नेपाल के इतिहास

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एशिया के बड़ देश सब चीन आ भारत के बीच में हिमालय के कोख में बसल देश नेपाल के इतिहास ई क्षेत्र में रहल अन्य देशवन कुल से अलग बा। नेपाल से दक्षिण के देश कुल जब विदेशीयन कुल के अधिन में रहल तवनो घड़ी नेपाल स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में स्थापित रहल।

नामाकरण[संपादन]

नेपाल शब्द सब से पहिले अथर्ववेद में उल्लेखित पावल जायेला। अथर्ववेद के अनुसार नेपाल हिमालय के कोख में रहला के कारण नेपाल नाम के उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'निपालय से भइल बा, जेकर अर्थ "पहाड के आधार (पैर) " अथवा "पैर पर निवास" ह। ई के साथ साथ निचे बतावल गइल कथनो कुल सुने में आवेला:

  • नेपाल शब्द तिब्बती भाषा नियमपाल आइल बा, जेकर अर्थ ह "पवित्र भूमी"।
  • बहुत समय पहिले नेपाल बहुत मात्रा में उन के उत्पादन करत रहल आ ऊन रखे खातिर तिरपाल के घर के प्रयोग करत रहल। अहिजा ने जेकर अर्थ ह ऊन आ पाल जेकर अर्थ बतावन जायेला तिरपाल। इहे शब्द से नेपाल नाम पड़ल हो सकत बा।
  • ने नाम के एगो ऋषी ई क्षेत्र के संरक्षण देले रहलन एहि से नेपाल(संरक्षण करना) ई दुईगो शब्द मिलके नेपाल नाम आइल बा अईसनो मान्यता बा।

प्राचिन इतिहास[संपादन]

किराँत काल[संपादन]

काठमांडु घाटी में पावल गइल नि‍योलि‍थि‍क उपकरणन से ई पता चलेला कि अहिजा मानव जाति के बसाई 9 हजार वर्ष पहि‍ले से बा| इ से पता चलल बा कि मानव जे शायद किराँत जाति के रहल लोग लगभग 2500 वर्ष अगाडी अहिजा रहत रहल लोग। किराँती जंगली आ पहाडी कुल के एगो जनजाति हवे लोग, जवन मध्य एशिया, भारत आ हिमालय से आ कर के अहिजा बसे लागल लोग। किराँत काल से पहिले भी इ देश में गोपाल, महिषपाल जईसन अन्य जाति के लोगन के राज्य रहल ई बात के अपुष्ट इतिहास कुल भी पावल जायेला लेकिन स्पष्ट प्रमाण के अभाव होखला से किराँत काल शुरू होखला के समय से पहिले के इतिहास के मानल ना जायेला। एहि कारण से नेपाल के प्रामाणिक प्राचीन इतिहास के शुरुआत किराँत काल से हि भइल बा ई बात के इतिहासी मान्यता मिल चुकल बा। ई काल के राजा यलम्बर के हि प्रथम किराँती राजा के रूप में मानल गइल बा।

लिच्छवी काल[संपादन]

सन 400 से 750 तक नेपाल के हाल के राजधानी काठमांडु में लिच्छवीयन के शासन रहल। कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार तथा चिनी यात्री हुएन साङ्ग के यात्रा वृत्तान्त के अनुसार वैशाली से भाग के आइल कुछ वीर पुरुष लोग किराँती कुल के खेद के लिच्छवी वंश के स्थापना कइले रहल लोग । पावल गइल शिलालेख, मुद्रा आ चंगुनारायण मन्दिर के अभिलेख कुल से पता चलेला मानदेव लिच्छवी वंश के प्रथम इतिहासी राजा रहले । अंशुवर्मा के भारत के राजा हर्षवर्धन से निकटतम वैवाहिक संबंध रहल । ई बात से ई पुष्टि होला कि गण्डक नदी से कोशी नदी तक पहाडी भूभाग में लिच्छवी कुल किराँती कुल के खेद के एक साथ शासन कइले जा। एहि क्षेत्र से दक्षिण के नेपाल के तराई प्रदेश जईसे कि मिथिला राज्य बा ई के अंशुवर्मा अपना अधिन में लेके वैशाली आ पाटलीपुत्र राज्य में समावेश कर दिहले। अंशुवर्मा के बाद नरेन्द्रदेव भारतीय राजा कुल के समर्थन सहयोग से राज्य कइले । नरेन्द्र के बाद गुप्त वंश के शासन अईला से सम्पूर्ण राज्य छोट छोट राज्य में विभाजित हो गइल । ई सम्पूर्ण घटना ईसा पूर्व के ह। ओने बंगाल में चालुक्यसेन के राज्य रहल । नान्यदेव चालुक्य राजा के सेनापति रहले। जे तिरहुत डोय राज्य के स्थापना कर के सिमरनगढ के आपन राजधानी बनवले । मुसलमान आक्रमणकारी सुद्धिन तुगलक के भय से नान्यदेव के पलाती हरि सिंहदेव सर्लाही जिल्ला होते हुए भक्तपुर भाग गइलन उनकर रानी राजल देवी जयस्थिति मल्ल के आपन दामाद बनाके मल्लवंश के शासन स्थापित कइली।

