समाज

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एगो समाज अइसन व्यक्ति लोग के समूह होला जे लोग आपस में सामाजिक अंतर्क्रिया में शामिल होला। दुसरा रूप में समाज कौनों भूगोलीय क्षेत्र बिसेस में रहे वाला लोग के अइसन समूह हवे जे एक नियर भाव-बिचार, रहन-सहन आ संस्कृति के अन्दर रहि के आपस में संबंधित होला, हालाँकि कौनों बड़हन समाज में एकरे अन्दर छोट-छोट समूह भी पावल जा सके ला।

समाज के बिसेसता सभ में एकर रीति-रिवाज आपसी बेहवार के तरीका निश्चित करे ला; समाज के कार्य-प्रणाली एकरा के संस्था के रूप देला आ ब्यवस्था बनावे के काम करे ला; अधिकार आ जिम्मेवारी के बँटवारा एकरे काम करे के ढंग आ व्यवस्थित रूप से बनल रहे में मदद करे ला; आपसी सहजोग एकरे पैदाइश आ बनल रहे के मूल आधार होला आ समूह के लोग पर कुछ नियंत्रण रखे ला आ कुछ तरह के स्वतंत्रता भी देला।

एह तरीका से, समाज, लोगन के समूह द्वारा आपसी सहजोग के आ आपस में बेहवार के निश्चित तरीका आ रूप देवे वाली एगो संस्था हवे जवन सामाजिक संबंध के जाल पर खड़ा बाटे।

संरचनावादी बिचारधारा में समाज के निरूपण अइसन सांस्कृतिक अवसंरचना भा आर्थिक, सामाजिक, औद्योगिक अवसंरचना के रूप कइल जा सकत बाते जवन लोगन के एकट्ठा भइले से बनल बा, फिर भी एकरा से अलग कुछ बा। एह बिचार के अनुसार समाज खाली दूसरे लोग के साथ आचार बेहवार पर आधारित न होला बलुक लोगन के अपने भौतिक पर्यावरण आ अपने से अन्य लोग के साथ संबंध से बनल संरचना होला।

समाज के अध्ययन करे वाला बिसय समाज शास्त्र हवे। समाज मनोबिज्ञान भा सामाजिक मनोबिज्ञान नाँव के बिसय समाज में लोग के आपसी आदान-प्रदान के आ सम्बन्ध के मनोबिज्ञान के ब्याख्या करे ला। एकरे आलावा समाज कई ठो अउरी संस्था सभ के मूल इकाई भी होला आ राजनीति आ अंतर्राष्ट्रीय संबंध में महत्व के बिसय होला।

संदर्भ[संपादन]