वात्स्यायन

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वात्स्यायन एगो प्राचीन भारतीय बिद्वान, दार्शनिक आ सिद्धांतकार रहलें। इनके रचल ग्रंथ कामसूत्रम् हवे। वात्स्यायन के समय दूसरी सदी इसवी के आसपास मानल जाला। भरम बस, गोतम ऋषि के न्याय सूत्र पर भाष्य लिखे वाला एगो दूसर ब्यक्ति के भी एही वात्स्यायन के रूप में चिन्हित कइल जाला काहें से कि उनहूँ के नाँव वात्स्यायन रहल।[1][2] बहुत सारा किताबन में इनके पूरा नाँव मल्ल्नाग वात्स्यायन बतावल जाला, हालाँकि कुछ बिद्वान लोग के अनुसार असुर गुरु मल्लनाग नाँव के ब्यक्ति के भरम बस वात्स्यायन मानल जाला जबकि ऊ दूसर ब्यक्ति रहलें।[3]

संदर्भ[संपादन]

  1. Sures Chandra Banerji. A Companion to Sanskrit Literature. Motilal Banarsidass Pub., 1990, p. 104-105.
  2. https://books.google.com/books?id=JkOAEdIsdUsC&lpg=PP1&vq=paksilisa&pg=PA104#v=onepage&q=kamasutra&f=false
  3. Daniélou p. 4