अशोक

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अशोक
चक्रवर्ती [1][2]
Indian relief from Amaravati, Guntur. Preserved in Guimet Museum.jpg
अमरावती, आंध्रप्रदेश (भारत) में लगभग 1ली सदी ई॰पू॰/ईसवी के एगो चित्र, बीच में शाईट अशोक के देखावल गइल बाटे।
तीसरका मौर्य सम्राट
Reign 268 ई॰पू॰ — ल॰ 232 ई॰पू॰[3]
Coronation 268 ई॰पू॰[3]
Predecessor बिंदुसार
Successor दशरथ
Born 304 ई॰पू॰
पाटलिपुत्र, पटना
Died 232 ई॰पू॰ (उमिर 72)
पाटलिपुत्र, पटना
साथी असंधिमित्र
पत्नी
Issue
Dynasty मौर्य
Father बिंदुसार
Mother सुभद्रांगी
मौर्य शासक (322 ई॰पू॰ – 180 ई॰पू॰)
चंद्रगुप्त (322—297 ई॰पू॰)
बिंदुसार (297—272/268 ई॰पू॰)
अशोक (272/268-232 ई॰पू॰)
दशरथ (232—224 ई॰पू॰)
सम्प्राति (224—215 ई॰पू॰)
शालिशुक (215—202 ई॰पू॰)
देववर्मन (202—195 ई॰पू॰)
शतधन्वा (195—187 ई॰पू॰)
बृहद्रथ मौर्य (187—180 ई॰पू॰)
पुष्यमित्र
(शुंग साम्राज्य)
(180—149 ई॰पू॰)

अशोक (304—232 ईपू),[4] चाहे असोक महान मौर्य वंश के एगो भारतीय सम्राट रहलें जे ल॰ 268 से 232 ई॰पू॰ ले लगभग मय भारत पऽ राज कइलें।[5] भारत के महान सम्राट लोग में से एक, अशोक के राज उत्तर-पच्छिम में हिंदुकुश से ले के पूरुब में वर्तमान बांग्लादेश ले, आ दक्खिन के ओर आजकाल के तमिलनाडु आ केरल के कुछ हिस्सा छोड़ के बाकी मय भारत के छेंकले रहे। एह राज के राजधानी मगध में पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) रहल आ उज्जैन आ तक्षशिला में क्षेत्रीय राजधानी रहलीं सऽ।

सम्राट अशोक के समय में मौर्य साम्राज्य

अशोक के जीवन के सभसे बड़ घटना कलिंग के लड़ाई रहल जेकरे बाद ऊ लड़ाई आ हत्या से बैराग ले के बौद्ध धरम अपना लिहलें आ शांति के परचार में लाग गइलें। अशोक के समय में तीसरका बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में भइल आ ऊ भारत से बाहर के देस सभ में बुद्ध के उपदेश फइलावे खातिर धर्मप्रचारक भेजलें।

अशोक कय जगह प खम्भा गड़ववलें जिनहन प नैतिक उपदेश खोदवावल रहल। इन्हन के आज अशोक स्तंभ कहल जाला। भारत के राष्ट्रीय चीन्हा सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिहल गइल बाटे।

नाँव[संपादन करीं]

आदेशलेख सभ में अशोक नाँव दू बेर आइल बा, पहिला मास्की के लेख में जेने सुरूआते देवनांपियस अशोकस से भइल बा, आ दुसरा बेर गुर्जरा के अभिलेख में अशोक नाँव आइल बा। अबले के अनुमान से इहे साबित भइल बा की बाकी आदेशलेखन में जेकरा के पियदसिदेवानांपिय कहल गइल बा ऊ उहे राजा हवें जिनके बौद्ध ग्रंथन में अशोक बतावल गइल बा आ पुराणन में अशोकवर्द्धन कहल गइल बा।[6] हालाँकि, नीलकंठ शास्त्री के कहनाम बा कि पियदसि इनकर असली नाँव रहल आ अशोक विरुद, या फिर अशोक असली नाँव रहल आ पियदसि विरुद रहल, ई बात तयजिवन जिइल कठिन बा[6]

जीवन[संपादन करीं]

