पृथ्वी

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पृथ्वी  Astronomical symbol of Earth
A color image of Earth as seen from Apollo 17.
Famous "Blue Marble" photograph of Earth, taken from Apollo 17
उपनाम
विशेषण Terrestrial, Terran, Telluric, Tellurian, Earthly
युग J2000
उपसौर 152,097,701 km
1.0167103335 AU
अपसौर 147,098,074 km
0.9832898912 AU
अर्ध मुख्य अक्ष 149,597,887.5 km
1.0000001124 AU
विकेन्द्रता 0.016710219
परिक्रमण काल 365.256366 days
1.0000175 yr
औसत परिक्रमण गति 29.783 km/s
107,218 km/h
झुकाव Reference (0)
7.25° to Sun's equator
आरोह  पात क अनुलम्ब 348.73936°
Argument of perihelion 114.20783°
उपग्रह 1 (the Moon)
भौतिक विशेषताएँ
माध्य त्रिज्या 6,371.0 km[1]
विषुवतीय त्रिज्या 6,378.1 km[2]
ध्रुवीय त्रिज्या 6,356.8 km[2]
चपटापन 0.0033528[2]
परिधि 40,075.02 km (equatorial)
40,007.86 km (meridional)
40,041.47 km (mean)
तल-क्षेत्रफल 510,072,000 km²[3]

148,940,000 km² land  (29.2 %)

361,132,000 km² water (70.8 %)
आयतन 1.0832073×1012 km³
द्रव्यमान 5.9736×1024 kg
माध्य घनत्व 5.5153 g/cm³
विषुवतीय सतह गुरुत्वाकर्षण 9.780327 m/s²[4]
0.99732 g
पलायन वेग 11.186 km/s 
40,270 km/h
नाक्षत्र घूर्णन
काल
0.997258 d
23h 56m 04.09054s[4]
विषुवतीय घूर्णन वेग 465.11 m/s
अक्षीय नमन 23.439281°
अल्बेडो 0.367
सतह का तापमान
   Kelvin
   Celsius
न्यून माध्य अधि
184 K 287 K 331 K
−89 °C 14 °C 57.7 °C
वायु-मंडल
सतह पर दाब 101.3 kPa (MSL)
संघटन 78.08% Nitrogen (N2)
20.95% Oxygen (O2)
0.93% Argon
0.038% Carbon dioxide
About 1% water vapor (varies with climate)

पृथ्वी जेवना के धरती, भूमिभुईं कहल जाला, सौर मंडल में सूर्य की ओर से बुध अउरी शुक्र की बाद तिसरका ग्रह हवे। पृथ्वी से मिलत जुलत संरचना वाला ग्रहन के पार्थिव ग्रह कहल जाला जिनहन में पृथ्वी सबसे बड़हन बाटे बाकी अउरी तीन गो बाड़ें बुध, शुक्र आ मंगल। पृथ्वी अंतरिक्ष में से नीला रंग के लउकेले एहीसे एके नीला ग्रह भी कहल जाला। वैज्ञानिक प्रमाण की हिसाब से पृथ्वी के उत्पत्ति अब से करीब साढ़े चारि अरब बरिस पहिले भइल।

पृथ्वी के सबसे बड़ बिसेसता बा इहाँ जीवित जीव जंतु आ पेड़ पौधा के मिलल। अबहिन ले पूरा ब्रह्माण्ड में अउरी कौनो अइसन पिण्ड नइखे मिलल जेवना पर जीवन मिलला के सबूत होखे। खाली मनुष्ये ना बालुक अउरी हजारन लाखन परकार के जीवित परानी पृथ्वी पर निवास करेलन। एकरी खातिर कई गो कारण जिम्मेवार बा जइसे कि पृथ्वी के सूर्य से दूरी एकदम सही बा ए से ई न ढेर गरम रहेले न ढेर ठंढा हो जाले, पृथ्वी के वायुमंडल में गैसन के मात्रा एकदम सही अनुपात में बा, ओजोन परत आ पृथ्वी के चुंबकीय मण्डल सूर्य की हानिकारक किरण से जीवित परानिन के रक्षा करे लें।

