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मूरभूत कर्तव्य

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मूरभूत कर्तव्यन के सौसे भारतीय नागरिकन के मूरभूत फरज के रुप मे व्याख्यायित कइल गइल बा के, देशभक्ति के भावना के प्रोत्साहित करऽस आ भारत के एकता अखण्डित राखऽस। संविधान के भाग चार - (क)[1] में निर्धारित ई कर्तव्य व्यक्ति आ राष्ट्र से संबंधित बा। नीति निर्देशक सिद्धांत[2] के जइसे एह के अदालत तबले लागू नईखे कर सकत जबले संसद के कवनो अधिनियम में दोसरा तरह के प्रावधान ना होखे।

Constitution_of_India_(calligraphic)_Cover
भारतीय संविधान के ग्रन्थावरण (मूर सुलेख आ प्रकाशित संस्करण)।

इतिहास[संपादन करीं]

नागरिकन के मूरभूत कर्तव्यन के संविधान में 1976 में 42वा संविधान संशोधन[3] में स्वर्ण सिंह समिति[4]के प्रस्ताव पर जोड़ल गइल। ई समिति के निर्माण ओह साल के सुरुआत में सरकार द्वारा कइल गइल रहे। सुरूआत में संविधान में मूर रूप से दसगो के संख्या में मूरभूत कर्तव्य रहे। बाद में 2002 के 86वा संविधान संशोधन द्वारा बढ़ा के ईगारेगो कर देवल गइल।

ई ईगारऽगो कर्तव्यन के संविधान के अनुच्छेद 51- क (भाग-IV-A में एकमात्र अनुच्छेद) में सूचीबद्ध बा। नीति निर्देशक सिद्धांत[5] के जैसे मूरभूत कर्तव्यो गैर न्यायसंगत नेत के होला।

2003 में सर्वोच्च न्यायालय के रंगनाथ मिश्र के फैसला दिहले के, "मूरभूत कर्तव्य के खाली कानूनी रूप से अमल ना होखे के चाही बलुक सामाजिक रूपो से अमल होखे के चाही।" एम्स विद्यार्थी संघ बिरुद्ध एम्स 2001[6] मामला में सर्वोच्च न्यायालय के कहनामा रहे के, "मूरभूत कर्तव्य मूरभूत अधिकार के बराबरे महत्वपूर्ण बा।"

महत्व[संपादन करीं]

मूरभूत कर्तव्य खाली पेडेंट भा तकनीकी नईखे सामाजिक परिवर्तन के कुंजी[7] के रूप में शामिल कईल गइल रहे। समाज में अर्थपूर्ण योगदान देवे खातिर नागरिक के सबसे पहिले संविधान आ ओकरा अंगन के बुझे के होई। ई जरूरी बा के लोग एह बेवास्था अउरी एकर बारीकियन, ताकत आ मर्यादा के बुझस। एही से भारत में संवैधानिक संस्कृति के फैलाव करऽल बहुते जरूरी बा[8]। हरेक नागरिकन के भारतीय लोकतंत्र में अर्थपूर्ण भागीदार बने के जरूरत बा आ संवैधानिक तत्व के ओकरा अस्सल भावना में आत्मसात करे के कोशिश करे के जरूरत बा। मूरभूत कर्तव्यन के उचित एहसास, संपूर्ण संचालन आ अमलीकरण खातिर एगो एकरूप नीति के जरूरत बा जवन नागरिकन के जवाबदेह बनावे में सहैया होखे।

मूरभूत कर्तव्य नागरिकन के फरजीयात करेला के, ऊ संविधान समेत भारत के राष्ट्रीय प्रतीकन के सम्मान करस, ओकर धरोहर के सञ्जोवह, ओकर वैविध्यपूर्ण संस्कृति के संरक्षित करस आ ओकर रक्षा में सहायता करस। एकरे अलावा ई सगरो भारतीयन के बीच भाईचारा के भावना के बढ़ावा देवे, पर्यावरण आ सार्वजनिक संपत्ति के रक्षा करे, वैज्ञानिक बिचार बिकसित करे, हिंसा से परहेज करे आ जीवन के हर क्षेत्र में श्रेष्ठता के ओरीया प्रयास करे के फरजीयात करे लें।