अशोक के शुरुआती जीवन

चक्रवर्ती अशोक सम्राट बिंदुसार आउर रानी धम्मा के बेटा रहन।[7] लंका के परम्परा में बिंदुसार के सोरह पटरानियन आउर 101 बेटन के उल्लेख बा। बेटन में खाली तीन गो के नाँव लिखल बा, सूसिम जवन सभसे बड़ रहन, अशोक आऊर तिष्य। तिष्य अशोक के सहोदरदभाई आऊर सभसे छोट रहन ।एक दिन ध्म्मा के सपना आइल जे उनकर बेटा बहूत बड़ सम्राट बनी। ओकरा बादे से राजा बिन्दुसार ओकरा आपन रानी बना लिहलन बाकिर धर्मा क्षत्रिय कुल के ना रहे, तऽ ओकरा कवनो बिशेस स्थान ना मिलल रहे। अशोक के कय गो (सौतेला) भाई — बहिन रहऽसन आउर ओकनी मे कड़ा प्रतिस्पर्धा रहत रहे । अशोक के घड़ी के ऊकेरल गइल प्रतीतात्मक चिह्न जेकरा हमनी के 'अशोक चिह्न' के नाँव से जानेनी जा आज उ भारत के राष्ट्रीय चिह्न हऽ। बौद्ध धर्म के इतिहास में गौतम बुद्ध के बाद अशोके के नाँव आवेला।

दिव्यदान में अशोक के एगो मेहरारु के नाँव 'तिष्यरक्षिता' मिलेला। ओकर लेखा में खाली ओकर मेहरारु 'करूणावकि' बिया। दिव्यादान में अशोक के दु भाइयन सुसीम आ विगताशोक के नाम लिखल बड़ुवे।

अशोक मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के पोता रहन। रोमन इतिहासकार अपियन के मोताबिक, चन्द्रगुप्त सैल्युकस के बेटी से बियाह कइले रहे; एही चलते इहो ह़ो सकेला कि अशोक के आजी युनानी होइहेँ।[8][9] भारतीय ग्रंथ भविष्य पुराण में भी एह बात के लिखल गइल बा कि चंद्रगुप्त के बियाह सैल्युकस के बेटी से भइल रहे।[10]

पुरान बुद्ध, जैन आ हिन्दु लेखन‌ से अशोक के बारे में अलग-अलग बात पता चलेला। अवदान साहित्य मे लिखल बा कि अशोक रानी सुभद्रंगी के बेटा रहन। अशोकवदन में लिखल बा कि अशोक के माई चम्पा नगर के एगो ब्राह्मण के बेटी रही।[11][12] अशोक के नाँव उनके धइल रहे। दिव्यदानो मे अइसने कहानी लिखल बा लेकिन माई के नाँव जनकपदकल्यानी लिखल बा।

सत्ता के बिस्तार

272इशा पूर्व में राजा बिन्दुसार के मरला के बाद राजगद्दी खातिर लड़ाई चालू हो गइल।दिव्यदान में लिखल बा कि, बिन्दुसार आपन बड़ बेटा सूसिम के आपन उत्तराधिकारी बनावल चाहत रहन, बाकिर अशोक के आपन पिता के मंत्री लोगन के सहजोग मिलल रहे। मंत्री लोग सूसिम के अहंकारी मानत रहन, आउर ई लोग के लागत रहे की सूसिम उ लोग के इज्जत ना करी।[13] पता लागेला कि एगो रधागुप्त नांव के मंत्री अशोक के राजगद्दी ले पहुचावे में महत्वपूर्ण भूमिका निभवले रहे। अशोकवदन मे एह बात के लीखल गइल बा कि राजा बनला के बाद अशोक रधागुप्त के प्रधानमंत्री बनवले रहन। दिपवंशमहावंश मे लिखल बा कि अशोक आपन 99 भाईयन के मार के राजा बनल रहन, बाकिर एह बात के सबूत ना मिले।

राजा बनला के बाद अशोक आपन राज्य के बहुत तेजी से बिस्तार कीइलें। हुनकर राज उत्तर-पच्छिम में हिंदुकुश से ले के पूरुब में वर्तमान बांग्लादेश ले, आ दक्खिन के ओरे आजकाल के तमिलनाडु आ केरल के कुछ हिस्सा छोड़ के बाकी मय भारत प बिस्तार वाला रहल, उनकर राज बलुचिस्तान आ अफगानिस्तानो पे रहल।

