पृथ्वी

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पृथ्वी

पृथ्वी हमनी की सौर मंडल में व्यास द्रव्यमान अउरी घनत्व की हिसाब से सबसे बड़हन स्थलीय ग्रह हवे आ सूर्य की ओर से बुध अउरी शुक्र की बाद तीसरका ग्रह हवे पृथ्वी । एहकर “धरती” पृथ्वी, पृथ्वी ग्रह संसार, अउरी टेरा[१] की रूप में भी उल्लेख होला।

मानव (human) सहित पृथ्वी कई लाख जीव जंतु की प्रजाति (species) क घर हवे ,[२] पृथ्विये ब्रह्मांड में एगो एकलौता एइसन स्थान बाटे जहाँ जीवन (life) अस्तित्व पावल जाला. वैज्ञानिक सबूत से ई संकेत मिलत बा कि एह ग्रह क गठन ४.५४ अरब वर्ष (4.54 billion years) पहले,[३][४][५][६] अउरी एकरी सतह पर जीवन लगभग एक अरब बरिस पहले प्रकट भइल. तब से, पृथ्वी के जीवमंडल एह ग्रह पर पर्यावरण (the atmosphere) अउरी अन्य अजैवकीय (abiotic) परिस्थितियन के बदल दिह ले हवे जेवना से वायुजीवी जीवन (aerobic organisms) की प्रसारण, साथे साथ ओजोन परत (ozone layer) के निर्माण के रोकल जा सके जेवन पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र (Earth's magnetic field) कि साथ हानिकारक विकिरण के रोक के जमीन पर जीवन क अनुमति देला .[७]

पृथ्वी के बाहरी सतह (outer surface) कई कठोर खंडों या विवर्तनिक प्लेट में बंटल बा जेवन क्रमशः कई लाख सालन (many millions of years) की अवधी में पूरा सतह पर एक जगह से दूसरा जगह विस्थापित होत रहेलीं. सतह का करीब ७१% नमकीन जल (salt-water) की सागर से आच्छादित हवे , बाकी में महाद्वीप अउरी द्वीप ; तरल पानी पावल जाला, जेवन सगरी ज्ञात जीवन खातिर जरूरी हवे, जेकर दूसर कौनो ग्रह की सतह पर अस्तित्व ज्ञात नइखे [८][९] पृथ्वी के आतंरिक सतह एगो अपेक्षाकृत ठोस भूपटल (mantle) की मोट परत की साथ सक्रिय रहेला , एगो तरल बाहरी कोर जेवन एगो चुम्बकीय क्षेत्र अउरी एक ठोस लोहा का आतंरिक कोर (inner core) के पैदा करेला

पृथ्वी बाह्य अंतरिक्ष (outer space), में सूर्य और चंद्रमा समेत अन्य ब्रह्मांडीय पिण्डन कि साथे क्रिया करे ले. वर्तमान में पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब ३६६.२६ बार चक्कर काटेले ई समय क लंबाई एक नाक्षत्र वर्ष (sidereal year) कहल जाला जेवन ३६५.२६ सौर दिवस (solar day) [१०] की बराबर होला. पृथ्वी के घूर्णन क धुरी एकरी कक्षीय समतल (orbital plane) से लम्बवत (perpendicular) २३.४ अंश की दूरी पर झुका (tilted) हवे जेवन एक उष्णकटिबंधीय वर्ष (tropical year) ( ३६५.२४ सौर दिनों में ) की अवधी में ग्रह की सतह पर मौसमी विविधता [११] पैदा करेला. पृथ्वी क एकलौता ज्ञात उपग्रह चंद्रमा (natural satellite) हवे, जेवन एकर परिक्रमा ४.५३ बिलियन साल पहले शुरू कइलस, समुद्री ज्वार पैदा करेला, धुरिय झुकाव के स्थिर रक्खे ला अउरी धीरे - धीरे एह ग्रह की घूर्णन के धीमा करे ला ग्रह के शुरूआती इतिहास की दौरान एगो धूमकेतु के बमबारी महासागरन [१२] की बनला में भूमिका अदा कइलस. बाद में छुद्रग्रह (asteroid) के प्रभाव सतह के पर्यावरण पर महत्वपूर्ण बदलाव कईलन

