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सांख्य

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सांख्य परंपरागत हिंदू दर्शन के छह गो दर्शन (षड् दर्शन) में गिनल जाए वाला एगो द्वैतवादी आ परंपरावादी दार्शनिक शाखा/परंपरा ह। एह दर्शन में वास्तविकता के दू हिस्सा - प्रकृति आ पुरुष में बाँटल जाला। प्रकृति जड़ जगत ह; सत्व, रज आ तम गुण सभ से मिल के बने ले। पुरुष चेतन, ज्ञेयी आ विषयी हवे।

सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिलमुनि के मानल जाला आ इनकर रचित दू गो रचना मानल जालीं - तत्वसमास आ संख्यासूत्र।

इहो देखल जाय[संपादन करीं]

संदर्भ[संपादन करीं]