रबी

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रबी भारत आ आसपास के इलाका में एगो फसली सीजन हवे।[1] ई सीजन के फसल अक्टूबर से मार्च की बिचा में जाड़ा में होखे लीं आ बसंत में इनहन के कटिया होखे ला। मुख्य फसल गोहूँ हवे। सीजन के अलावे एह फसल सभ के भी रबी के नाँव से भा रबी के फसल के नाँव से जानल जाला।

शब्द के उत्पत्ती अरबी मूल से हवे जहाँ एकर मतलब बसंत होला। काहें से कि एह सीजन के फसल सभ पाक के बसंत में कटिया खाती तइयार होखे लीं, इनहन के नाँव रबी के फसल आ एह फसली सीजन के नाँव रबी पड़ गइल।

बिसेसता[संपादन]

रबी के फसल सभ के बोआई के समय अक्टूबर के बाद से नवंबर ले होला। ई मौसम के हिसाब से मानसून के बाद के समय होला। मानसून के समय, मने कि बरखा के रितु बीत जाए के बाद खेत झुरा के जोते लायक हो जालें तब एह फसल के बोआई सुरू होला। उत्तर प्रदेश आ बिहार नियर राज्य सभ में नद्दी के तीरे के काफी मैदानी जमीन अइसनो होखे ले जहाँ बाढ़ के पानी लागल रहे ला, ओकरे उतरे के बाद जोते लायक हो जाए पर ओह इलाका में खाली एही सीजन आ जायद में (सब्जी वाला फसल) सभ के खेती हो पावे ला। कभी-कभार जवना साल मानसून के बरखा कम होखे ले, ऊँचास खेत सभ में नहर से पानी रेंगावे के पड़े ला आ ओकरे बाद जोते लायक होखे पर फसल बोअल जाले जवना से कि बीया के जामे खातिर भरपूर नमी मिल सके।

दिसंबर-जनवरी के जाड़ा भर धीरे-धीरे फसल बढ़े ले आ फरवरी के अंत में घाम तेज होखे सुरू होख्ले पर रेंडे आ फूटे सुरू होले। कटिया आ दंवरी के काम अप्रैल ले चले ला। एह इलाका सभ में गोहूँ नियर फसल के कबो कबो नोकसान भी हो जाला काहें कि जाड़ा के बाद बसंत में अचानक गर्मी बढ़े से अनाज भरपूर दाना वाला होखे से पहिलहीं पाके सुरू हो जाला। अप्रैल में आवे वाला झाकोरदार आ पाथर के साथ होखे वाली बरखा से भी फसल के नोकसान होला।

 इहो देखल जाय [संपादन]

संदर्भ[संपादन]

  1. Balfour, Edward (1885). The Cyclopaedia of India and of Eastern and Southern Asia (3 संपा.). London: Bernard Quaritch. प. 331. 2014-04-15 के ओरिजनल से पुरालेखित.