आंतरिक संरचना[सम्पादन]

पृथ्वी कई परत में बंटल बा जेवन विशिष्ट रासायनिक और भूकंपी गुण की हिसाब से अलग अलग बा:

(गहराई किमी में है)

  1. 0-40 भूपटल
  2. 40-400 ऊपरी मैंटल
  3. 400-650 संक्रमण क्षेत्र
  4. 650-2700 अंत: मैंटल
  5. 2700-2890 डी परत
  6. 2890-5150बाह्य केन्द्रक
  7. 5150-6378 अंत: केन्द्रक

भूपटल वाली परत क मोटाई सब जगह एक्के समान ना बाटे, यह समुद्र के तल पर पातर बा अउरी महाद्वीपन की नीचे मोट हवे। अंत: केण्द्रक अउरी भूपटल ठोस अवस्था में हौवें। बाह्य केन्द्रक अउरी मैंटल परत अर्धद्रव अवस्था में हईं। पृथ्वी के द्रव्यमान क ज्यादातर हिस्सा मैंटल परत में बाटे , बाकी क अधिकांश हिस्सा केन्द्रक में, ऊ हिस्सा जेवनापर हमनी के निवास करींला जा एकर एगो बहुत छोटा सा अंश हवे

  1. वातावरण = 0.0000051
  2. महासागर = 0.0014
  3. भूपटल = 0.026
  4. मैंटल =4.043
  5. बाहरी केन्द्रक = 1.835
  6. भीतरी केन्द्रक = 0.09675

(सभी x10 ^ 24 किलोग्राम मे)

केन्द्रक मुख्य रूप से लोहा (लोहा/निकेल) क बनल हवे लेकिन हो सकेला कि कुछ हलुक तत्व भी मौजूद होखें। केन्द्रक पर तापमान ७५०० डीग्री केल्वीन होला। अंतः मैंटल मुख्य रूप से सीलीकान , मैग्नेशीयम, आक्सीजन से बनल हवे जे में कुछ लोहा, कैल्सीयम और अल्म्युनियम पावल जाला । उपरी मैंटल सतह लौह अउरी मैग्नेशीयम के सीलीकेट से बनल हवे । ई सब हमनी के भूगर्भीय गतिविधियन से पता चलेला, ज्वालामुखी क लावा निचली परतन के नमूना उपर ले आवत रहेला। सबसे ऊपरी परत ‘भूपटल’ सीलीकान डाय आक्साईड के क्रिस्टलन से बनल हवे।

पृथ्वी के रासायनिक संरचना[सम्पादन]

  1. 34.6% आयरन (लोहा)
  2. 29.5% आक्सीजन
  3. 15.2% सिलिकन
  4. 12.7% मैग्नेशियम
  5. 2.4% निकेल
  6. 1.9% सल्फर
  7. 0.05% टाइटेनियम

धरती क घनत्व पूरे सौरमंडल मे बाकी सगरी पिण्डन में सबसे ज्यादा है। बाकी चट्टानी ग्रहन के संरचना कुछ अंतर की साथ पृथ्विये की नियर हउवे। चन्द्रमा क केन्द्रक छोट हवे, बुध का केन्द्रक उसके कुल आकार की तुलना मे बहुत विशाल हवे, मंगल और चंद्रमा का मैंटल कुछ मोटा हवे, चन्द्रमा और बुध मे रासायनिक रूप से भिन्न भूपटल ना पावल जाला, सिर्फ पृथ्वी क अंत: और बाह्य मैंटल परत अलग है। ध्यान दिहल जाय कि ग्रहन (पृथ्वी भी) के आंतरिक संरचना की बारे मे हमनी के ज्ञान सैद्धांतिक हवे।