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सभापति, संसद सदस्य, विधानसभा के सदस्य आदि समेत कवनो नागरिक द्वारा संविधान में निगमित मूरभूत कर्तव्य के उल्लंघन के स्थिति में ई संविधान के तिरस्कार ​​समान बा, जे राष्ट्रीय गौरव के अपमान निवारण अधिनियम 1971 के बदे दंडयोग्य बा, सर्वोच्च न्यायालय ई फैसला दिहऽले के ई मूरभूत कर्तव्य विधानसभा से पारित भइल कवनो कानून के संवैधानिकता के निर्धारितो करे में अदालत के सहायता कर सकेला। अंतर्राष्ट्रीय संधियन में अयीसन कर्तव्यन के संदर्भ बा जैसे के मानवाधिकार के सार्वत्रिक घोषणा आ नागरिक आ राजनीतिक अधिकारन के अंतर्राष्ट्रीय करार आ अनुच्छेद 51 - (क)[9] में भारतीय संविधान के एह संधिन के अनुरूप बनावल गइल बा।

लेखा[संपादन करीं]

हरेक भारतीय प्रजा के ई कर्तव्य होखी के[10];

1. संविधान के पालन करस आ संविधान में समायेल आदर्श के आ राष्ट्रीय संस्थानन, राष्ट्रगान, राष्ट्रपताका के सम्मान करस।

2. स्वतंत्रताला आपन राष्ट्रीय आंदोलनन के प्रेरणा देवेवाला ऊँच आदर्श के सम्मान करस आ अनुसरण करस।

3. भारत के परमाधिपत्यकता, एकता आ अखण्डिता के अखण्डरुप से रक्षा करस आ एहर जतन करस।

4. भारतराष्ट्र के सुरक्षा करस आ आवाहन कइला पर राष्ट्र के सेवा करस।

5. भारत के सौसे प्रजाजन में समरसता आ समान बन्धुत्ता के भाव के निर्माण करस जौन कवनो धम्म, भाषा आ कवनो प्रदेश चाहे संप्रदाय पर आधारित सगरो भेदभाव से उप्पर होखो। स्त्रीयन के गौरव के अपमानीत करे ऐसन बेवहार के तेज देवस।

6. आपन गौरवशाली परम्परा के आ समृद्ध संस्कृतियन के मिनऽहा के बुझस आ एह के सहेजस।

7. जङल, पोखरन, सरितनआरण्य पशुपंछीयन समेत कुदरती पर्यावरण के जतन आ बिकास करस, आऊर जीव - जंतुवन के बदे दायाभाव रखस।

8. वैज्ञानिक आपाधापी, मानवता आ जिज्ञासा आ सुधारशिलता के भावना बिक्सित करस।

9. प्रजात्व संपाति के रक्षा करस आ हिंसा के तिरस्कार करस।

10. बेक्तिगत आ सामूहिक गतिबिधियन के सगरो बिस्तार में निरन्तम् प्रगति के प्रयास करस जेसे राष्ट्र निरन्तम् प्रयत्न आ उपलब्धि के नाया ऊँचाईयन के टो सको।

11. जदि प्रजा माई - बाबू चाहे गार्जियन होखस तऽ छव से चौदऽ बरीस के आपन सबिता चाहे पाल्यसबिता के शिक्षा के तक प्रदान करावस।

इहो देखल जाय[संपादन करीं]

संदर्भ[संपादन करीं]

  1. "List of Fundamental Duties- Part IVA, Article 51A". PendulumEdu (अमेरिकी अंग्रेजी में).
  2. "Profile - Directive Principles Of State Policy - Know India: National Portal of India". knowindia.india.gov.in.
  3. Patil, Amruta. "42nd Amendment Act". prepp.in. prepp. Retrieved Jul 11, 2022.
  4. "Fundamental Dutie's list". Unacademy.
  5. India 2020: Reference Annual (अंग्रेजी में). Publications Division, Ministry of Information and Broadcasting, Government of India. 2020. ISBN 978-81-230-3239-9.
  6. ".I.I.M.S. Students Union vs A.I.I.M.S."
  7. "Fundamental Duties". Drishti IAS (अंग्रेजी में). DAILY UPDATES.
  8. "मौलिक कर्तव्य". Drishti IAS (अंग्रेजी में).
  9. Hemant, Singh (12 मई 2020). "What is Article 15 of the Indian Constitution? Important Features and Provisions". Jagranjosh.com. Retrieved 12 may 2020. {{cite web}}: Check date values in: |access-date= (help)
  10. "मूल कर्तव्य एक परिचय". सुगम ज्ञान (हिंदी में). 15 सितंबर 2018.