वायुमंडल

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अंतरिक्ष से पृथ्वी क वायुमंडल निलाहूँ रंग के लउकत बाटे।

पृथ्वी के वायुमंडल, (Atmosphere, एटमॉस्फियर) पृथ्वी के चारों ओर लपटाइल गैसन के घेरा हवे। गैस सभ के एह मैकेनिकल मिक्चर के हवा कहल जाला। पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के ताकत एह हवा के पृथ्वी के चारों ओर पकड़ले रहे ले।

वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन गैस पृथ्वी पर जीवन खातिर बहुत जरूरी बा। एकरे अलावा ई सुरुज के अल्ट्रावायलेट किरण के सोख के उनहन से सगरी जीवधारिन के रक्षा करे ला, गर्मी सोख के ओकर बँटवारा का देला जवना से दिन आ रात के ताप में बहुत अंतर ना होखे पावे ला, सुरुज से आवे वाला रोशनी के डिफ्यूज क के फइला देला जवना से उहो चीज सभ के देखल जा सके ला जिनहन पर सीधा सुरुज के रोशनी (घाम) न पड़ रहल होखे। एकरे अलावा, वायुमंडल के महत्व एह कारण बा भी कि एह में बिबिध प्रकार के मौसम संबधी घटना घटित होखे लीं, जइसे कि हवा के बहल, बादरबरखा इत्यादि मनुष्य के जीवन आ आर्थिक कामकाज (खेती इत्यादि) के बहुत सीमा तक परभावित करे लें।

वायुमंडल के अध्ययन करे वाला बिसय के वायुमंडल बिज्ञान; वायुमंडली दशा, मने कि मौसम, के अध्ययन करे वाला बिज्ञान के मौसम बिज्ञान; आ लंबा समय के मौसमी पैटर्न के अध्ययन करे वाला बिज्ञान के जलवायु बिज्ञान कहल जाला।

गढ़न[संपादन]

वायुमंडल के गढ़न में अलग-अलग गैसन के हिस्सेदारी (प्रतिशत में)

वायुमंडल में के हवा कई गैसन का मेरवन होला। ऊँचाई के साथ इनहना के अनुपात में धटती-बढ़ती होला बाकी जमीन से 100 किलोमीटर ले हवा में गैसन के अनुपात लगभग एक्के नियर होला। वायुमंडल के एह हिस्सा के सममंडल (होमोस्फियर) कहल जाला। एही निचला, होमोस्फियर में कवन गैस केतना मात्र में मिलेले एकर बिबरन वायुमंडल के कंपोजीशन कहाला।

वायुमंडल में पानी (भाप के रूप में) के मात्रा एक जगह से दूसर जगह, आ एक दिन से दुसरे दिन के बीच भा एक सीजन से दुसरे सीजन के बीच हमेशा बदलत रहे ला। वायुमंडली पानी के बदलत रहे के कारण वायुमंडल के कंपोजीशन बतावत घरी एह में भाप के मात्रा के ना शामिल कइल जाला, खाली सूखल हवा के कंपोजीशन बतावल जाले जे नीचे दिहल जा रहल बाटे:

प्रमुख गैस जिनहन से मिल के सूखल हवा बनल बा, आयतन अनुसार[1]
गैस आयतन(A)
नाँव फार्मूला ppmv में(B) % में
नाइट्रोजन N2 780,840 78.084
आक्सीजन O2 209,460 20.946
आर्गन Ar 9,340 0.9340
कार्बन डाइआक्साइड CO2 400 0.04[2]
नियॉन Ne 18.18 0.001818
हीलियम He 5.24 0.000524
मीथेन CH4 1.79 0.000179
ऊपर दिहल सूखा हवा में शामिल ना:
जलभाप(C) H2O 10–50,000(D) 0.001%–5%(D)
नोट:

(A) volume fraction is equal to mole fraction for ideal gas only,
    also see volume (thermodynamics)
(B) ppmv: parts per million by volume
(C) Water vapor is about 0.25% by mass over full atmosphere
(D) Water vapor strongly varies locally[3]

The relative concentration of gasses remains constant until about 10,000 मी (33,000 फीट).[4]

परत में बिभाजन[संपादन]

पृथ्वी के वायुमंडल के कई गो परत (लेयर) में बाँटल जा सके ला। ई एगो सामान्य बात मानल जाला की वायुमंडल में ऊपर की ओर गइले पर ताप में कमी आवेले, बाकी ई बात पुरा वायुमंडल खातिर सही नइखे। एही से तापमान की बदलाव आ दूसरी कई गो बिसेसता की आधार पर वायुमंडल के कई गो परत में बाँटल गइल बा। जब एकरा के ताप की आधार पर बाँटल जाला त एके तापीय संरचना या थर्मल स्ट्रक्चर कहल जाला।

तापीय बनावट[संपादन]

ट्रोपोस्फियर[संपादन]

स्ट्रेटोस्फियर[संपादन]

मेसोस्फियर[संपादन]

थर्मोस्फियर[संपादन]

अन्य परत[संपादन]

आयनमंडल[संपादन]

एक्सोस्फियर[संपादन]

चुंबकीय मंडल[संपादन]

बादर[संपादन]

संदर्भ[संपादन]

  1. चित्र खातिर स्रोत: कार्बन डाईऑक्साइड, NOAA Earth System Research Laboratory, (updated 2013-03). मीथेन, IPCC TAR table 6.1 Archived 2007-06-15वेबैक मशीन पर ., (updated to 1998). The NASA total was 17 ppmv over 100%, and CO2 was increased here by 15 ppmv. To normalize, N2 should be reduced by about 25 ppmv and O2 by about 7 ppmv.
  2. Vaughan, Adam (2015-05-06); "Global carbon dioxide levels break 400ppm milestone"; The Guardian (en-GB मे); ISSN 0261-3077; पहुँचतिथी 2016-12-25. 
  3. उद्धरण खराबी:Invalid <ref> tag; no text was provided for refs named WallaceHobbs
  4. "Air Composition"; The Engineering ToolBox; पहुँचतिथी 2017-07-04; The composition of air is unchanged until elevation of approximately 10.000 m