भूपटल[सम्पादन]

अन्य चट्टानी ग्रहन की ऊपरी परत से अगर तुलना कईल जाय त पृथ्वी का भूपटल (अउरी मेंटल क ऊपरी हिस्सा) कई ठोस हिस्सन में बाँटल बा जिन्हन के प्लेट कहल जाला। ई प्लेट एस्थेनोस्फीयर की ऊपर तैरत रहेलीं आ एही गतिविधि के प्लेट टेक्टानिक कहल जाला। (वर्तमान में) आठ प्रमुख प्लेट:

  1. उत्तर अमेरिकी प्लेट – उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी उत्तर अटलांटिक अउरी ग्रीनलैंड
  2. दक्षिण अमेरिकी प्लेट – दक्षिण अमेरिका अउरी पश्चिमी दक्षिण अटलांटिक
  3. अंटार्कटिक प्लेट – अंटार्कटिका अउरी “दक्षिणी महासागर”
  4. यूरेशियाई प्लेट – पूर्वी उत्तर अटलांटिक, यूरोप अउरी भारत के अलावा एशिया
  5. अफ्रीकी प्लेट – अफ्रीका, पूर्वी दक्षिण अटलांटिक अउरी पश्चिमी हिंद महासागर
  6. भारतीय -आस्ट्रेलियाई प्लेट – भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड अउरी हिंद महासागर के अधिकांश
  7. नाज्का प्लेट – पूर्वी प्रशांत महासागर से सटे दक्षिण अमेरिका
  8. प्रशांत प्लेट – प्रशांत महासागर के सबसे अधिक (अउरी कैलिफोर्निया के दक्षिणी तट!)

पृथ्वी का भूपटल क उमिर बहुत काम हवे। खगोलिय पैमाना पर देखल जाय त ई बहुते छोटे अंतराल ५००,०००,००० वर्ष मे बनल हौउवे। क्षरण अउरी टेक्टानीक गतिविधी पृथ्वी की भूपटल को नष्ट करत रहेले औउरी दूसरी ओर नया भूपटल क निर्माण भी होत रहेला। पृथ्वी के सबसे शुरुवाती इतिहास के प्रमाण नष्ट हो चुकल बाडन। पृथ्वी क आयु करीब-करीब ४.५ अरब साल से लेके ४.६ अरब साल होखला क अनुमान वैज्ञानिक लोग लगावेला । लेकिन पृथ्वी पर सबसे पुरान चट्ठान ४ अरब वर्ष पुरान हउवे , ३ अरब वर्ष से पुरान चट्टान बहुत दुर्लभ रूप से मिलेली। जिवित प्राणियन के जीवाश्म के आयु ३.९ अरब बारिस से कम्मे मिलेला। जब पृथिवी पर जीवन के शुरुआत भईल ओह समय के कौनो प्रमाण अब उपलब्ध नइखे।

जल क उपस्थिति[सम्पादन]

पृथ्वी की सतह का ७०% हिस्सा पानी से ढंकल बा। पृथ्वी अकेला एइसन ग्रह हउवे जेवना पर पानी द्रव अवस्था मे सतह पर उपलब्ध हउवे । हमनी के ई जानले जात बा कि जीवन खातिर द्रव जल बहुत आवश्यक हउवे । समुद्र क गर्मी सोखला क क्षमता पृथ्वी की तापमान के स्थायी रखे मे बहुत महत्वपूर्ण हउवे । द्रव जल पृथ्वी की सतह के क्षरण (अपरदन) आ मौसम की खातिर बहुत महत्वपूर्ण हवे।(मंगल पर भूतकाल मे शायद एइसन गतिविधी भईल होखे ई हो सकेला।)

वायुमंडल या वातावरण[सम्पादन]

