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इंडिया गेट

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(इन्डिया गेट से अनुप्रेषित)
इंडिया गेट
भारत
इंडिया गेट
Used for those deceased 1914-1921
Established10 फरवरी 1921
Unveiled12 फरवरी 1931
Location28°36′46.31″N 77°13′45.5″E / 28.6128639°N 77.229306°E / 28.6128639; 77.229306
इंडिया गेट is located in Delhi
इंडिया गेट
इंडिया गेट (Delhi)
Designed byएडविन लुटियंस

इंडिया गेट (अंग्रेजी: India Gate); पुरान नाँव: आल इंडिया वार मेमोरियल; अर्थ: अखिल भारतीय जुद्ध स्मारक) भारत के राजधानी नई दिल्ली में एगो इमारत बाटे। ई इमारत बिना बिभाजित भारत के ओह 74,187 सैनिकन के सम्मान में जुद्ध के यादगार के रूप में बनावल गइल जे पहिला बिस्व युद्ध में 1914-21 के बीच फ़्रांस, फ्लैंडर्स, मेसोपोटामिया, फारस, पूरबी अफ्रीका, गैलिपोली आ तिसरा एंग्लो-अफ़ग़ान जुद्ध में शहीद भइल। लगभग 13,300 सैनिकन के नाँव, जेह में कुछ ब्रिटिश सिपाही आ अफसरन के नाँव भी शामिल बा, ओह गेट पर लिखल बा। एह यादगार बिल्डिंग (मॉन्यूमेंट) के डिजाइन एडविन लुटियंस के बनावल हवे। एकर बनावट प्राचीन रोमन विजय द्वार (ट्रिम्फल आर्क) से प्रेरित बा, जइसे आर्च ऑफ कॉन्स्टैनटाइन। अक्सर एकर तुलना पेरिस में स्थित आर्क द त्रिओँफ से कइल जाला।[1]

1971 के भारत–पाकिस्तान जुद्ध के बाद, गेट के नीचे एगो अउरी मॉन्यूमेंट बनावल गइल, जेहमें काला संगमरमर के ऊँच बेदी पर, उल्टा रखल बंदूक, आ ओकरा ऊपर रखल सैनिक के हेलमेट, आ चारों ओर लगातार जरे वाली चार गो अखंड ज्योति शामिल रहली स। एह स्मारक के अमर जवान ज्योति कहल गइल, जवन भारत के “नामालूम सैनिक लोगन के समाधि” के रूप में काम कइल करे। 1971 से 2022 तक, अमर जवान ज्योति राष्ट्रीय सैन्य श्रद्धांजलि के मुख्य केंद्र रहल। कई दशक ले ई परंपरा रहल कि भारत के प्रधानमंत्री आ अउरी बाकी दूसर गणमान्य लोग गणतंत्र दिवस जइसन खास अवसर पर एहिजा श्रद्धांजलि देवे आवे। जनवरी 2022 में, अमर जवान ज्योति के अखंड ज्योति के नगीचहीं नया बनावल गइल राष्ट्रीय समर स्मारक के ज्योति में औपचारिक रूप से मिला दिहल गइल। इंडिया गेट भारत के सबसे बड़हन जुद्ध के यादगार सभ में गिनल जाला, आ आजो एगो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चीन्हा (लैंडमार्क) बाटे। ई एगो प्रमुख सार्वजनिक जगह भी हवे, जहाँ बहुत सारा पर्यटक लोग घूमे आवेलन, आ ऐतिहासिक रूप से ई सिविल सोसाइटी के सभा आ बिरोध-प्रदर्शन से भी जुड़ल रहल बा।

