खेती

खेती चाहे किसानी (agriculture - एग्रिकल्चर; कृषि) मनुष्य द्वारा जमीन जोत के फसल उपजावे के आर्थिक गतिबिधि ह। एहमें जमीन जोतल–संभारल, फसल लगावल, उगावल आ काटल शामिल बा। खाली खाए वाला अनाजे ना, बलुक गैर–खाद्य फसलियो उपजावल जाला। साथे–साथे पशुपालन भी एग्रीकल्चर के हिस्सा हवे। कुछ व्यापक मतलब में जंगल से जुड़ल काम (फॉरेस्ट्री) आ मछली पालन (एक्वाकल्चर) भी एही में गिनल जाला। ई एक तरह के आजीविका के साधन के रूप में अपनावल आर्थिक क्रिया बाटे। आर्थिक गतिबिधि सभ के बर्गीकरण में एकरा के प्राइमरी सेक्टर में रखल जाला। खेती करे वाला आ एह क्रिया से आपन भोजन आ आय हासिल करे वाला लोग के किसान कहल जाला।
खेती इंसानी सभ्यता के घुमंतू जिनगी से हट के एक जगह ठहर के बसे के राह देखवलस। जब लोग पालतू पौधा आ जानवर उगावे–पालन करे लागल, त खाना के अतिरिक्त भंडार बने लागल। एहसे लोग शहर में बस सके लागल। इंसान करीब 1,05,000 बरिस पहिले से अनाज बटोरे लागल रहे, बाकिर असली तौर पर बीया बोके खेती शुरू करीब 11,500 बरिस पहिले भइल। भेड़, बकरी, सुअर आ गाय करीब 10,000 बरिस पहिले पालतू बनावल गइल। दुनिया के कम से कम 11 अलग–अलग इलाका में पौधा स्वतंत्र रूप से उगावल गइल। 20वीं सदी में इंडस्ट्रियल एग्रीकल्चर हावी हो गइल। एहमें बड़े पैमाना पर एके तरह के फसल (मोनोकल्चर) उगावल जाए लागल, आ एही तरीका से ज़्यादातर खेती के उत्पादन होखे लागल।
खेती–बारी आ खेत (फार्म) गाँव के अर्थव्यवस्था पर गहिरा असर डाले ला आ ग्रामीण समाज के रूप–रंग तय करे ला। ई सीधा खेत में काम करे वाला मजूरन पर असर डाले ला आ ओह सभ कारोबार पर भी, जवन खेत आ किसान आबादी के सहारा देले।
मुख्य कृषि उत्पाद के मोटा–मोटी खाना, फाइबर, फ्यूल आ कच्चा माल (जइसे रबर आ लकड़ी) में बाँटल जा सकेला। खाद्य चीज में अनाज (सीरियल/ग्रेन), सब्जी, फल, खाना पकावे वाला तेल, मांस, दूध, अंडा आ फंगस (जैसे की मशरूम) शामिल बा। दुनिया भर में हर साल लगभग 11 अरब टन खाना, 3.2 करोड़ टन नेचुरल फाइबर आ करीब 4 अरब घन मीटर लकड़ी पैदा होला। बाकिर दुनिया के करीब 14 प्रतिशत खाना उत्पादन से निकल के रिटेल तक पहुँचे से पहिलहीँ खराब या बरबाद हो जाला।
मॉडर्न एग्रोनॉमी, प्लांट ब्रीडिंग, आ एग्रोकेमिकल जइसे पेस्टिसाइड (कीटनाशक) आ फर्टिलाइजर (खाद), के साथे टेक्नोलॉजी के तरक्की से फसल के पैदावार बहुत तेज बढ़ल बा। बाकिर एही से पर्यावरण आ इकोलॉजी के नुकसान भी भइल बा। चुनिंदा नस्ल बढ़ावे (सेलेक्टिव ब्रीडिंग) आ आधुनिक एनिमल हसबैंड्री तरीका से मांस के उत्पादन बढ़ल बा, बाकिर एहसे जानवरन के भलाई आ पर्यावरण के नुकसान पर सवाल भी उठल बा।
पर्यावरण से जुड़ल दिक्कतन में क्लाइमेट चेंज में योगदान, भूजल भंडार (एक्विफर) के घटाव, जंगल कटाई, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस आ दूसर किसिम के एग्रीकल्चर प्रदूषण शामिल बा। खेती खुद पर्यावरण खराब होखे के कारण भी बन सकेली, आ ओही खराबी से सबसे जादे प्रभावितो हो सकेले। जैव विविधता के घटाव, रेगिस्तान बढ़े (डेजर्टिफिकेशन), मिट्टी के खराबी आ क्लाइमेट चेंज—ई सभ फसल के पैदावार कम कर सकेला। जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म के इस्तेमाल बहुत जगह हो रहल बा, हालाँकि कुछ देश एह पर रोक लगवले बाड़ें।
संदर्भ
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