पृथ्वी के जीवन धारण कइला कि क्षमता की कारण आ मनुष्य कि एकरी ऊपर निर्भर रहला की कारण एकरा के भारतीय संस्कृति में धरती माई कहल जाला काहें कि सगरी जीव जंतु आ पेड़ पौधा एही पृथ्वी के संतान हवे लोग । संसार की प्राचीनतम ग्रन्थ वेद में पृथ्वी कि आराधना में एगो पूरा सूक्त बा जेवना के पृथिवी सूक्त कहल जाला। पुरानन में पृथ्वी के शेषनाग की फन पर स्थित बतावल गइल बा।

पृथ्वी के अध्ययन करे वाला विज्ञानन के पृथ्वी विज्ञान कहल जाला। इन्हन में सबसे पुरान विज्ञान के भूगोल कहल जाला जेवन पृथ्वी के अलग-अलग अस्थान के रूप आ उहाँ पावल जाए वाला पर्यावरण आ लोगन के अध्ययन आ वर्णन करे वाला विषय हवे। पृथ्वी की अन्दर की जानकारी के खोज करे वाला बिज्ञान भूगर्भशास्त्र कहल जाला। भूगोल में पृथ्वी की ज़मीन वाला हिस्सा के स्थलमंडल, पानी वाला हिस्सा के जलमंडल, पृथ्वी की चारो ओर की गैस से बनल हिस्सा के वायुमंडल आ ए बाकी तीनों में व्याप्त ओ हिस्सा के जे में जीव पावल जालें, जैवमंडल कहल जाला।

पृथ्वी पर पावल जाए वाला पर्यावरण मनुष्य आ बाकी सभ जीव जंतु खातिर बहुत महत्व के चीज बा काहें से कि एकरी अन्दर गड़बड़ी से एकर संतुलन बिगड़ जाई टा सारा जीव जंतु के अस्तित्व समाप्त हो जाई। एही से पृथ्वी की पर्यावरण के सुरक्षा खातिर बहुत व्यापक चर्चा होत बा काहें से कि मनुष्य की क्रियाकलाप से पृथ्वी की प्राकृतिक पर्यावरण के खतरा पैदा हो गइल बा। हर साल अप्रैल महीना की 22 तारिख के पृथ्वी दिवस आ 5 जून के पर्यावरण दिवस मनावल जाला।

पृथ्वी के रासायनिक संरचना[संपादन]

  1. 34.6% आयरन (लोहा)
  2. 29.5% आक्सीजन
  3. 15.2% सिलिकन
  4. 12.7% मैग्नेशियम
  5. 2.4% निकेल
  6. 1.9% सल्फर
  7. 0.05% टाइटेनियम
  8. Others

धरती के घनत्व पूरे सौरमंडल मे बाकी सगरी पिण्डन में सबसे ज्यादा है। बाकी चट्टानी ग्रहन के संरचना कुछ अंतर की साथ पृथ्विये की नियर हउवे। चन्द्रमा के केन्द्रक छोट हवे, बुध का केन्द्रक उसके कुल आकार की तुलना मे बहुत विशाल हवे, मंगल और चंद्रमा का मैंटल कुछ मोटा हवे, चन्द्रमा और बुध मे रासायनिक रूप से भिन्न भूपटल ना पावल जाला, सिर्फ पृथ्वी के अंत: और बाह्य मैंटल परत अलग है। ध्यान दिहल जाय कि ग्रहन (पृथ्वी भी) के आंतरिक संरचना की बारे मे हमनी के ज्ञान सैद्धांतिक हवे।

आंतरिक संरचना[संपादन]

पृथ्वी के आतंरिक संरचना

पृथ्वी के आतंरिक संरचना शल्कीय, मने कि परतदार, बाटे जइसे पियाज के छिलका कई परत में होला। ए परतन के मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषता अथवा यांत्रिक विशेषता की आधार पर कइल जाला। पृथ्वी के सबसे ऊपरी परत भूपर्पटी एगो ठोस परत हवे, मध्यवर्ती मैंटल बहुत ढेर गाढ़ परत हवे, आ बाहरी क्रोड तरल अउरी आतंरिक क्रोड ठोस अवस्था में हवे।

