रक्षाबंधन

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रक्षाबंधन या राखी हिन्दू लोगन क त्यौहार बा जवन हर साल सावन महीना के पूर्णिमा के दिन मनावल जाला। सावन के महीना में मनावे के वजह से कत्तों कत्तों एके सावनी या सलूनो भी कहल जाला।[1] रक्षाबंधन में राखी या रक्षा के सबसे ढेर महत्व देवल जाला। राखी कच्चा सूत जइसन सस्ती चीज से लगाइत रंगीन कलावा, रेशम क धागा, चाँदी और सोना जइसन महंगी चीज तक बन सकेला।

अनुष्ठान[संपादन]

मुख्य लेख : रक्षासूत्र

सबेरहीं नहइले के बाद औरत और लइकी लोग पूजा क थरिया सजावेलीं। थरिया में राखी के अलावा रोरी या हरदी, दीया, अच्छत आऊर कुछ पइसो रख लेवल जाला। आदमी और लइका लोग टीका करावे खातिर पूजा वाली या कऊनो ठीक जगह बईठ जानै। पहिले पूजा कइल जाला, फिर बहिन लोग भाइन क माथा पर रोरी और अच्छत क टीका लगायके अच्छत छिरिक के आरती उतारैनी आऊर उनके कलाई पर राखी बान्हैनी। भाई लोग अपने बहिनिन के राखी बन्हाई के खातिर नेग के तौर पर कुछ पइसा चाहे उपहार देवलन। ज्यादेतर जगहन में मुहूरत से राखी बान्हल जाला आऊर बहिन लोग राखी बान्हे से पहिले भुक्खल रहैलिन।

सामाजिक प्रसंग[संपादन]

नेपाल के पहाद्दि इलका मे बारामहमन् और छेत्रियेन लोग के द्वारा मनवल जाला। लेकिन तरि छ्हेत्र के लोग जे नेपल मे भारत के नज्दिक बा, उ लोग बद धुम-धम से मनावे ला। येह पर्व पर बहिन लोग भाई के लालत पर तिलक लगवे ला औरो भाई के दिर्घ आयु के परर्थना करे ला।

संदर्भ[संपादन]

  1. "राखी" (एचटीएमएल) (अंग्रेज़ी मे); न्यूयॉर्कयूनिवर्सिटी.इडीयू; पहुँचतिथी 13 अगस्त 2007.