मल्ल काल[संपादन]

1201–1769 ई0 के समय नेपाल में मल्ल काल के शासन रहल। मल्ल काल में काठमांडु आ ई के आस-पास के क्षेत्र मात्र नेपाल कहल जात रहल आ इ क्षेत्र में रहे वाला लोग नेवार कहलात रहल लोग (नेवारी भाषा में नेवार के अर्थ होला नेपाल के नागरिक)। मल्ल-वेश भारत के मल्ल-वंश (महाजनपद) के शासक रहल लोग। मल्ल-वंश खुद के क्षत्रिय बतावत रहल लोग[1] मल्ल कुल के भारत छोड़े के दवाब दिहल गइल। मल्ल-वंश के बारे में महाभारत आ बुद्ध के किताब में पढ़ल जा सकत बा। काठमांडु क्षेत्र में लगभग 1200 ई0 में मल्ल के पहिलका शासक शासन में अईले। मानल जायेला मल्ल-काल नेपाल के स्वर्णकाल रहल जवन 600 वर्ष तक चलल।[2]

नेपाल एकिकरण[संपादन]

विक्रम संवत 1799 में गोरखा के राजा नरभुपाल शाह के निधन के पश्चात राज्य सम्हाल के रखले रहन उनकर जेठ लैका पृथ्वी नारायण शाह। पृथ्वीनारायण शाह राज्य के विस्तार करे के सोचलन आ नेपाल के एकिकरण के शुरुआत कर दिहलन। उ पहिला हाली नुवाकोट पर विसं 1800 में आक्रमण कइलन लेकिन ओह बेरा उनके हार के सामना करे के पड़ल। फिर विसं 1801 में दुसरा हाली आक्रमण कइले आ नुवाकोट के उपर विजय प्राप्त कर लिहलें। ओ के बाद उ विसं 1814 आ विसं 1821 में किर्तिपुर के लड़ाई में दू-दू बार बहुत बुरा तरह से पराजित भइले। ई लड़ाई में किर्तिपुर के लोग सेनापति कालु पाण्डेय के मार दिहले जा आ पृथ्वी नारायण शाह के भाई सुरप्रताप के आँख कुल फोड़ दिहले जा। विसं 1822 चैत्र 3 गते पुन: किर्तिपुर के ऊपर आक्रमण करल गइल आ विजय हासिल भइल। पृथ्वी नारायण विसं 1825 भाद्र शुक्ल चर्दुशी के दिन काठमांडु में इन्द्रयात्रा पर्व मनावतखान आक्रमण कर दिहले आ जीत गइले। एकरा बाद उ क्रमश: विसं 1825 आश्विन 22 में ललितपुर, विसं 1826 कार्तिक में भक्तपुर के ऊपर विजय प्राप्त कइले।

नेपाल अधिराज्य[संपादन]

शाह शासन[संपादन]

पृथ्वी नारायण शाह काठमांडु के ऊपर विजय हासिल कइला के बाद विसं 2026 में आपन देश के राजधानी गोरखा से काठमांडु ले अईले आ उ आपन राज्य गोरखा के नाम बदल के सम्पूर्ण राज्य के नाम नेपाल रख दिहले। पृथ्वी नारायण के मृत्यु के बाद भी राज्य विस्तार के काम ना रुकल आ लगातार अड़ोस-पड़ोस के राज्य जितते हुए उनकर लैका-नाती कुल नेपाल के अउर बढवले जा।

राणा शासन[संपादन]

प्रधानमन्त्री जंगबहादुर राणा


प्रजातन्त्र[संपादन]

पञ्चायती शासन[संपादन]

प्रथम जनआन्दोलन[संपादन]

माओवादी जनयुद्ध आ संकटकाल[संपादन]

नारायणहिटी राजदरबार हत्याकाण्ड[संपादन]

दुसरका जनआन्दोलन[संपादन]

संघिय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल[संपादन]

सन्दर्भसुची[संपादन]

  1. P. 58 Buddhism, Diplomacy, and Trade: The Realignment of Sino-Indian Relations, 600-1400 By Tansen Sen
  2. Bindloss et al. p34.

अन्य लिंककुल[संपादन]