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सूरदास

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सूरदास
Surdas
सूरदास के एगो पेंटिंग, किशनगढ़ स्टाइल, राजस्थान, लगभग 18वीं सदी
Personal life
Bornल॰1483
Diedल॰1563
Parents
  • रामदास सारस्वत[1] (father)
  • जमुनादास[1] (mother)
Known forभक्ति आंदोलन के अगुआ, संत मत,
Religious life
Religionहिंदू धर्म
Philosophyभक्ति
Senior posting

सूरदास 16वीं सदी के प्रसिद्ध भक्त कवि आ गायक रहलें।[2] सूर नाँव पड़े के कारन उनुकर आँख से आन्हर भइल रहे। ऊ खास तौर पर कृष्ण के भक्ति में लिखल अपना पद आ भजन सभ खातिर जानल जालें। उनकर अधिकतर भक्ति गीत ब्रजभाषा में रचल गइल हवें, जबकि कुछ रचना मध्यकालीन हिंदी के अउरी दूसर बोली, जइसे अवधी, में भी मिले लीं।[3]

सूरदास के जिनगी के कथा के वर्णन अक्सर पुष्टिमार्ग (वल्लभ संप्रदाय) के परंपरा के आधार पर कइल जाला। पुष्टिमार्ग के अनुसार सूरदास, वल्लभाचार्य के दीक्षित चेला रहलें। उनकर जीवन कथा चौरासी वैष्णवन की वार्ता ग्रंथ में मिलेला। सूरदास के पद, अष्टछाप के अउरी बाकी कवियन के रचना सभ के साथे, पुष्टिमार्ग के भजन-कीर्तन परंपरा के प्रमुख हिस्सा मानल जालें। हालाँकि, आधुनिक बिद्वान लोग सूरदास आ वल्लभाचार्य के बीच एह संबंध के ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित ना मानेलें।[4]

सूरसागर के परंपरागत रूप से सूरदास के रचल सभसे प्रमुख ग्रंथ मानल जाला। हालाँकि, विद्वान लोग के मान्यता ई बा कि एह ग्रंथ में शामिल कई पद बाद के कवियन द्वारा सूरदास के नाम से लिखल गइल हो सके लें। वर्तमान रूप में सूरसागर मुख्य रूप से गोकुल आ ब्रज के बालक कृष्ण के मनोहर लीला सभ के वर्णन करेला। एह पदन में अक्सर गोपी लोग के दृष्टिकोण से कृष्ण के बाल रूप आ उनकर प्रेममय लीला सभ के चित्रण मिलेला।

जिनगी आ कबितई

[संपादन करीं]

सूरदास के जन्म के बारे में अलग-अलग मत मिलेला। Encyclopaedia of Indian Literature के अनुसार उनकर जन्म 1258 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के एगो ब्राह्मण परिवार में भइल रहे। जबकि Encyclopaedia Britannica में उनकर जीवनकाल परंपरागत रूप से 1483 से 1563 ईस्वी बतावल गइल बा। कुछ स्रोत उनकर संबंध सारस्वत ब्राह्मण, जाट भा ढाढ़ी समुदाय से जोड़ेलें।

सूरदास के नाम के अर्थ "सूर्य के सेवक" होला। ब्रज भाषा के काव्य परंपरा में उनका के सर्वोच्च कवियन में गिनल जाला। ब्रज भाषा के संबंध व्रज क्षेत्र से बा, जहाँ हिन्दू परंपरा के अनुसार कृष्ण आपन बचपन बितवले रहलें।

भक्त कवियन के जीवनचरित लिखे वाला नाभादास अपना ग्रंथ भक्तमाल में सूरदास के काव्य प्रतिभा के खूब प्रशंसा कइले बाड़ें। खास तौर पर ऊ कृष्ण के बाल लीला आ दिव्य क्रीड़ा के चित्रण में सूरदास के असाधारण कौशल के सराहना करेलें। सूरदास राम आ सीता पर भी कुछ पद लिखले रहलें, बाकिर उनकर अधिकांश रचना कृष्ण के जीवन, चरित्र आ लीलन पर केंद्रित बा।

सूरदास के कविता के रचना मुख्य रूप से ब्रजभाषा में बाड़ी स। ओह जमाना में साहित्य के प्रमुख भाषा संस्कृतफ़ारसी मानल जालीं, जबकि ब्रज भाषा के आम लोग के बोली समझल जाय। सूरदास के रचना सभ ब्रजभाषा के साहित्यिक प्रतिष्ठा दियावे में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभवलीं स। उनकर काव्य के कारण ब्रजभाषा के दर्जा एगो साधारण बोली से बढ़ के साहित्य के समृद्ध भाषा के रूप में स्थापित भइल।