बियाह

अशोक आपन रानी लोग साथे

अलग-अलग स्त्रोतन से पता लागेला कि अशोक के पाँच गो बियाह भइल रहे। उ लोग के नाँव देवी, करुवाकी, तिष्यारक्षा पद्मावती आउर असन्धिमित्रा रहे। अइसहीँ ईहो पता लागेला कि अशोक चार बेटा आ दुगो बेटी के बाप रहन। बेटन के नाम महेन्द्र(देवी के बेटा), तिवारा (करुवाकी के बेटा), कुनाल (पद्मावती के बेटा), आउर जकुला रहे। बेटी लोग के नाम संघमित्रा(देवी के बेटी) आ चारूमती रहे।[14]

कलिंगा पऽ बिजय आ बुद्ध धर्म में परिवर्तन

भले अशोक के जीवन के जीवन खून खराबा से भरल रहे बाकिर कलिंगा पऽ बिजय हासिल कइला के बाद उ बुद्ध धर्म के अपना लिहलें।कलिंग राज्य ओह समय में एगो गणतांत्रिक राज्य रहे जवन की ओह घड़ी के भारत में एगो अपवाद नियन रहे, काहे की ओह घड़ी राजतंत्र रहे। अशोक के गद्दी पऽ बइठला के आठ साल बाद कलिंग युद्ध भइल। शिलालेखन से पता लागेला की युद्ध बड़ी भयानक रहे जेमे लगभग एक लाख सैनिक मारल गइलें।

कहल जाला की कलिंग पऽ बिजय हासिल कइला के बाद , एक दिन अशोक नगर घूमे गइलें जेने उनका खाली तबाही लउकल। युद्ध से भइल ओह तबाही उनका के बदल दिहलस, आ ओकर बाद उ बुद्ध धर्म के अपना लिहलन।

देहांत आउर बिरासत

अशोक 36 साल लें राज कइलन, हुनकर 232 ई•पु में देहांत हो गइल। कहल जाला की हुनकर अंतिम संस्कार बजी उनकर लाश सात दिन आउर सात रातन ले जलत रहल।उनका मरला के बाद मौर्य साम्राज्य 50 साल में ही खतम हो गइल।

185 ई•पु मे अंतिम मौर्य सम्राट बृहदरथ के हत्या हुनकर सेनापति द्वारा कर दिहल गइल। जेकरा बाद पुष्पमित्र सूंघ राजा बनलें आ सुंघ वंश के स्थापना कीइलें।

अशोक के बारे जादे तर बात शीलालेखन से पता लागेला जवन की प्राकृत भाषा में लिखल बा।

एतेहासिक स्त्रोत[संपादन करीं]

अंग्रेजन के समय के इतिहासकार लगभग अशोक के भुला गइल रहन, बाकिर जेम्स प्रिंसपी ऐतिहासिक स्त्रोतन के फेनू से जोहे के काम कइलन। जॉन ह्यूबर्ट मार्शल एगो आउर महत्वपूर्ण इतिहासकार रहन।

अशोक के एगो शिलालेख

अशोक के जीवन आ शासन के जानकारी जादे तर बुद्ध स्त्रोतन से मिलेला। अशोकवदन से अशोक के बारे में ढेर जानकारी मिल जाला,आउर जानकारी दीपवंश,महावंश आ अशोक के शिलालेख सभ से मीलेला। अशोक के घड़ी के चीज कुम्हार,पटना मे मिलेला।

अशोक के अध्यादेश:- अशोक के अध्यादेश 33 गो शिलालेखन के समूह बा। ई शिलालेख सभ भारतपाकिस्तान में फैलल बा। ई शिलालेख सभ भारत के इतिहास के एगो सभसे बरियार राजा द्वारा बुद्ध धरम के परचार के कहानी बतवेला।

महावंश:- ई श्रीलंका के राजा लोग के लिखल एगो कविता हऽ जेकरा पाली भाषा में लिखल गइल बा।


धारना सभ आउर इतिहास लेखन[संपादन करीं]