पृथ्वी की आतंरिक संरचना की बारे में जानकारी के स्रोत को दू तरह के बाड़ें । प्रत्यक्ष स्रोत, जइसे ज्वालामुखी से निकलल पदार्थन के अध्ययन, समुद्र्तलीय छेदन से मिलल आंकड़ा के अध्ययन इत्यादि, जेवन कम गहराई ले का जानकारी उपलब्ध करा पावे लें। दूसरी ओर अप्रत्यक्ष स्रोत की रूप में भूकम्पीय तरंगन के अध्ययन अउर अधिक गहराई की विशेषता की बारे में जानकारी देला।

यांत्रिक लक्षणों की आधार पर पृथ्वी के स्थलमण्डल, दुर्बलता मण्डल, मध्यवर्ती मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला। रासायनिक संरचना की आधार पर भूपर्पटी, ऊपरी मैंटल, निचला मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला।

पृथ्वी की अंतरतम के ई परतदार संरचना भूकंपीय तरंगों की संचलन आ उनहन की परावर्तनप्रत्यावर्तन पर आधारित ह जिनहन के अध्ययन भूकंपलेखी की आँकड़न से कइल जाला। भूकंप से पैदा भइल प्राथमिक अउरी द्वितीयक तरंगन के पृथ्वी की अंदर स्नेल की नियम के अनुसार प्रत्यावर्तित हो के वक्राकार पथ पर गति होले। जब दू गो परतन की बीच में घनत्व अथवा रासायनिक संरचना के अचानक परिवर्तन होला तब तरंगन के कुछ ऊर्जा उहाँ से परावर्तित हो जाले। परतन की बीच की अइसन जगहन के असातत्य (Discontinuity) कहल जाला।

भूपटल[संपादन]

अन्य चट्टानी ग्रहन की ऊपरी परत से अगर तुलना कइल जाय त पृथ्वी का भूपटल (अउरी मेंटल के ऊपरी हिस्सा) कई ठोस हिस्सन में बाँटल बा जिनहन के प्लेट कहल जाला। ई प्लेट एस्थेनोस्फीयर की ऊपर तैरत रहेलीं आ एही गतिविधि के प्लेट टेक्टानिक कहल जाला। (वर्तमान में) आठ प्रमुख प्लेट:

  1. उत्तर अमेरिकी प्लेट – उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी उत्तर अटलांटिक अउरी ग्रीनलैंड
  2. दक्षिण अमेरिकी प्लेट – दक्षिण अमेरिका अउरी पश्चिमी दक्षिण अटलांटिक
  3. अंटार्कटिक प्लेट – अंटार्कटिका अउरी “दक्षिणी महासागर”
  4. यूरेशियाई प्लेट – पूर्वी उत्तर अटलांटिक, यूरोप अउरी भारत के अलावा एशिया
  5. अफ्रीकी प्लेट – अफ्रीका, पूर्वी दक्षिण अटलांटिक अउरी पश्चिमी हिंद महासागर
  6. भारतीय -आस्ट्रेलियाई प्लेट – भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड अउरी हिंद महासागर के अधिकांश
  7. नाज्का प्लेट – पूर्वी प्रशांत महासागर से सटे दक्षिण अमेरिका
  8. प्रशांत प्लेट – प्रशांत महासागर के सबसे अधिक (अउरी कैलिफोर्निया के दक्षिणी तट!)

