यापारिक रूप से भी उपजावल जाला। तराई-दुआर इलाका में चारा के रूप में इस्तेमाल होखे वाली घास भी मिले ले आ कागज उद्योग में इस्तेमाल होखे वाली घास भी। नम-पतझड़ वाला फेड़ सभ गंगा के मैदान में नदी के किनारे वाला इलाका में पावल जालें। ई मैदान बिबिध प्रकार के कीरा-बिच्छी आ अन्य रेंगे वाला जंतु सभ के आवास भी हवे। गंगा आ अन्य नद्दी सभ में बिबिध प्रजाति के मछरी आ खेखड़ा, झींगा, डोंका इत्यादि भी मिले लें। बिंध्य इलाका आ पठारी भाग में बब्बुर आ औरी अइसने सूखा इलाका के फेड़ मिले लें। चिंकारा पुराना समय में बहुत पावल जाय आ नीलगाय अभिन भी बहुत संख्या में मिले लीं।[74][75]

पूरा मैदानी इलाका में उष्णकटिबंधीय पतझड़ वाली बनस्पति मिले ले आ जमीन ले भरपूर घाम के पहुँच के चलते घास आ झाड़ीदार पौधा भी खूब पावल जालें।[76] खेती बदे, प्राचीन समय में मैदानी इलाका के जंगल सभ के साफ़ कइल गइल आ अब कहीं-कहीं कुछ टुकड़ा बचल बाने जहाँ प्राकृतिक जंगल होखे। दक्खिनी हिस्सा में पठारी भाग में अइसन कुछ इलाका बचल बाने जहाँ कांटेदार पौधा आ सूखा इलाका वाली झाडी के इलाका पथरीला जमीन होखे के कारण साफ़ नइखे कइल गइल।[77] अइसन जंगल कम बरखा वाला क्षेत्र (50–70 सेमी), आ औसत तापमान 25-27 °C आ कम नमी वाला क्षेत्र में बाने।

उत्तर प्रदेश में चिरई सभ के बिबिध प्रजाति मिले लीं।[78] प्रमुख प्रजाति में घरेलू गौरइया, मैना, गंगा मैना, पंडुक, कबूतर, मोर, सुग्गा, कोयल, बुलबुल, चोंचा, मछरेंगा, कठफोड़वे, आ अउरी कई चिरई गिनावल जा सके लीं। राज्य में बखीरा, चंबल, चंद्रप्रभा, हस्तिनापुर, कैमूर आ सुरहा ताल नियर कई गो पक्षी-बिहार स्थापित कइल गइल बाने।[79][80][81][82][83][84][85]

रेप्टाइल, यानी रेंगे वाला जीव में बिस्तुइया, गिरगिट, गोह, कोबरा (गहुअन), करइत, धामिन, घड़ियाल इत्यादि पावल जाला। महसीर, टेंगना आ ट्राउट मछरी पावल जालीं। कई जियाजंतु सभ जे पहिले इहाँ पावल जायँ अब बिलुप्त भी हो चुकल बाने आ कई खतरा में भी बाने।[86] सरकार के कोसिस के बावजूद कई तरह के जानवरन के शिकार से भी खतरा बा।[87]

कला एवम् संस्कृति[संपादन]

साहित्य[संपादन]

संगीत[संपादन]

नृत्य[संपादन]

कत्थक उत्तर् प्रदेश् का एक् परिषक्रत् शास्त्रिय नृत्य है जो कि हिन्दुस्तानी शास्त्रिय संगीत के साथ किया जाता है। कत्थक नाम् 'कथा' शब्द् से बना है, इस् नृत्य में नर्तक् किसी कहानी या संवाद को नृत्य के माध्यम् से प्रस्तुत् करता है । कत्थक नृत्य का प्रारम्भ् 6-7वीं शताब्दी में उत्तर् भारत् में हुआ था। प्राचीन समय् में यह् एक् धार्मिक नृत्य हुआ करता था जिसमे नर्तक् महाकाव्य गाते थे और् अभिनय करते थे । 13 वी शताब्दी तक् आते आते कत्थक सौन्दर्यपरक हो गया तथा नृत्य में सूक्ष्म अभिनय् एवम् मुद्राओं पर् अधिक ध्यान् दिया जाने लगा । कत्थक में सूक्ष्म मुद्राओं के साथ् ठुमरी गायन् पर् तबले और् पखावज के साथ् ताल मिलाते हुए नृत्य किया जाता है । कत्थक नृत्य के प्रमुख् कलाकार पन्डित बिरजू महाराज हैं ।

लोक कलायें[संपादन]

  • ब्रज् रासलीला
  • राम् लीला

हस्त शिल्प[संपादन]

सहारनपुर का काष्ठ शिल्प, वाराणसी की साड़ियाँ तथा रेशम व ज़री का काम, लखनऊ का कपड़ों पर चिकन की कढ़ाई का काम, रामपुर का पैचवर्क, मुरादाबाद के पीतल के बरतन आदि

जनसंख्या[संपादन]

उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है । करीब 16 करोङ की जनसंख्या के साथ उत्तर प्रदेशविश्व का सर्वाधिक आबादी वाला उप राष्ट्रीय इकाई है । विश्व में केवल पांच राष्ट्र चीन, स्वयंभारत,संयुक्त अमरीका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है.

मंडल, जिला आ शहर[संपादन]

उत्तर प्रदेश 75 जिला सभ में बँटल बा जे 18 गो मंडल में आवे लें:[88]

नीचे उत्तर प्रदेश के सभसे ढेर जनसंख्या वाला छह गो जिला आ भारत के जिला सभ में इनहन के रैंक दिहल गइल बा:[89]

रैंक (भारत में) जिला जनसंख्या बढ़ती दर (%) लिंगानुपात (औरत, प्रति 1000 पुरुष पर) साक्षरता (%)
13 इलाहाबाद 5,954,391 20.63 901 72.32
26 मुरादाबाद 4,772,006 25.22 906 56.77
27 गाजियाबाद 4,681,645 42.27 881 78.07
30 आजमगढ़ 4,613,913 17.11 1019 70.93
31 लखनऊ 4,589,838 25.82 917 77.29
32 कानपुर नगर 4,581,268 9.92 862 79.65
उत्तर प्रदेश के दसलाखी शहर (2011 के जनगणना)
नाँव जनसंख्या नाँव जनसंख्या
कानपुर 2,920,067 लखनऊ 2,901,474
गाजियाबाद 2,358,525 आगरा 1,746,467
बनारस 1,435,113 मेरठ 1,424,908
इलाहाबाद 1,216,719 बरेली 979,933

इहो देखल जाय[संपादन]

संदर्भ[संपादन]

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