चइत

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चइत (चैत्र) हिंदू कलेंडर के एक ठो महीना बा।

काशी क्षेत्र में प्रचलन में बिक्रम संवत के अनुसार चइत के अँजोरिया (शुक्लपक्ष) से नया साल के सुरुआत होला। एह तरह से एह महीना के आधा हिस्सा पुरान साल में पड़ेला आ आधा नया साल में। अंगरेजी (ग्रेगोरियन कैलेंडर) के हिसाब से एह महीना के सुरुआत कौनों फिक्स डेट के ना पड़ेला बलुक खसकत रहेला। आमतौर पर ई अप्रैल के महीना में पड़े ला।

भारतीय राष्ट्रीय पंचांग, जेवन सुरुज आधारित होला, में चइत पहिला महीना हवे आ ग्रेगोरियन कैलेंडर के 20/21 मार्च से एकर सुरुआत होले। नेपाल में प्रयुक्त कैलेंडर के हिसाब से ई साल के अंतिम महीना हवे। बंगाली कैलेंडर में भी ई आखिरी महीना होला।

तिहुआर[संपादन]

घाँटो[संपादन]

घांटो भोजपुरी संस्कृति के बड़ा निर्मल सहज अनुराग से सराबोर भइल भाई बहिन के त्यौहार ह। चइत सुदी एकादशी के दिन हर लड़की औरत नदी नहाये जाके नदी के पवित्र पांकी लेआवेला लोग। उहे माँटि-पांकी से बनेली 'कोइलर" "कोतवाल" आ "घांटो"। एकरा के सुखा के चिकन बनावन जाला ई सब अपना भाई के बधाई बहिन करेली अपना भाई के अमर होखे के गीत गावेली। यह अवसर के ई गीत बड़ा लोकप्रिय बा "कवना बने रहलू ए कोइलर... कवना बने...."। फिर आवेला सतुआन के दिन वो दिन भाई लाठी ले के बगईचा में जाला लोग अ बहिन फांड में कोइलर ले के जाली अ आम के फेंड पर बिग देली फिर भाई कोइलर के खोज के लाठी से मार गिरावेले। ई संस्कृति भाई बहिन के बचपन के खेल नियन लागेला अ भाई बहिन के प्रेम बढ़ावेला। सतुआन के बिहान भइला बहिन फांड में घाँटों आ कोतवाल के ले के नदी किनार पर जईहे आ फांड में लेके नदी में बोर के भाई के आगे दे देदेवेली भाई एकरो के लाठी से पिटे ले पूरा गांव जुटला आ खुसी से ई त्यौहार मनावल जाला।

संदर्भ[संपादन]