पृथ्वी का भूपटल के उमिर बहुत काम हवे। खगोलिय पैमाना पर देखल जाय त ई बहुते छोटे अंतराल 500,000,000 वर्ष मे बनल हौउवे। क्षरण अउरी टेक्टानीक गतिविधी पृथ्वी की भूपटल को नष्ट करत रहेले औउरी दूसरी ओर नया भूपटल के निर्माण भी होत रहेला। पृथ्वी के सबसे शुरुवाती इतिहास के प्रमाण नष्ट हो चुकल बाडन। पृथ्वी के आयु करीब-करीब 4.5 अरब साल से लेके 4.6 अरब साल होखला के अनुमान वैज्ञानिक लोग लगावेला । लेकिन पृथ्वी पर सबसे पुरान चट्ठान 4 अरब वर्ष पुरान हउवे , 3 अरब वर्ष से पुरान चट्टान बहुत दुर्लभ रूप से मिलेली। जिवित प्राणियन के जीवाश्म के आयु 3.9 अरब बारिस से कम्मे मिलेला। जब पृथिवी पर जीवन के शुरुआत भइल ओह समय के कौनो प्रमाण अब उपलब्ध नइखे।

जल के उपस्थिति[संपादन]

पृथ्वी की सतह का 70% हिस्सा पानी से ढंकल बा। पृथ्वी अकेला एइसन ग्रह हउवे जेवना पर पानी द्रव अवस्था मे सतह पर उपलब्ध हउवे । हमनी के ई जानले जात बा कि जीवन खातिर द्रव जल बहुत आवश्यक हउवे । समुद्र के गर्मी सोखला के क्षमता पृथ्वी की तापमान के स्थायी रखे मे बहुत महत्वपूर्ण हउवे । द्रव जल पृथ्वी की सतह के क्षरण (अपरदन) आ मौसम की खातिर बहुत महत्वपूर्ण हवे।(मंगल पर भूतकाल मे शायद एइसन गतिविधी भइल होखे ई हो सकेला।)

वायुमंडल या वातावरण[संपादन]

पृथ्वी के वायुमंडल मे 77% नाइट्रोजन, 21% आक्सीजन, अउरी कुछ मात्रा मे आर्गन, कार्बन डाई आक्साईड अउरी भाप पावल जाला। ई अनुमान लगावल जाला कि पृथ्वी की निर्माण की समय कार्बन डाय आक्साईड के मात्रा ज्यादा रहल होई जेवन चटटानन में कार्बोनेट की रूप मे जम गइल, कुछ मात्रा मे सागर द्वारा अवशोषित कर लिहल गइल, बाकी बचल कुछ मात्रा जीवित प्रानी द्वारा प्रयोग मे आ गइल होई। प्लेट टेक्टानिक अउरी जैविक गतिविधी कार्बन डाय आक्साईड के थोड़-बहुत मात्रा के उत्सर्जन आ अवशोषण करत रहेलन। कार्बनडाय आक्साईड पृथ्वी के सतह की तापमान के ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा नियंत्रण करे ले । ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी सतह का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस की आस पास बनल रहेला नाहीं त पृथ्वी के तापमान -21 डीग्री सेल्सीयस से 14 डीग्री सेल्सीयस रहत; इसके ना रहने पर समुद्र जम जाते और जीवन असंभव हो जाता। जल बाष्प भी एगो आवश्यक ग्रीन हाउस गैस हउवे।

रासायनिक दृष्टि से मुक्त आक्सीजन भी आवश्यक हवे। सामान्य परिस्थिती मे आक्सीजन विभिन्न तत्वन से क्रिया करि के विभिन्न यौगिक बनावे ले। पृथ्वी की वातावरण में आक्सीजन के निर्माण अउरी नियंत्रण विभिन्न जैविक प्रक्रिया से होला। असल में जीवन के बिना मुक्त आक्सीजन संभव नइखे।

चन्द्रमा[संपादन]

चन्द्रमा पृथ्वी के एकलौता उपग्रह हवे । चन्द्रमा पृथ्वी से करीब डेढ़ लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित हउवे आ ई पृथ्वी के चक्कर 27.3 दिन में लगावेला। बाकी ग्रह उपग्रहन की तरह चन्द्रमा भी सूर्य की अँजोर से प्रकाशित रहेला । पृथ्वी की चारो ओर चक्कर लगावत घरी पृथ्वी, चन्द्रमा आ सूर्य के आपस के संबंध दिशा की अनुसार बदलत रहेला जेवना से हमनी के चंद्रमा घटत-बढ़त रूप में लउकेला। एही घटना के चन्द्रमा के अवस्था कहल जाला । भारत में चन्द्रमा की अवस्था की हिसाब से तिथि अउरी महीना के गणना होला ।