अशोक के जीवन के जानकारी फेनु से प्राप्त करे में सभ से जादे बुद्ध स्त्रोत के इस्तेमाल कईल गइल बा। पारंपरिक लेखन के आधार पऽ शुरुआती विद्वान अशोक के एगो बौद्ध सम्राट मनले बाड़न, जेकरा धर्म बदले के पड़ल रहे,आ जे बुद्ध धर्म के परचार कईले रहे। रोमिला थापर अशोक के बारे में लिखले बाड़ी की " हमनी के अशोक के दू तरह से देखे के चाहीं, पाहिला एगो राजनेता जवन एक समय में आपन साम्राज्य स्थापित कइलन, आ दूसरा एगो अइसन आदमी जे समाज के बदले खातिर आपन आचार विचार के समाज में फैलीईलें। अशोक अपना घड़ी के हर धर्म के इज्जत करत रहन।

हालाकि शिलालेख से ई बात साफ पता लागेला की अशोक बुद्ध धर्म के मानत रहन। एगो शिलालेख में अशोक जानवर सभ के बली देवे वाला वैदिक अनुष्ठान के प्रतिबंधित कईले बाड़न, एकरा से ई बात साबित होखेला की ऊ वैदिक परंपरा के ना मानत रहन। ऊ बुद्ध धर्म के पवित्र जगहन पऽ आपन स्तंभ खड़ा करवईलें बाकिर बाकी सभ धर्म के पवित्र जगह पऽ स्तंभ ना बनववलन। अशोक कर्तव्यन के देखावे ला "धम्म" शब्द के इस्तेमाल कइलन,जवन एगो बौद्ध शब्द हऽ। साथे सारे ऊ बुद्ध धर्म के तीन गो उपदेशनो के परचार कइलन।

अशोक के सभ शिलालेखन में अशोक के एगो निमन आ दयालु राजा देखावल गइल बा। कलिंग के शिलालेखन में अशोक अपना के आपन प्रजा के पिता कहले बाड़न आउर आपन प्रजा के आपन संतान बोलले बाड़ें।[15] शिलालेखन में अशोक बुद्ध धरम के शिक्षण के लिखववले बाड़न आ अहींसा के अपनावे के कहले बाड़न, साथे साथे ऊ आपन राज के बारे मे बतवले बाड़ें । सारनाथ के अशोक स्तंभ अशोक के समय के सभ से प्रसिद्ध चीज हऽ। बलुआ पत्थर के बनल स्तंभ अशोक के सारनाथ यात्रा के बारे में बतावेला। स्तंभ के ऊपर चारो दिशा में चार गो शेर के मुह बनल बा जे अशोक के बड़हन आ बरियार राज्य के दर्शावेला। शिलालेखन से मिलल जादे तर जानकारी के इतिहासकार सही मानेलन, लेकिन ई बतावल मुश्किल बा की कुछ चीज साँचो भइल रहे की ना।

अशोक के शिलालेख सभ के खोज से पहिले अशोक के बारे में ढ़ेर कहानी प्रचलित रहे जवन की ऐतिहासिक स्त्रोत पऽ आधारित ना रहे। ओह में से कुछ कहानी अशोकवदन में से बा:-

1) ओह में से एगो कहानी जय नाम के एगो लईका के हऽ, एक दिन जब जय सड़क के किनारे खेलत रहे, जहा बुद्ध आ गइलन।छोटहन जय बुद्ध केभीख के कटोरा में एक मुट्ठी माटी रख के आगे चल के बहुत बड़ राजा आ बुद्ध धर्म के अनुयाई बन के वरदान मंगलस।आगे लिखल बा की बुद्ध पूरा ब्रह्माण्ड के अंजोर कऽ दिहलन आ फिर ऊ अंजोरा के आपन बाया हाथ में लेके बोललन की ई लाईका आपन अगीला जनम में बहुत बड़ राजा बनी। बुद्ध ईहो भविष्यवाणी कईलें की हेकर राजधानी पाटलिपुत्र होई।

