कृष्ण

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कृष्ण
दया, करुणा आ परेम के देव[1][2]
कृष्ण
सिंगापुर के मंदिर में कृष्ण के मुरती
संबंधित बाड़े स्वयं भगवान्, परमात्मा, ब्रह्म[3][4]
धाम गोलोक, गोकुल, द्वारक
हथियार सुदर्शन चक्र
कौमोदकी
ग्रंथ भागवत पुराण, हरिवंश पुराण, बिष्णु पुराण, महाभारत (गीता)
तिहुआर जन्माष्टिमी, होली
Personal information
जनम मथुरा, सूरसेन राज्य (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत)[5]
Consort राधा, अष्टभार्या, 16,000-16,100 रानी लोग[6][note 1]
माई-बाबूजी देवकी आ बासुदेव, जशोदा आ नंद बाबा (पालक महतारी बाप)
सहोदर बलराम, सुभद्रा

कृष्ण हिंदू धर्म के एगो प्रमुख देवता हवें। इनका के बिष्णु के अवतार के रूप में भी पूजल जाला आ अपना में खुदे इनहीं के सबसे बड़हन ईश्वर के रूप में भी पूजल जाला।[8] कृष्ण के हिंदू धर्म में करुणा, दया आ प्रेम के देवता के रूप में पूजल जाला,[1][9] आ ई भारतीय देवी-देवता सभ में एगो प्रमुख देवता हवें।[10] कृष्ण के जनमदिन के लगभग पूरा भारत में कृष्ण जन्माष्टिमी के रूप में मनावल जाला आ ई हिंदू कैलेंडर के हिसाब से भादो महीना के अन्हार में अष्टिमी तिथी के पड़े ला आ अंगरेजी कलेंडर के हिसाब से ई तिहुआर अगस्त भा सितंबर में पड़े ला।[11]

कृष्ण के अउरी कई नाँव से जानल जाला, जइसे की गोविंद, मुकुंद, मधुसूदन, वासुदेव, आ माखनचोर। कृष्ण के जिनगी के कथा आ खीसा सब के "कृष्ण लीला" कहल जाला। कृष्ण कई गो पुराणिक कथा सभ, जइसे कि महाभारत, भागवत पुराणभगवत गीता में प्रमुख चरित्र बाड़ें आ इनके जिकिर कई किसिम के दार्शनिक, धार्मिक आ कथा ग्रंथ सभ में आइल बा।[12] एह कथा आ ग्रंथ सभ में कृष्ण के कई बिबिध रूप में प्रस्तुत कइल गइल बा: उदाहरण खाती, ईश्वर के अवतार, लीलापुरुष, आदर्श प्रेमी, पबित्र हीरो, आ साक्षात ईश्वर इत्यादि।[13] इनके बिबिध रूपलेखन (आइकनोग्राफी) में इनके जिनगी के बिबिध रंग प्रगट होला आ जीवन के अलग-अलग हिस्सा, बचपन में माखन चोरा के खाए वाला चंचल बालक, मुरली बजावे वाला लइका, युवा रूप में राधा आ गोपी लोग के साथे रास रचावे वाला प्रेमी, युद्ध में निपुण योद्धा आ अर्जुन के सारथी, योगी आ उपदेशक इत्यादि रूप प्रमुख बाड़ें।[14]

नाँव[संपादन]

कृष्ण शब्द संस्कृत के हवे आ एकर मतलब "करिया", "काला", या "गहिरा नीला" होला।[15] कथा के अनुसार बतावल जाला कि जमुना के कालिय दह में कालिया नाग के बध करत समय ओकरे बिस से इनके रंग करिया भा नीला हो गइल रहे।[16] कुछ अन्य कथा सभ में दूसर बिबरन भी मिले ला आ कबो-कबो एह शब्द के अरथ "सभके अपना ओर खींचे वाला"[17] (कृष धातु के अर्थ खींचल, जवना से आकर्षण बने ला) भी बतावल जाला। कृष्ण के बिष्णु के अवतार मानल जाला आ बिष्णु के एक हजार नाँव (बिष्णुसहस्रनाम) में कृष्ण शब्द बिष्णु के 57वाँ नाँव के रूप में गिनावल गइल हवे।

अन्य नाँव सभ में "मोहन" यानी सभके मोह लेवे वाला[18], "मुरलीधर" मने कि मुरली (बँसुरी) धारण करे वाला, "गोविंद" भा "गोपाल" मने कि मुख्य गौ पालक[19][20] इत्यादि नाँव प्रमुख हवें। उड़ीसा में आ कुछ अन्य पूरबी भारत के जगह सभ में इनके "जगन्नाथ" के रूप में पूजल जाला[21][22][23] आ बिस्व के स्वामी के अरथ में एह नाँव के इस्तेमाल होला। कई अन्य नाँव अइसन दइत आ राक्षस सभ के नाँव पर भी पड़ल हवें जिनहन के इनके द्वारा बध भइल बतावल जाला, जइसे: मुरारि, मधुसूदन इत्यादि। वसुदेव आ जशोदा आ देवकी के बेटा के रूप में इनके वासुदेव, जशोदानंदन आ देवकीनंदन भी कहल जाला। सुदर्शन चक्र धारण करे वाला रूप में इनके चक्रधारी भी कहल जाला।

