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पर्यावरण बिज्ञान

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पर्यावरण बिज्ञान (अंग्रेजी: Environmental science) एगो नया जमाना क बिज्ञान हवे जेवना में पर्यावरण कइसे काम करे ला, मनुष्य आ पर्यावरण के संबंध का बा, आ पर्यावरण के मनुष्य कइसे नुकसान पहुँचावत बा आ एकर कइसे मैनेजमेंट कइल जा सकेला, एही कुल क अध्ययन कइल जाला। ई एगो अइसन अकादमिक क्षेत्र हवे जे भौतिक, जैविक आ गणितीय बिज्ञानन के आपस में जोड़ के पर्यावरण के पढ़ाई करे ला आ पर्यावरण से जुड़ल समस्यन के हल खोजे ला। ई पर्यावरणीय सिस्टम के समझे खातिर समेकित, मात्रात्मक आ बहु–विषयी तरीका अपनावे ला[1], आ ज्ञानोदय (Enlightenment) के दौर में प्राकृतिक इतिहास (नैचुरल हिस्ट्री) आ चिकित्साशास्त्र (मेडिकल साइंस) से विकसित भइल।[2] एकरा के बहु–विषयी भा अंतर-बिसयी (interdisciplinary) एहसे कहल जाला, काहे कि एहमें जीव–बिज्ञान, रसायन, भौतिकी, भू–बिज्ञान, भूगोल, इंजीनियरिंग, समाजशास्त्र आ इकोलॉजी जइसन कई अलग–अलग क्षेत्रन के ज्ञान एकजुट होखेला।

पर्यावरण बिज्ञान 1960 आ 1970 के दशक में एगो ठोस आ एक्टिव रिसर्च क्षेत्र के रूप में उभरल। एह उभार के कारण रहल जटिल पर्यावरणीय समस्या सभ के समझे खातिर बहु–विषयी तरीका के ज़रूरत, नयका पर्यावरण कानूनन के आवक—जवन जांच–पड़ताल खातिर ठोस प्रोटोकॉल माँगत रहे—आ जनता में पर्यावरण बचावे के बढ़त जागरूकता। एह विकास के गति देवे में कई घटना मुख्य रहल, जइसे साइलेंट स्प्रिंग के प्रकाशन—जवन पर्यावरण इतिहास में मील का पत्थर मानल जाला आ लेखिका रैचल कार्सन के अंतरराष्ट्रीय पहचान दियवलस—साथे 1969 के 1969 'सांता बारबरा तेल रिसाव' जइसन बड़ा पर्यावरण संकट आइल। ओही साल ओहायो के Cuyahoga River में औद्योगिक प्रदूषण के चलते “नदी में आगि लागि जाये” वाली घटना मय दुनिया के ध्यान खींचलस—आ पर्यावरण बिज्ञान के मजबूत, सुव्यवस्थित वैज्ञानिक क्षेत्र बनावे में निर्णायक भूमिका निभवलस।

टर्मिनलॉजी

[संपादन करीं]

आम बोलचाल में “एनवायरनमेंटल साइंस” (अंग्रेजी: Environmental science) आ “इकोलॉजी” (अंग्रेजी: ecology) के कई बेर एके चीज समझल जाला। बाकिर असली मतलब में “इकोलॉजी” खाली जीव-जंतु आ बनस्पति के आपस के मेल-जोल, आ ऊ लोग कइसे आपन “एनवायरनमेंट” से जुड़ल बा — ओही बात के पढ़ाई ह। एही से “इकोलॉजी”, “एनवायरनमेंटल साइंस” के एगो छोट हिस्सा जइसन बा। काहें कि “एनवायरनमेंटल साइंस” में कई बेर खाली केमिकल मामला, या पब्लिक हेल्थ वाला समस्या शामिल रहेला — जेकरा पर इकोलॉजिस्ट लोग काम करे के सम्भावना कम होला। बाकिर असल काम में इकोलॉजिस्ट आ बाकी एनवायरनमेंटल साइंटिस्ट लोगन के काम में बहुत कुछ एके जइसन देखे के मिलेला।

पर्यावरणी अध्ययन (एनवायरनमेंटल स्टडीज़) में समाज बिज्ञान के उपशाखा - जइसे समाजशास्त्र, मानव बिज्ञान वगैरह जइसन विषय - जादे शामिल रहेलें, काहें से कि एमें आदमी आ पर्यावरण के आपस के रिश्ता, लोग का सोच-विचार, आ पर्यावरण से जुड़ल नीतियन के समझल पर जोर दिहल जाला।पर्यावरणी इंजीनियरी (एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग) में डिज़ाइन आ टेक्नोलॉजी पर धियान दिहल जाला, जेकर मकसद हर तरह से पर्यावरण के क्वालिटी बेहतर कइल होखे ला ।

  1. Environmental Science: Iowa State University. Environmental Sciences provides an integrated and interdisciplinary approach to understand and mitigate hazards arising from anthropogenic and natural activities by focusing on key areas of environmental chemistry, earth sciences, environmental engineering, atmospheric sciences, and sustainable systems. http://www.ensci.iastate.edu Archived 27 जनवरी 2020 at the Wayback Machine (Accessed 17 February 2010)
  2. Eddy, Matthew Daniel (2008). The Language of Mineralogy: John Walker, Chemistry and the Edinburgh Medical School 1750-1800. Ashgate Publishing. Archived from the original on 3 September 2015. Retrieved 27 September 2014.