शारदा सिन्हा
शारदा सिन्हा (1 अक्टूबर 1952 – 5 अक्टूबर 2024) एगो भारतीय लोक गायिका रहली। ऊ खास तौर पर भोजपुरी, मैथिली आ मगही भाषा में गावल लोकगीत खातिर जानल जात रहली। इनके आवाज बिहार आ पूर्वांचल में बहुत लोकप्रिय रहल आ छठ गीतन खातिर खास पहचान बन गइल रहे।
भारत सरकार इनके संगीत क्षेत्र में योगदान खातिर पद्मश्री आ पद्मभूषण से सम्मानित कइले रहल।[1][2]
5 अक्टूबर 2024 के नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में इनके निधन भइल।[3]
जिनगी
[संपादन करीं]शारदा सिन्हा के जनम 1 अक्टूबर 1952 के बिहार के सुपौल जिला के हुलास गाँव में भइल रहे। इनके पिता सुखदेव ठाकुर बिहार सरकार में शिक्षा विभाग में अधिकारी रहलें। बचपन से ही इनकर रुझान संगीत के ओर रहल।
इन्होंने आपन पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से पूरी कइली आ कला विषय में स्नातक डिग्री हासिल कइली।
बियाह के बाद भी ऊ संगीत से जुड़ल रहली आ आगे चलके समस्तीपुर में एगो कॉलेज में संगीत के शिक्षा देवे लगली।
गायकी कैरियर
[संपादन करीं]शारदा सिन्हा 1980 के दशक में लोकगीत गायकी से प्रसिद्ध भइली। ऊ मैथिली, भोजपुरी आ मगही भाषा में पारंपरिक गीत गावे खातिर जानल जात रहली।
इनकर कई गो लोकप्रिय गीत बा जइसे: पिरितिया काहे ना लगवले, पटना से बैदा बोलाइ दऽ, पनिया के जहाज से पलटनिया बनि अइहऽ पिया।
हिंदी सिनेमा में भी इनकर योगदान रहल। फिल्म मैंने प्यार किया के गीत कहे तोसे सजना बहुत लोकप्रिय भइल। बाद में हम आपके हैं कौन में भी ऊ गाना गइली।
फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में इनकर गावल गीत तार बिजली से पतले हमारे पिया नया पीढ़ी में भी काफी लोकप्रिय भइल।
सम्मान
[संपादन करीं]- पद्म श्री (1991)
- पद्म भूषण (2018)
- बिहार कोकिला (उपाधि)
- देवी अहिल्या सम्मान
संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ "Padma Awards" (PDF). Ministry of Home Affairs, Government of India. Archived from the original (PDF) on 19 October 2017. Retrieved 21 July 2015.
- ↑ "Government announces recipients of 2018 Padma awards". The Times of India. 26 January 2018.
- ↑ "शारदा सिन्हा के निधन". BBC News हिंदी. 6 नवंबर 2024.