चंद्रमा जेतना देर में पृथ्वी के एक चक्कर लगावेला (27.3 दिन) ओतने देरी में अपनी धुरी पर एक चक्कर घूमेला । एही वजह से हमनी के पृथ्वी से हमेशा चन्द्रमा के एक्के हिस्सा लउकेला ।

चन्द्रमा अपनी आकर्षण से ज्वार-भाटा ले आवेला । साथै-साथ चंद्रमा की आकर्षण की कारण पृथ्वी की घूर्णन अउरी परिक्रमा गति के हर सदी मे 2 मिली सेकन्ड कम कर देला । ताजा रिसर्च की अनुसार 90 करोड़ वर्ष पहिले एक वर्ष मे 18 घंटा के 481 दिन होखे।

चुम्बकीय क्षेत्र[संपादन]

पृथ्वी के आपन चुंबकीय क्षेत्र भी हउवे जेवन कि बाह्य केन्द्रक के विद्युत प्रवाह से निर्मित होला। सौर वायु ,पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र और उपरी वातावरण में आयनमंडल से मिल के औरोरा बनाते है। इन सभी कारको मे आयी अनियमितताओ से पृथ्वी के चुंबकिय ध्रुव गतिमान रहते है, कभी कभी विपरित भी हो जाते है। पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र और सौर वायू मीलकर वान एलन विकिरण पट्टी बनावेले, जो की प्लाज्मा से बनल हुयी छल्ला की आकार के जोड़ी हउवे जेवन पृथ्वी के चारो ओर वलयाकार मे पावल जाला। बाहरी पट्टी 19000 किमी से 41000 किमी तक हवे जबकि अंदरूनी पट्टी 13000 किमी से 7600 किमी तक हवे।

इतिहास[संपादन]

मुख्य लेख: धरती के इतिहास

वैज्ञानिक लोग हमनी के पृथ्वी ग्रह के इतिहास की बारे में जेतना सूचना इकठ्ठा करे में सफल भइल बाडन ओ से ई पता चलत बा कि पृथ्वी अउरी अन्य ग्रहन के 4.54 अरब बरिस पहले उत्पत्ति भइल. प्रारंभ में पृथ्वी पिघलल अवस्था में रहे । जब पानी भाप की रूप में वातावरण में इकट्ठा हो गइल आ पृथ्वी की कुछ ठंढा भइला पर बरखा शुरू भइल तब ओ से पृथ्वी के तापमान तेजी से कम भइल, तब पृथ्वी के बाहरी परत एक ठोस परत के निर्माण करे भर के ठंडी हो गइल. तुरंत बाद चंद्रमा का निर्माण भइल.

अधिक गैस अउरी ज्वालामुखी के क्रिया आदिम वायुमंडल के उत्पन्न कइलस. संघनित जल वाष्प, क्षुद्रग्रह अउरी बड़े-बड़े आद्य ग्रह , धूमकेतु अउरी नेप्चून के पार से निष्पादित संवर्धित बर्फ अउरी तरल पानी से महासागर उत्पन्न भइल. (मानल जाता कि उच्च ऊर्जा रसायन विज्ञान की द्वारा करीब 4 अरब साल पहले खुदे नकल अणु के उत्पादन भइल अउरी आधे अरब साल बाद पिछले आम जीवन के सभी पूर्वज अस्तित्व में रहलन.