पृथ्वी के वायुमंडल मे ७७% नाइट्रोजन, २१% आक्सीजन, अउरी कुछ मात्रा मे आर्गन, कार्बन डाई आक्साईड अउरी भाप पावल जाला। ई अनुमान लगावल जाला कि पृथ्वी की निर्माण की समय कार्बन डाय आक्साईड क मात्रा ज्यादा रहल होई जेवन चटटानन में कार्बोनेट की रूप मे जम गइल, कुछ मात्रा मे सागर द्वारा अवशोषित कर लिहल गइल, बाकी बचल कुछ मात्रा जीवित प्रानी द्वारा प्रयोग मे आ गइल होई। प्लेट टेक्टानिक अउरी जैविक गतिविधी कार्बन डाय आक्साईड क थोड़-बहुत मात्रा क उत्सर्जन आ अवशोषण करत रहेलन। कार्बनडाय आक्साईड पृथ्वी के सतह की तापमान के ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा नियंत्रण करे ले । ग्रीन हाउस प्रभाव द्वारा पृथ्वी सतह का तापमान ३५ डिग्री सेल्सियस की आस पास बनल रहेला नाहीं त पृथ्वी क तापमान -२१ डीग्री सेल्सीयस से १४ डीग्री सेल्सीयस रहत; इसके ना रहने पर समुद्र जम जाते और जीवन असंभव हो जाता। जल बाष्प भी एगो आवश्यक ग्रीन हाउस गैस हउवे।

रासायनिक दृष्टि से मुक्त आक्सीजन भी आवश्यक हवे। सामान्य परिस्थिती मे आक्सीजन विभिन्न तत्वन से क्रिया करि के विभिन्न यौगिक बनावे ले। पृथ्वी की वातावरण में आक्सीजन क निर्माण अउरी नियंत्रण विभिन्न जैविक प्रक्रिया से होला। असल में जीवन के बिना मुक्त आक्सीजन संभव नइखे।

चन्द्रमा[सम्पादन]

“चन्द्रमा” चन्द्रमा पृथ्वी क एकलौता उपग्रह हवे । चन्द्रमा पृथ्वी से करीब डेढ़ लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित हउवे आ ई पृथ्वी क चक्कर २७.३ दिन में लगावेला। बाकी ग्रह उपग्रहन की तरह चन्द्रमा भी सूर्य की अँजोर से प्रकाशित रहेला । पृथ्वी की चारो ओर चक्कर लगावत घरी पृथ्वी, चन्द्रमा आ सूर्य क आपस क संबंध दिशा की अनुसार बदलत रहेला जेवना से हमनी के चंद्रमा घटत-बढ़त रूप में लउकेला। एही घटना के चन्द्रमा के अवस्था कहल जाला । भारत में चन्द्रमा की अवस्था की हिसाब से तिथि अउरी महीना क गणना होला । चन्द्रम जेतना देर में पृथ्वी क एक चक्कर लगावेला (२७.३ दिन) ओतने देरी में अपनी धुरी पर एक चक्कर घूमेला । एही वजह से हमनी के पृथ्वी से हमेशा चन्द्रमा क एक्के हिस्सा लउकेला । चन्द्रमा अपनी आकर्षण से ज्वार-भाटा ले आवेला । साथै साथ चंद्रमा की आकर्षण की कारण पृथ्वी की घूर्णन अउरी परिक्रमा गति के हर सदी मे २ मीलीसेकन्ड कम कर देला । ताजा रिसर्च की अनुसार ९० करोड़ वर्ष पहिले एक वर्ष मे १८ घंटा के ४८१ दिन होखे।

चुम्बकीय क्षेत्र[सम्पादन]

