आइसोस्टेसी

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आइसोस्टेसी चाहे आइसोस्टैसी (अंगरेजी: isostasy, उच्चा.: आइसोस्टॅसी), भा आइसोस्टेटिक इक्विलिब्रियम (अंगरेजी: isostatic equilibrium) पृथिवी के क्रस्टमैंटल के बीचा में ग्रेविटेशनल इक्विलिब्रियम के स्थिति हवे जेह में क्रस्ट, मैंटल के ऊपर, अपना मोटाई आ घनत्व (डेंसिटी) के हिसाब से तय होखे वाली ऊँचाई पर "पँवरे ले" (फ्लोट करे ले)। ई कांसेप्ट एह बात के समझावे ला कि कइसे अलग-अलग टोपोग्राफिक ऊँचाई (पहाड़, पठार, मैदान के ऊँचाई) पृथिवी के धरातल पर मौजूद बाने। सुरुआत में ई टर्म महादीपी क्रस्ट आ मैंटल के ले के परिभाषित कइल गइल रहल, बाद में अब एकर ब्याख्या लिथौस्फियरएस्थेनोस्फियर के टर्म में कइल जाला, खासतौर पर दीपीय ज्वालामुखी, जइसे कि हवाई दीपसमूह, सभ के संदर्भ में।

हालाँकि, पृथिवी एगो डाइनामिक सिस्टम हवे आ लोड के पर एकर प्रतिक्रिया कई बिबिध तरीकन से होखे ला, आइसोस्टेसी बिबरन देला कि कवन अइसन सीमित करे वाला दसा बाड़ी स जे क्रस्ट आ मैंटल अइसन इक्विलिब्रियम (संतुलन भा समस्थिति) में बाड़ें। कुछ इलाका (जइसे कि हिमालय आ अउरी कन्वर्ज करे वाला प्लेट सीमा) आइसोस्टैटिक इक्विलिब्रियम में ना बाड़ें आ इनहन के ब्याख्या आइसोस्टेसी के मॉडल सब से ना हो पावे ला।

आइसोस्टेसी के ई जनरल टर्म पहिली बेर 1882 में अमेरिकी भूबिज्ञानी क्लैरेंस डटन इस्तेमाल कइले रहलें। हिंदी में एकरा के भूसंतुलन चाहे समस्थिति कहल जाला।

इहो देखल जाय[संपादन करीं]

संदर्भ[संपादन करीं]

अउरी पढ़े खातिर[संपादन करीं]

  • Lisitzin, Eugenie (1974). Sea-level changes. Amsterdam: Elsevier Scientific Pub. Co. ISBN 9780080870441. Retrieved 23 March 2022.

बाहरी कड़ी[संपादन करीं]