फागुन

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पलाश के फूल
पलाश के फूल। एही महीना में ई लाल फूल फुलालें आ होली खाती इनहने से परंपरागत रंग बनावल जाय।

फागुन (फाल्गुन) हिंदू कलेंडर के एक ठो महीना बा।

काशी क्षेत्र में प्रचलन में बिक्रम संवत के अनुसार फागुन साल के बारहवाँ आ आखिरी महीना होला। हालाँकि साल के सुरुआत चइत के अँजोरिया से सुरू होखे के कारन चइत के पहिला पाख जे अन्हार के होला साल के सभसे अंत में पड़े ला। अंगरेजी (ग्रेगोरियन कैलेंडर) के हिसाब से एह महीना के सुरुआत कौनों फिक्स डेट के ना पड़ेला बलुक खसकत रहेला। आमतौर पर ई फरवरी/मार्च के महीना में पड़े ला।

भारतीय राष्ट्रीय पंचांग, जेवन सुरुज आधारित होला, में फागुन बारहवाँ महीना हवे आ ग्रेगोरियन कैलेंडर के 20 फरवरी से एकर सुरुआत होले। नेपाल में प्रयुक्त कैलेंडर के हिसाब से ई साल के इगारहवाँ महीना हवे। बंगाली कैलेंडर में भी ई इगारहवाँ महीना होला।

नाँव[संपादन]

फागुन शब्द संस्कृत के फाल्गुन के बदलल रूप हवे। हिंदू महीना सभ के बाकी नाँव नियर एह महीना के नाँव भी ओह नछत्र के नाँव पर रखाइल हवे[1] जेवना नक्षत्र में पुर्नवासी के दिने सुरुज उगे ला। एह महीना के नाँव फाल्गुनी नक्षत्र के आधार पर परल हवे।[2] मने की आकास में सुरुज के चक्कर लगावत पृथ्वी के स्थिति अइसन होला कि सुरुज आकास में ओही दिसा में देखलाई पड़े ला जेहर पूर्वा फाल्गुनी भा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र होखे लीं।

संस्कृति में[संपादन]

राधा के होली के पेंटिंग
होली मनावत राधा आ गोपी लोग, कांगड़ा शैली के पेंटिंग।

फागुन के लोक संस्कृति में उछाह आ उल्लास के महीना मानल जाला। ई बसंत रितु के महीना हवे। माघ के जाड़ा बीते के बाद फागुन में मौसम गरम होखे सुरू होला। पतझर आ ओकरे बाद नाया पत्ता निकले सुरू होला।[3] ई सीजन किसान लोग खाती भी महत्व के होला, गोहूँ-जौ के बालि लउके लागे लीं जे किसान लोग में उछाह के कारन बने ला।[4]

फागुन में हवा के जोर बढ़े ला आ एह हवा के फगुनहट कहल जाला।[3]

फसल पाके के खुसी आ बसंत के आगमन एह महीना के आनंद आ फूहर गीत (कबीरा[5] आ जोगीरा) के महीना बना देला। एह महीना में होली के तिहुआर खास बिसेसता हवे हालाँकि, पूरा महीना भर अइसन गीत गावल जालें। एह गीत सभ के फगुआ कहल जाला।[6][7] हिंदी के साहित्यकार रामविलास शर्मा एह महीना में मनावल जाए वाला एह आनंद के रोमन तिहुआर "सैटर्नेलिया" से तुलना करे लें।[8]

संदर्भ[संपादन]

  1. Dr. V R Jagannath. Saraswati Chhatrakosh. Saraswati House Pvt Ltd. पप. 236–. ISBN 978-81-7335-432-8.
  2. "धर्म ज्ञान: जानें हिंंदू 12 महीनों के नाम, क्या होता है पंचांग". दैनिक भास्कर. पहुँचतिथी 7 मार्च 2019.
  3. 3.0 3.1 Vidyaniwas Mishra (1 January 2009). Hindi Ki Shabd Sampada. Rajkamal Prakashan Pvt Ltd. पप. 43–. ISBN 978-81-267-1593-0.
  4. Hamare Tyohar. Kitabghar Prakashan. पप. 123–. ISBN 978-81-88121-06-9.
  5. Vijaya Kumāra (Prof.) (2004). Bhojapurī bhāshā, sāhitya, aura saṃskr̥ti. Vijaya Prakāśana Mandira. प. 109.
  6. Karmendu Śiśira (1983). Bhojapurī horī gīta. Bhojapurī Akādamī.
  7. Kumārī Vāsantī (1993). Nāgapurī gītoṃ kī chanda-racanā: eka sāṃskr̥tika adhyayana. Kiśora Vidyā Niketana.
  8. Dr. Ramvilas Sharma (September 2010). Sangeet Ka Itihas Aur Bhartiya Navjagran Ki Samasyein. Vani Prakashan. पप. 89–. ISBN 978-93-5000-229-2.