पृथ्वी क आपन चुंबकीय क्षेत्र भी हउवे जेवन कि बाह्य केन्द्रक के विद्युत प्रवाह से निर्मित होला। सौर वायु ,पृथ्वी के चुंबकिय क्षेत्र और उपरी वातावरण में आयनमंडल से मिल के औरोरा बनाते है। इन सभी कारको मे आयी अनियमितताओ से पृथ्वी के चुंबकिय ध्रुव गतिमान रहते है, कभी कभी विपरित भी हो जाते है। पृथ्वी का चुंबकिय क्षेत्र और सौर वायू मीलकर वान एलन विकिरण पट्टी बनावेले, जो की प्लाज्मा से बनल हुयी छल्ला की आकार क जोड़ी हउवे जेवन पृथ्वी के चारो ओर वलयाकार मे पावल जाला। बाहरी पट्टी १९००० किमी से ४१००० किमी तक हवे जबकि अंदरूनी पट्टी १३००० किमी से ७६०० किमी तक हवे।


इतिहास[सम्पादन]

वैज्ञानिक लोग हमनी के पृथ्वी ग्रह के इतिहास की बारे में जेतना सूचना इकठ्ठा करे में सफल भईल बाडन ओ से ई पता चलत बा कि पृथ्वी अउरी अन्य ग्रहन के ४.५४ अरब बरिस पहले उत्पत्ति भईल. प्रारंभ में पृथ्वी पिघलल अवस्था में रहे । जब पानी भाप की रूप में वातावरण में इकट्ठा हो गइल आ पृथ्वी की कुछ ठंढा भईला पर बरखा शुरू भईल तब ओ से पृथ्वी क तापमान तेजी से कम भइल, तब पृथ्वी क बाहरी परत एक ठोस परत के निर्माण करे भर के ठंडी हो गइल. तुरंत बाद चंद्रमा का निर्माण भइल.

अधिक गैस अउरी ज्वालामुखी क क्रिया आदिम वायुमंडल के उत्पन्न कइलस. संघनित जल वाष्प, क्षुद्रग्रह अउरी बड़े-बड़े आद्य ग्रह , धूमकेतु अउरी नेप्चून के पार से निष्पादित संवर्धित बर्फ अउरी तरल पानी से महासागर उत्पन्न भइल. (मानल जाता कि उच्च ऊर्जा रसायन विज्ञान की द्वारा करीब ४ अरब साल पहले खुदे नकल अणु क उत्पादन भइल अउरी आधे अरब साल बाद पिछले आम जीवन के सभी पूर्वज अस्तित्व में रहलन.

प्रकाश संश्लेषण क विकास सूर्य की उर्जा के प्रत्यक्ष जीवन में उपयोग करे लायक बनवलस, एही क परिणाम भइल कि ऑक्सीजन वातावरण में संचित भइल अउरी ओजोन (ऊपरी वायुमंडल में आणविक ऑक्सीजन क एक परत की रूप में निर्माण भइल. बड़ी-बड़ी कोशिका की साथ छोटहन कोशिका के समावेश के परिणामस्वरुप यूकेरियोटस कहल जाये वाला जटिल कोशिकन की विकास में भइल. ओजोन परत द्वारा हानिकारक पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण से सहायता प्राप्त जीवन पृथ्वी पर संघनित भईल [१३]

बिना किसी शुष्क भूमि की शुरुआत के समुद्र के ऊपर सतह की कुल मात्रा लगातार बढ़ रही है पिछले दो अरब सालों के दौरान, उदहारण के लिए , महादेशों का कुल परिमाण दोगुनी हो गई.[१४] सैकड़ों लाखों साल से अधिक समय से स्वयं को लगातार दुबारा आकार दिया ,जिससे महादेश बने और टूटे .महादेश पूरे सतह से कभी कभी एक वृहत महादेश (supercontinent) के संयोजन के निर्माण के लिए विस्थापित हुए.लगभग ७५० करोड़ साल पहले म्या (mya)), सबसे पहले जन जाने वाला शीर्ष महादेश , रोडिनिया (Rodinia) अलग से प्रकट होने लगा .महादेश बाद में ६०० – ५४० ;म्या पनोसिया{ (Pannotia) के निर्माण के लिए दुबारा एकीकृत हुए , तब अंततः पन्गेया (Pangaea) १८० म्या[१५] अलग से प्रकट हुआ