जिनगी आ जुड़ल कथा[संपादन]

पैदा होखे के बाद कृष्ण के, जमुना पार क के नंद के घरे ले जात वसुदेव।

आगे कृष्ण के जिनगी आ जुड़ल कथा सभ के बिबरन दिहल गइल बा, ई सभ महाभारत, हरिबंस, भागवतबिष्णु पुराण नियर साहित्य आ कथा में मौजूद बिबरन पर आधारित बा। कृष्ण के जीवन के घटना सभ भारत में भइल बतावल जालीं आ एह कथा सभ में बर्णित जगह क्षेत्र सभ के इलाका आज के समय के उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, दिल्लीगुजरात में पड़े ला। कृष्ण के जिनगी के बिबरन के कृष्णचरित कहल जाला।[24]

जनम[संपादन]

कृष्ण चरित सभ में, कृष्ण के देवकी आ उनके पति वसुदेव के लइका के रूप में जनमल बतावल जाला जेलोग चंद्रबंसी कुल के रहल।[25] देवकी के भाई कंस नाँव के अत्याचारी राजा रहलें। देवकी के बियाह के समय, पुराण सभ में बर्णित कथा अनुसार, आकासबाणी भइल या कुछ भाबिस्य बतावे वाला लोग अइसन बतावल कि देवकी के एगो लइका कंस के बध करिहें। कंस एही कारण देवकी के हर संतान के मुआ डारे के ब्यवस्था कइलें आ वसुदेव आ देवकी के जेलखाना में डाल दिहलें। कृष्ण के पैदा होखे प, वासुदेव चुपचाप चोरी से नया पैदा भइल लइका के जमुना पार ले जा के नंद-जशोदा के संतान से बदल देलें। जब कंस नया पैदा भइल शिशु के मुआवे खाती आवे लें ऊ लइकी जे शक्ति के अवतार होखे लीं, आकास में उड़ जालीं आ कंस के चेतावनी देलीं कि तोहार संहार करे वाला तोहरे राज में पैदा भ चुकल बा। पुराणन के अनुसार, कृष्ण नंद बाबा आ उनके मेहरारू जशोदा के घरे पालल पोसल जालें, ई जगह आधुनिक जमाना के मथुरा के लगे बतावल जाला।[26][27][28] एह कथा सभ के अनुसार कृष्ण के दू गो अउरी भाई-बहिन कंस की हाथे मुआवल जाए से बच जालें - बलिराम आ सुभद्रा।[29] कृष्ण के जनम के तिथि आजुओ ले कृष्ण जन्माष्टिमी के रूप में मनावल जाले।

बचपन आ युवा अवस्था[संपादन]

बँसुरी बजावत कृष्ण (15वीं सदी के कला)।

The legends of Krishna's childhood and youth describe him as a cow herder, a mischievous boy whose pranks earns him the nickname a Makhan Chor (butter thief), and a protector who steals the hearts of the people in both Gokul and Vrindavana. The texts state, for example, that Krishna lifts the Govardhana hill to protect the inhabitants of Vrindavana from devastating rains and floods.[30]

Other legends describe him as an enchanter and playful lover of the gopis (milkmaids) of Vrindavana, especially Radha. These metaphor-filled love stories are known as the Rasa lila and were romanticised in the poetry of Jayadeva, author of the Gita Govinda. They are also central to the development of the Krishna bhakti traditions worshiping Radha Krishna.[31]

Krishna's childhood illustrates the Hindu concept of lila, playing for fun and enjoyment and not for sport or gain. His interaction with the gopis at the rasa dance or Rasa-lila is an example. Krishna plays his flute and the gopis come immediately, from whatever they were doing, to the banks of the Yamuna River, and join him in singing and dancing. Even those who could not physically be there join him through meditation. He is the spiritual essence and the love-eternal in existence, the gopis metaphorically represent the prakṛti matter and the impermanent body.[32]

This lila is a constant theme in the legends of Krishna's childhood and youth. Even when he is battling with a serpent to protect others, he is described in Hindu texts as if he were playing a game.[33] This quality of playfulness in Krishna is celebrated during festivals as Rasa-lila and Janmashtami, where Hindus in some regions such as Maharashtra playfully mimic his legends, such as by making human gymnastic pyramids to break open handis (clay pots) hung high in the air to "steal" butter or buttermilk, spilling it all over the group.[34]

नोट[संपादन]

  1. The regional texts vary in the identity of Krishna's wife (consort), some presenting it as Rukmini, some as Radha, some as Svaminiji, some adding all gopis, and some identifying all to be different aspects or manifestation of one Devi Lakshmi.[6][7]

संदर्भ[संपादन]

