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सिराजुद्दीन अली ख़ान

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सिराज-उद-दीन अली खान ( उर्दू: سراج الدین علی خاں آرزو) (1687-1756), जिनका के इनके कलम-नाँव आरज़ू से बेसी जानल जाला, मुगल साम्राज्य के जमाना में दिल्ली के कवि, भाषाविद आ लेक्सिकोग्राफर रहलें। [1] पहिले उ मुख्य रूप से फारसी में लिखत रहलन, बाकी उर्दूओ में 127 शे'र लिखले रहलन। ऊ मीर तकी मीर के मामा रहलन। उ मीर तकी मीर, मिर्जा मुहम्मद रफी सौदा, मिर्जा मजहर जान-ए-जनान आ नजम-उद-दीन शाह मुबारक अब्रो के पढ़वले रहलें।

आरज़ू के जनम आगरा में भइल रहे । उ शेख हिसामुद्दीन के बेटा रहलें, जे मुगल सम्राट औरंगजेब के दरबार में कई गो उच्च पद प रहलें। फारसी आ अरबी में ऊ बहुते निपुण रहले, जवन दुनु भाषा ऊ बचपन में सीखले रहलें। उर्दूसंस्कृतो सीखले रहलें।[2]

आरज़ू चौदह बरिस के उमिर से लिखे लगलें, आ 1719 में दिल्ली अइलें। उनकर परिचय नवाब कमर-उद-दीन खान से आनंद राम ‘मुखलिस’ कइले रहलें ओह घरी प्रधानमंत्री रहल कमर-उद-दीन उनुका के एगो उपयुक्त नौकरी दे दिहलन। अर्जू अपना घर में मुशायरा आयोजित करत रहले, आ मीर तकी मीर समेत कई गो चेला लोग के पढ़ावत रहलें। 1751 में उर्दू-फारसी डिक्शनरी लिखलें जवना के नाम रहे नवादिरुल अल्फाज[3] 1754 में ऊ लखनऊ आ गइलें, आ एकरे बाद अयोध्या, जवन कबो इनके परदादा के निवास रहल। इनके मौत 1756 में लखनऊ में भइल, आ दिल्ली के वकीलपुरा इलाका में दफनावल गइल।[2]

साहित्यिक रचना[संपादन करीं]

  • सिराज-उल-लुघत (फारसी के एगो शब्दकोश जवना में फारसी आ संस्कृत के बीच के संबंध के भी चर्चा कइल गइल बा )
  • चिराघ-ए-हिदायत (फारसी कवि लोग के इस्तेमाल कइल शब्द आ मुहावरा के शब्दावली)
  • नवादिर-उल-अल्फाज (इंडिक शब्दन के शब्दावली) [4]
  • कई गो गजल आ कसीदा
  • दीवान-ए-असर शिराजी
  • मोहब्बत-ए-उजमा ( गद्य पर एगो ग्रंथ )
  • अतीया-ए-कुबरा (गद्य पर एगो अउरी रचना)
  • मियार-उल-अफकर (व्याकरण पर एगो ग्रंथ)
  • पयम-ए-शौक (चिट्ठी के संग्रह), 1999 में
  • जोश-ओ-खरोश (मसनवी)
  • मेहर-ओ-माह
  • इब्रात फसाना
  • गुलजार-इ खायल ( होली आ बसंत के आवे पर एगो लमहर कविता)

संदर्भ[संपादन करीं]

  1. Braj B. Kachru; Yamuna Kachru; S. N. Sridhar (27 March 2008). Language in South Asia. Cambridge University Press. p. 106. ISBN 978-0-521-78141-1.
  2. 2.0 2.1 Abida Samiuddin (2007). Encyclopaedic Dictionary of Urdu Literature. Global Vision Publishing Ho. p. 75. ISBN 978-81-8220-191-0. उद्धरण खराबी:Invalid <ref> tag; name "Abida2007" defined multiple times with different content
  3. Deutsche Morgenländische Gesellschaft (1969). Zeitschrift der Deutschen Morgenländischen Gesellschaft:Volume 119. p. 267.
  4. Dudney, Arthur. "Ārzū, Nawādir al-Alfāẓ". Perso-Indica. Retrieved 11 April 2022.