सेक्स पोजीशन

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सेक्स पोजीशन
प्राचीन भारत के शुंग काल के एगो चित्रण में सेक्स पोजीशन

सेक्स पोजीशन (यौनासन भा यौन आसन) अइसन शारीरिक स्थिति भा मुद्रा सभ होलें जिनहन में मनुष्य अकेले भा पार्टनर के साथ सेक्स या सेक्सुअल क्रिया करे ला। सेक्स संबधी क्रिया सभ के बर्गीकरण भी एह पोजीशन सभ के आधार पर, माने कि सेक्स करत समय शरीर के स्थिति के आधार प कइल जाला। आमतौर पर सामान्य सेक्स के दौरान एक पार्टनर दुसरे के शरीर के अंग में घुसाव द्वारा आनंद भा मजा हासिल करे लें लेकिन ई बिना घुसाव (पेनेट्रेशन) के भी हो सके ला। सेक्स पोजीशन सभ के भी कई प्रकार में बाँटल जाला; आम बर्गीकरण में तीन गो कटेगरी में बाँटल जाला - बुर में सेक्स संबंधी पोजीशन, गाँड़ में सेक्स संबंधी पोजीशन आ तिसरा मुँह के इस्तेमाल (आमतौर प यौन अंग के मुँह भा जीभ द्वारा उत्तेजित कइल) संबंधी पोजीशन। एकरे अलावा सेक्स पोजीशन में अउरी कई किसिम के पोजीशन भा क्रिया सामिल हो सके लीं, जइसे कि अकेले मूठ मारल, अँगुरी से सेक्स कइल जेह में एक दुसरे के अंग में अँगुरी डाल के सेक्स भी हो सके ला, कौनों दूसर सामान भा सेक्स खेलौना के इस्तेमाल से सेक्स इत्यादि।

ऊपर बतावल बिबिध आधार आ क्रियाकलाप के अनुसार सेक्स पोजीशन के कइयन ठे प्रकार हो सके लें; कुछ लोग के मानल तऽ ई बा ई सेक्स पोजीशन अनगिनत प्रकार के हो सके लीं। हालाँकि, सभसे प्रचलित सेक्स पोजीशन मिशनरी पोजीशन के मानल जाला जेह में औरत अपना पीठ भर लेट जाले आ मरद ओकरे ऊपर मुँह के भर लेट के लिंग प्रवेश करावे ला।

इहो देखल जाय[संपादन]

संदर्भ[संपादन]