प्रकाश संश्लेषण के विकास सूर्य की उर्जा के प्रत्यक्ष जीवन में उपयोग करे लायक बनवलस, एही के परिणाम भइल कि ऑक्सीजन वातावरण में संचित भइल अउरी ओजोन (ऊपरी वायुमंडल में आणविक ऑक्सीजन के एक परत की रूप में निर्माण भइल. बड़ी-बड़ी कोशिका की साथ छोटहन कोशिका के समावेश के परिणामस्वरुप यूकेरियोटस कहल जाये वाला जटिल कोशिकन की विकास में भइल. ओजोन परत द्वारा हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण से सहायता प्राप्त जीवन पृथ्वी पर संघनित भइल [5]

बिना किसी शुष्क भूमि की शुरुआत के समुद्र के ऊपर सतह की कुल मात्रा लगातार बढ़ रही है पिछले दो अरब सालों के दौरान, उदहारण के लिए , महादेशों का कुल परिमाण दोगुनी हो गई.[6] सैकड़ों लाखों साल से अधिक समय से स्वयं को लगातार दुबारा आकार दिया ,जिससे महादेश बने और टूटे .महादेश पूरे सतह से कभी कभी एक वृहत महादेश (supercontinent) के संयोजन के निर्माण के लिए विस्थापित हुए.लगभग 750 करोड़ साल पहले म्या (mya)), सबसे पहले जन जाने वाला शीर्ष महादेश , रोडिनिया (Rodinia) अलग से प्रकट होने लगा .महादेश बाद में 600 – 540 ;म्या पनोसिया{ (Pannotia) के निर्माण के लिए दुबारा एकीकृत हुए , तब अंततः पन्गेया (Pangaea) 180 म्या[7] अलग से प्रकट हुआ

1960 के बाद से यह मन गया की 750 और 580 लाख साल के बीच में गंभीर ग्लासिअल क्रिया नियोप्रोतेरोजोइक (Neoproterozoic) के दौरान अधिकांश सतह को एक बर्फ की चादर में ढक लिया इस परिकल्पना को पृथ्वी हिमगोला (Snowball Earth) कहा गया, और यह विशेष रुचि का है क्योंकि जब बहु कोशिकीय जीवन प्रारूप प्रसारित हुआ तब यह कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) से पहले हुआ .[8]

कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) के करीब 535 म्या के बाद पाँच व्यापक विनाश हुए हैं (mass extinctions)[9] विनाश की अन्तिम घटना 65 म्या में हुआ जब एक उल्का के टक्कर ने संभवतः ( गैर पक्षी ) डायनासोर और अन्य बड़े सरीसृप के विनाश को प्रेरित किया , पर स्तनपायी जैसे छोटे जानवरों को प्रसारित किया जो तब छुछुंदर से मिलते थे .पिछले 65 लाख साल पहले से , स्तनपायियों का जीवन विविधता पूर्ण है और कई लाख साल पहले एक अफ्रीकी बन्दर के समान जानवर ने सीधा खड़ा होने की योग्यता प्राप्त की[10] यह यंत्र का उपयोग किया और संचार साधन को प्रेरित किया जिसने एक वृहत मस्तिष्क के लिए आवश्यक पोषण और उत्तेजना प्रदान किया .कृषि के विकास ने , और तब सभ्यता ने, मानव को छोटे काल अवधी में पृथ्वी को प्रभावित करने की अनुमति दी,[11] जो प्रकृति और अन्य जीवों को प्रभावित किया.

हिम युग (ice age) का वर्तमान स्वरूप करीब 40 लाख साल पहले प्रारम्भ हुआ, तब करीब 3 लाख साल बाद अभिनूतन (Pleistocene) तीव्र हुआ ध्रुवीय क्षेत्र तबसे हिमाच्छादन और गलन के क्रमिक चक्र को प्रत्येक 40 - 100,000 सालों में दुहराया है .अन्तिम हिम युग की समाप्ति लगभग 10,000 साल पहले हुई[12]

संदर्भ[संपादन]

  1. This is the radius that gives a sphere with the same volume as the WGS 84 reference ellipsoid.
  2. 2.0 2.1 2.2 The WGS 84 reference ellipsoid.
  3. Pidwirny, Michael (2006-02-02); "Surface area of our planet covered by oceans and continents.(Table 8o-1)"; University of British Columbia, Okanagan; पहुँचतिथी 2007-11-26. 
  4. 4.0 4.1 Yoder, C. F. (1995) p. 12.
  5. वार्ड और ब्रोवन्ली ( 2002 )
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बाह्य सूत्र[संपादन]