सूरदास के नाम से जुड़ल कविता सभ के एकट्ठा रूप से सूरसागर कहल जाला, जेकर अर्थ "सूर के सागर" होला। एह नाम के कारण ई बा कि उनका नाम से बहुत बड़हन संख्या में पद आ कविता सभ जुड़ल बाड़ी स। परंपरागत रूप से सूरसागर के बारह भाग में बाँटल जाला, जवन संरचना में भागवत पुराण से मिलत-जुलत बा। जइसे भागवत पुराण में कृष्ण के जीवन आ लीला सभ के बर्णन मिले ला , ओइसहीं सूरसागर के अधिकांश पद कृष्ण के जीवन, बाल लीला आ भक्ति पर केंद्रित बाड़ें। एह ग्रंथ में मिलल बहुत पद छह से दस गो तुकांत लाइन वाला गीतात्मक रचना के रूप में लिखल गइल हवें।

कृष्ण के अलावा सूरदास के काव्य में राम आ सीता, विष्णु, शिव, आ हिन्दू परंपरा के पात्र जइसे गजेंद्र आ राजा बलि के भी वर्णन मिलेला। एकरे साथे उनका रचना में कवि के निजी आध्यात्मिक संघर्ष, भक्ति भावना आ ईश्वर से आत्मिक जुड़ाव के अभिव्यक्ति भी देखे के मिलेला।

वल्लभाचार्य के आठ प्रमुख शिष्यन के सामूहिक रूप से अष्टछाप कहल जाला। "अष्टछाप" के अर्थ "आठ गो मुहर" भा "आठ गो हस्ताक्षर" होला। एह नाम के संबंध ओह काव्य परंपरा से बा, जहाँ कवि अपना रचना के अंत में आपन छाप (काव्य-हस्ताक्षर) जोड़त रहलें। अष्टछाप के कवियन में सूरदास के सबसे प्रमुख आ श्रेष्ठ कवि मानल जाला।

पॉपुलर कल्चर में

[संपादन करीं]

सूरदास के जिनगी पर आधारित कई ठे फिलिम बन चुकल बाड़ी स। एहमें सूरदास (1939), भक्त सूरदास (1942), संत सूरदास (1975) आ चिंतामणि सूरदास (1988) प्रमुख बाड़ी स।

आँख से आन्हर एगो दूसर भक्त कवि बिल्वमंगल (जिनका के कुछ परंपरन में सूरदास से जोड़ल जाला) आ चिंतामणि के कथा के भारतीय सिनेमा में कई बेर रूपांतरित कइल गइल बा। एह कथा पर आधारित फिल्मन में "बिल्वमंगल" भा "भगत सूरदास" (1919), जेकर निर्देशन रुस्तमजी धोतीवाला कइले रहलें; "बिल्वमंगल" (1932); "चिंतामणि" (1933), जेकर निर्देशन कल्लाकुरी सदाशिव राव कइले रहलें; "चिंतामणि" (1937), जेकर निर्देशन वाई. वी. राव कइले रहलें; "भक्त बिल्वमंगल" (1948), जेकर निर्देशन शांति कुमार कइले रहलें; "बिल्वमंगल" (1954), जेकर निर्देशन डी. एन. माधोक कइले रहलें; "भक्त बिल्वमंगल" (1954), जेकर निर्देशन पिनाकी भूषण मुखर्जी कइले रहलें; "चिंतामणि" (1956), जेकर निर्देशन पी. एस. रामकृष्ण राव कइले रहलें; "चिंतामणि" (1957), जेकर निर्देशन एम. एन. बसवराजैया कइले रहलें; "चिलम्बोली" (1963), जेकर निर्देशन जी. के. रामू कइले रहलें; "बिल्वमंगल" (1976), जेकर निर्देशन गोबिंद राय कइले रहलें; आ "विल्वमंगल की प्रतिज्ञा" (1996), जेकर निर्देशन संजय विरमानी कइले रहलें, शामिल बाड़ी स।

  1. 1 2 "सूरदास का जीवन परिचय - Biography of Surdas in Hindi Jivan Parichay". 16 September 2020. Archived from the original on 21 September 2020.
  2. Klaus K. Klostermaier (2007-07-05). A Survey of Hinduism: Third Edition. SUNY Press. p. 215. ISBN 978-0-7914-7082-4.
  3. "Surdas Biography - Surdas Poems - Life History in English". India the Destiny (अंग्रेजी में). 2018-06-17. Archived from the original on 26 June 2022. Retrieved 2022-04-26.
  4. Hawley, John Stratton (2018). "Sūrdās". In Jacobsen, Knut A.; Basu, Helene; Malinar, Angelika; Narayanan, Vasudha (eds.). Brill's Encyclopedia of Hinduism Online. Brill.