१९६० के बाद से यह मन गया की ७५० और ५८० लाख साल के बीच में गंभीर ग्लासिअल क्रिया नियोप्रोतेरोजोइक (Neoproterozoic) के दौरान अधिकांश सतह को एक बर्फ की चादर में ढक लिया इस परिकल्पना को पृथ्वी हिमगोला (Snowball Earth) कहा गया, और यह विशेष रुचि का है क्योंकि जब बहु कोशिकीय जीवन प्रारूप प्रसारित हुआ तब यह कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) से पहले हुआ .[१६]

कैम्ब्रियन विस्फोट (Cambrian explosion) के करीब ५३५ म्या के बाद पाँच व्यापक विनाश हुए हैं (mass extinctions)[१७] विनाश की अन्तिम घटना ६५ म्या में हुआ जब एक उल्का के टक्कर ने संभवतः ( गैर पक्षी ) डायनासोर और अन्य बड़े सरीसृप के विनाश को प्रेरित किया , पर स्तनपायी जैसे छोटे जानवरों को प्रसारित किया जो तब छुछुंदर से मिलते थे .पिछले ६५ लाख साल पहले से , स्तनपायियों का जीवन विविधता पूर्ण है और कई लाख साल पहले एक अफ्रीकी बन्दर के समान जानवर ने सीधा खड़ा होने की योग्यता प्राप्त की[१८] यह यंत्र का उपयोग किया और संचार साधन को प्रेरित किया जिसने एक वृहत मस्तिष्क के लिए आवश्यक पोषण और उत्तेजना प्रदान किया .कृषि के विकास ने , और तब सभ्यता ने, मानव को छोटे काल अवधी में पृथ्वी को प्रभावित करने की अनुमति दी,[१९] जो प्रकृति और अन्य जीवों को प्रभावित किया.

हिम युग (ice age) का वर्तमान स्वरूप करीब ४० लाख साल पहले प्रारम्भ हुआ, तब करीब ३ लाख साल बाद अभिनूतन (Pleistocene) तीव्र हुआ ध्रुवीय क्षेत्र तबसे हिमाच्छादन और गलन के क्रमिक चक्र को प्रत्येक ४० - १००,००० सालों में दुहराया है .अन्तिम हिम युग की समाप्ति लगभग १०,००० साल पहले हुई[२०]

संदर्भ[सम्पादन]

  1. ध्यान दिहला के बात बा कि अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (International Astronomical Union) सम्मेलन की द्वारा " टेरा " शब्द पृथ्वी ग्रह की बजाय ज़मीन की बहुत बड़हन हिस्सा की नामकरण खातिर इस्तेमाल कइल जाला सीएफ़
  2. }} -->
  3. सौर मंडल क अन्य ग्रह पानी धारणकरे खातिर या त बहुत गर्म या बहुत ठंढा बाडें तबो पर , ई बाति निश्चित बा कि पाहिले मंगल ग्रह पर पानी के अस्तित्व रहल, अउरी आज भी दिखाई दे सकेला. देखल जाय :
  4. २००७ की तरह, खाली एगो अउरी सौर ग्रह की वातावरण में पानी वाष्पीकरण के खोजल गइल बा आ ई एगो विशाल गैस हवे देखें: }} -->
  5. सौर दिवसन की संख्या नक्षत्र दिवसों (sidereal day) की संख्या से एक कम हवे काहें कि सूर्य की चारों ओर पृथ्वी के कक्षीय गति की परिणामस्वरुप ओकर परिक्रमण काल एक दिन बढ़ जाला .
  6. अहरेंस , वैश्विक पृथ्वी भौतिकी : भौतिक स्थिरता की एक पुस्तिका, पी.८ .
  7. वार्ड और ब्रोवन्ली ( २००२ )
  8. }} -->
  9. }} -->

बाह्य सूत्र[सम्पादन]

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