2)अगिला कहनी में अशोक के एगो खराब आदमी देखावल गइल बा, जे बुद्ध धरम अपनवला के बाद निक आदीमी बनऽता। लिखल बा कि अशोक के शारीरिक कुरूपता के चलते बिन्दुसार ओकरा के पसंद ना करत रहन। अशोक राजा बनल चाहत रहन एही चलते उ वारिस के जरत कोयला से भरल गड्ढा में डाल दिहलन। उ आपन खराब स्वभाव आउर खिस के चलते "भयंकर अशोक" नाम से प्रसिद्ध भइलन। कहल जाला की उ आपन सैनीकन के वफादारी के परिक्षा खातीर ले गइल रहन, आ सफल ना होला पऽ 500 आदमी के मार दिहलन कहल जाला कि जब कुछ औरत लोग उनकर अपमान कईलस तऽ उ आपन हरम के जरा के मार दिहलन। मानल जाला कि उ लोगन के उदास देखिके आनंद उठावत रहन आउर एकरा खातिर उ एगो बड़हन आउर भयावह उत्पीड़न कक्ष बनईलन जेने उ आउर लोग के यातना देवत रहन। कहानी आगे ई बतावे ले ह कि कईसे एगो पवित्र बौद्ध भिक्षु से मिलला के बाद अशोक धार्मिक बन जा ताड़न।

3) एगो आउर कहानी मे कहल गइल बा की आपन खजाना के बौद्ध संघ उपहार देवल चालु कर देलन। मंत्री सभ के डर लागत रहे की एकरा से साम्राज्य के पतन हो जाई, ईहे चलते अशोक के मना करल गइल।फिर अशोक आपन निजी धन के उपहार मे देवे लगलन। अंत मे कुछ ना बाचल आ हुनकर शांति से निधन भइल।

एह बिंदु पऽ इ ध्यान रखल ज़रूरी बा कि अशोकवदन एगो बौद्ध पाठ हऽ, जे बौद्ध धर्म मे नाया लोग जोड़े ला लिखल रहे आउर एही चलते इ सभ किंवदंतियन के इस्तेमाल कईल गइल रहे। एह तरह के ग्रंथन मे कहल गइल बा कि अशोक मूलतः आदर्श बौद्ध शासक रहन, जे प्रशंसा आउर अनुकरण दुनो के हकदार रहन।

अशोक आउर बुद्ध के अवशेष

बौद्ध कथा , विशेष रूप से महापरिनिर्वाण, के अनुसार बुद्ध के अवशेष हुनकर मरला के बाद आठ देशों में साझा कईल गइल। अशोक अवशेष वापस लेवे के काम कईलन आउर 84000 स्तूपन में बांट देलन। ई कहानी सांची आउर भरहुत में स्पष्ट रूप से देखाईल गइल बा।

योगदान[संपादन करीं]

सांची के स्तूप

एगो बौद्ध राजा होला के नाते,अशोक मानत रहन की बुद्ध धरम आदमी,जानवर, पौधा सभ जीव जंतु खातिर निक बा, एही चलते उ ढेरे स्तूप आ बौद्ध भिख्छु के रहे खातिर घर बनववलें। अशोकवदन में लिखल बा कि अशोक बुद्ध के अवशेष के रखे खातिर 84000 स्तूप बनाए के आदेश देले रहन। अशोक आपन बेटा महेंद्र आउर बेटी संघमित्रा के बौद्ध धर्म के परचार खातिर श्रीलंका भेजले रहन।

व्यवस्थापक के रूप में

मौर्य काल के एगो पत्थर

अशोक के सेना बरियार रहे, बाकिर बौद्ध धर्म के अपनवला के बाद, ऊ दक्षिण में तीन गो प्रमुख तमिल राज्य चेरस, चोल आ पंड्या के जोरे संघतिया नियन संबंध बनईलन। हुनकर शिलालेखन में कहल गइल बा कि ऊ आपने राज्य आ पड़ोसी राज्यन में लोग आउर जानवरन के चिकित्सा खातीर प्रावधान कईले बाड़न। उ आम लोगन के लाभ खातीर सड़कन पऽ ईनार खोदववले आ पेड़ लगववले बाड़े।


जानवर सभ के कल्यान

अशोक के शीलालेखन में ई बात साफ लिखल गइल बा की जानवर सभ के दुख देवल केनियो ले नीक काम नईखे।[16] हालाकि ऊ गाय के मांस खाए पऽ रोक ना लगवले रहन।[17]

ऊ उ सभ चार गोड़ वाला जानवरन के मारे पऽ रोक लगा देले रहन जवना के ना कवनो इस्तेमाल रहे आउर ना खाईल जा सकत रहे। संगे-संगे कुछ बिशेष परजाति के चिड़ई आ जानवर के मारे पे रोक लगा देले रहन। एतने ना बलुक उ सभ मादा बकरी, सुअर आ भेड़ के मारे पऽ रोक रहे जवन आपन बच्चा के देखभाल करत होखे।