इंडिया गेट के निर्माण इंपीरियल वार ग्रेव्स कमीशन के काम के हिस्सा रहल, जवन दिसंबर 1917 में ब्रिटिश राज के समय बनावल गइल रहे, जवना से कि पहिला बिस्व जुद्ध में मारल गइल सैनिक लोगन खातिर समाधी आ यादगार मॉन्यूमेंट बनावल जा सके।[2] एह गेट, जेकर तब नाँव ऑल इंडिया वार मेमोरियल धराइल, के नेंइ के पत्थर 10 फरवरी 1921 के साँझ बेरा 4:30 बजे, दौरा पर आइल ड्यूक ऑफ कॉनॉट के हाथे रखल गइल।[3] एह समारोह में इंपीरियल इंडियन आर्मी, इंपीरियल सर्विस ट्रूप्स के अफसर आ सिपाही, कमांडर-इन-चीफ, आ वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड शामिल रहलें। एह अवसर पर वायसराय कहलन कि “व्यक्तिगत वीरता के प्रेरणादायक कहानी हमेशा खातिर एह देस के इतिहास में जिंदा रही।” ऊ इहो कहलें कि ई स्मारक, “जानल-अनजान वीरन के याद में बनल बा”, आ ई आगे आवे वाली पीढ़ी के प्रेरित करी कि ऊ कठिनाई के सामना ओही साहस आ बहादुरी से करे।[3] ड्यूक, राजा के संदेश पढ़लन, जेहमें कहल गइल रहल कि “भारत के राजधानी के बीच एह जगह पर एगो यादगार गेट बनल रही, जवन आने वाली पीढ़ी के मन में भारतीय सेना के अफसर आ सिपाही लोग के महान बलिदान के याद दियवावत रही।” एह समारोह के दौरान कई मलेटरी यूनिट शामिल रहली स—जइसे डेक्कन हॉर्स, थर्ड सैपर्स एंड माइनर्स, सिक्स्थ जाट लाइट इन्फैंट्री, थर्टी-फोर्थ सिख पायनियर्स, थर्टी-नाइंथ गढ़वाल राइफल्स, फिफ्टी-नाइंथ सिंध राइफल्स (फ्रंटियर फोर्स), वन-हंड्रेड सेवेंटीन माहरट्टाज, आ फिफ्थ गुरखा राइफल्स। एह जमीन के मालिक ठेकेदार सर शोभा सिंह रहलें, जवन नई दिल्ली के कई हिस्सा बनावे में मदद कइलें, आ एह प्रोजेक्ट के मुख्य ठेकेदारो उहे रहलन।[4][5]

शिलान्यास के दस साल बाद, 12 फरवरी 1931 के एह स्मारक के उद्घाटन वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा कइल गइल। एह मोका पर ऊ कहलें कि “जे लोग हमनी के बाद एह स्मारक के देखी, ऊ लोग जब एकरे मकसद पर सोची, त देवाल पर दर्ज नाँव सभ से ओह बलिदान आ सेवा के बहुत गहिराई से महसूस पाई।”[नोट 1] शिलान्यास आ उद्घाटन के बीच के दस साल में, रेल लाइन के हटा के यमुना नदी के तीरे ले जाइल गइल, आ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के 1926 में खोलल गइल।[7]

  1. "those who after us shall look upon this monument may learn in pondering its purpose something of that sacrifice and service which the names upon its walls record."[6]
  1. "Delhi Memorial (India Gate)". Commonwealth War Graves Commission. Archived from the original on 14 April 2021. Retrieved 24 January 2022.
  2. David A. Johnson; Nicole F. Gilbertson (4 August 2010). "Commemorations of Imperial Sacrifice at Home and Abroad: British Memorials of the Great War" (PDF). The History Teacher. 4. 43: 564–584. Retrieved 9 April 2014.
  3. 1 2 Connaught, Duke of, Arthur (1921). His Royal Highness The Duke of Connaught in India 1921 Being a Collection of the Speeches Delivered by His Royal Highness. Calcutta: Superintendent Government Printing. pp. 69–71. OL 17945606M.
  4. Rahman, Nadia (2013-01-27). "Khushwant Singh: An Unequivocal Spokesman of Politics in <i>Truth, Love & a Little Malice: An Autobiography</i>". Stamford Journal of English. 4: 111–123. doi:10.3329/sje.v4i0.13492. ISSN 2408-8838.
  5. Tiwari, Rajiv (2020). Delhi A Travel Guide (अंग्रेजी में). Diamond Pocket Books Pvt Ltd. ISBN 9798128819703.
  6. Metcalf, Thomas R. (31 March 2014). "WW I: India's Great War Dulce Et Decorum Est India Gate, our WW-I cenotaph, now stands for an abstracted ideal". Outlook (31 March 2014). Archived from the original on 9 April 2014. Retrieved 8 April 2014.
  7. "A fine balance of luxury and care". Hindustan Times. 21 July 2011. Archived from the original on 27 November 2011.

बाहरी कड़ी

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