शूद्र

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शूद्र हिंदू धर्म के ग्रंथन के अनुसार बतावल वर्ण व्यवस्था में एगो वर्ण हवे। एह में कई गो भारतीय जाति (कास्ट) के लोग के गिनल जाला। वर्ण व्यवस्था में बतावल नियम अनुसार ई सभसे निचला[1][2] वर्ण हवे आ एह लोग के काम दुसरे वर्ण के लोग के सेवा कइल बतावल गइल बा।Lua error in Module:Footnotes at line 275: attempt to call field 'has_accept_as_written' (a nil value). कई अंगरेजी अनुबाद सभ में एकरा के खुदे एगो कास्ट के रूप में बतावल जाला,Lua error in Module:Footnotes at line 275: attempt to call field 'has_accept_as_written' (a nil value). या फिर एगो सामाजिक क्लास के रूप में भी परिभाषा दिहल जाले।

ऋग्वेद में ई शब्द खाली एक बेर, पुरुष सूक्त में आइल बाटे, जबकि बाद के ग्रंथन में, जइसे की मनुस्मृति, अर्थशास्त्रम् आ अन्य धर्मशास्त्र सभ में एकर बिबरन मिले ला।Lua error in Module:Footnotes at line 275: attempt to call field 'has_accept_as_written' (a nil value). सिद्धांत के रूप में, शूद्र लोग मेहनत-मजूरी करे वाला (श्रमजीवी) आ बाकी वर्ण सभ के सेवक के रूप में देखल गइल बा।Lua error in Module:Footnotes at line 275: attempt to call field 'has_accept_as_written' (a nil value).[3] वास्तविक इतिहास में, एह लोग में से कुछ के द्वारा अन्य वर्ण सभ के कामकाज करे के परमान भी बा आ ई लोग योद्धा आ राजा भी रहल बाटे।Lua error in Module:Footnotes at line 275: attempt to call field 'has_accept_as_written' (a nil value).[4]

संदर्भ[संपादन करीं]

  1. Encyclopedia Britannica 2010.
  2. उद्धरण खराबी:Invalid <ref> tag; no text was provided for refs named davis51
  3. Thapar 2004, p. 63.
  4. उद्धरण खराबी:Invalid <ref> tag; no text was provided for refs named jabbar148