अशोक जानवर के मरला पऽ रोक लगवले रहन आ ओखिनी के इलाज ला अस्पतालो बनववले रहन। अशोक के घड़ी के मौर्य साम्राज्य दुनिया के गीनल चुनल साम्राज्य में आवेला जे आपन जानवर के नागरिक नियन राखत रहे।[18]

अशोक चक्र

अशोक चक्र धर्मचक्र के एगो चित्रण बा। एह में चौबीस गो तिली होखला। अशोक चक्र के जगह-जगह बनवावल गइल रहे। आज-काल अशोक चक्र सभ से जादे भारत के झंडा पऽ लउकेला। अशोक चक्र के भारत के झण्डा के उजरका पट्टी पऽ आसमानी रङ्ग से बनावल गइल बा। अशोक चक्र के अशोक स्तंभ पे भी देखावल गइल बा।

वास्तुकला

अक्सर अशोक के भारत में पत्थर पऽ वास्तुकला चालू करवाए के श्रेय दिहल जाला, जवन की संभवतः यूनानी सभ से सीखल गइल रहे।[19] अशोक से पहिले घर आ मकान अस्थाई समान से बनत रहे जईसे लकड़ी, बांस आ खपड़ा।[20] पाटलिपुत्र में अशोक आपन लकड़ी के महल के पत्थर के बंववलें।[21]ओह महल के बनवावे में उ बिदेसी कारीगर के इस्तेमाल कईले रहन।

अशोक स्तंभ

लुंबिनी,नेपाल(जहवाँ बुद्ध जन्मल रहन) में बनवावल स्तम्भ

अशोक जगह जगह स्तंभ बनववले रहन। अईसे तऽ अशोक के ढ़ेरे स्तंभ होखे के चाहीँ लेकिन अभी खाली दसे गो बा। स्तंभ सभ के औसत ऊंचाई 40-50 फीट आ वजन 50,000 किलोग्राम बा। सँवसे स्तंभ सभ के बनारस में तरासल गइल रहे आ फिर जगह जगह ले जा के खड़ा कईल गइल रहे।स्तंभ सभ के खोज सोरहवाँ शताब्दी में थॉमस कॉर्यात कईलें रहन।

सिंह चतुर्भुज स्तंभ शीर्ष

भारत के राष्ट्रीय चिह्न

सिंह चतुर्भुज स्तंभ शीर्ष अशोक के सारनाथ के स्तंभ पऽ धईल रहे, बाकिर अब उ सारनाथ संग्रहालय में धईल बा।एकरा भारत के राष्ट्रीय चिन्ह के रूप में भी अपनावल गइल बा।

कला, चलचित्र आ साहित्य में[संपादन करीं]

अबनिन्द्रनाथ टैगोर के बनावल चित्र जेमे अशोक के रानी के सांची के स्तूप भिरी खड़ा देखावल गइल बा।

जयशंकर प्रसाद 'अशोक की चिंता' (अशोक के चिंता) नाम के एगो कविता लीखले बाड़े, जेह में कलिंग युद्ध घड़ी अशोक के विचार लिखल गइल बा।

• 1941 में अशोक कुमार नाम के तमिल फिल्म बनवाल गइल रहे जवन अशोक के बारे में रहे।

• 1973 में अमर चित्रकथा अशोक के जीवन पऽ एगो किताब प्रकाशित कइले रहे।

• 2001 में अशोक नाम के एगो फिल्म बनल रहे जेह में शाहरुख खान काम कईले रहन।

इहो देखल जाय[संपादन करीं]

संदर्भ[संपादन करीं]

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  4. Chandra, Amulya (2015-05-14). "Ashoka | biography - emperor of India". Britannica.com. Retrieved 2015-08-09.
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स्रोत सामग्री[संपादन करीं]

बाहरी कड़ी[संपादन करीं]

अशोक
Born: 304 BCE Died: 232 BCE
इनसे पहिले रहलें
बिंदुसार
मौर्य सम्राट
272–232 BCE
इनके बाद
दशरथ