  1. 1.0 1.1 Ben-Ami Scharfstein (1993); Ineffability: The Failure of Words in Philosophy and Religion; State University of New York Press; p. 166; ISBN 978-0-7914-1347-0. 
  2. Edwin Bryant & Maria Ekstrand 2004, pp. 21-24.
  3. Bryant 2007, p. 114.
  4. उद्धरण खराबी:Invalid <ref> tag; no text was provided for refs named KK
  5. Raychaudhuri 1972, p. 124
  6. 6.0 6.1 John Stratton Hawley, Donna Marie Wulff (1982); The Divine Consort: Rādhā and the Goddesses of India; Motilal Banarsidass Publisher; p. 12; ISBN 9780895811028. 
  7. Bryant 2007, p. 443.
  8. "Krishna"; Encyclopædia Britannica Online. 
  9. Edwin Bryant & Maria Ekstrand 2004, pp. 20–25, Quote: "Three Dimensions of Krishna's Divinity (...) divine majesty and supremacy; (...) divine tenderness and intimacy; (...) compassion and protection.; (..., p.24) Krishna as the God of Love".
  10. Freda Matchett (2001); Krishna, Lord Or Avatara?; Psychology Press; p. 199; ISBN 9780700712816. 
  11. James G. Lochtefeld (2002); The Illustrated Encyclopedia of Hinduism: A-M; The Rosen Publishing Group; pp. 314–315; ISBN 978-0823931798. 
  12. Richard Thompson, Ph.D. (December 1994); "Reflections on the Relation Between Religion and Modern Rationalism"; ओरिजिनल से 4 January 2011 के पुरालेखित; पहुँचतिथी 2008-04-12.  Unknown parameter |df= ignored (help)
  13. Mahony, W. K. (1987); "Perspectives on Krsna's Various Personalities"; History of Religions (American Oriental Society) 26 (3): 333–335; JSTOR 1062381; doi:10.1086/463085. , Quote: "Krsna's various appearances as a divine hero, alluring god child, cosmic prankster, perfect lover, and universal supreme being (...)".
  14. Knott 2000, pp. 15, 36, 56
  15. https://www.jagran.com/spiritual/religion-so-kanha-is-therefore-the-body-color-blue-13313407.html
  16. Bryant 2007, p. 382
  17. Monier Monier Williams, Go-vinda, Sanskrit English Dictionary and Ettymology, Oxford University Press, p. 336, 3rd column
  18. Bryant 2007, p. 17
  19. Hiltebeitel, Alf (2001); Rethinking the Mahābhārata: a reader's guide to the education of the dharma king; Chicago: University of Chicago Press; pp. 251–53, 256, 259; ISBN 0-226-34054-6. 
  20. B. M. Misra; Orissa: Shri Krishna Jagannatha: the Mushali parva from Sarala's Mahabharata; Oxford University Press, USA; ISBN 0-19-514891-6. 
  21. Bryant 2007, p. 139.
  22. For the historic Jagannath temple in Ranchi, Jharkhand see: Francis Bradley Bradley-Birt (1989); Chota Nagpur, a Little-known Province of the Empire; Asian Educational Services (Orig: 1903); pp. 61–64; ISBN 978-81-206-1287-7. 
  23. Matchett 2001, p. 145.
  24. The Poems of Sūradāsa; Abhinav publications; 1999. 
  25. "Yashoda and Krishna"; Metmuseum.org; 2011-10-10; ओरिजिनल से 13 October 2008 के पुरालेखित; पहुँचतिथी 2011-10-23. 
  26. Sanghi, Ashwin (2012); The Krishna key (अंग्रेज़ी मे); Chennai: Westland; p. Key7; ISBN 9789381626689; पहुँचतिथी 9 June 2016. 
  27. Lok Nath Soni (2000); The Cattle and the Stick: An Ethnographic Profile of the Raut of Chhattisgarh; Anthropological Survey of India, Government of India, Ministry of Tourism and Culture, Department of Culture, Delhi: Anthropological Survey of India, Government of India, Ministry of Tourism and Culture, Department of Culture, 2000 Original from the University of Michigan; p. 16; ISBN 978-8185579573. 
  28. Bryant 2007, pp. 124–130,224
  29. Lynne Gibson (1999); Merriam-Webster's Encyclopedia of World Religions; Merriam-Webster; p. 503. 
  30. Schweig, G. M. (2005); Dance of divine love: The Rasa Lila of Krishna from the Bhagavata Purana, India's classic sacred love story.; Princeton University Press, Princeton, NJ; Oxford; ISBN 0-691-11446-3. 
  31. Largen, Kristin Johnston. God at Play: Seeing God Through the Lens of the Young Krishna. Wiley-Blackwell. 1 September 2011. p. 256.
  32. Largen, Kristin Johnston. God at Play: Seeing God Through the Lens of the Young Krishna. Wiley-Blackwell. 1 September 2011. p. 255.
  33. Largen, Kristin Johnston. God at Play: Seeing God Through the Lens of the Young Krishna. Wiley-Blackwell. 1 September 2011. p. 253–261.

स्रोत ग्रंथ[संपादन]