बुर

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बुर
Scheme female reproductive system-en.svg
मनुष्य में मादा जननांग के बिबिध हिस्सा
Vaginal opening description.jpg
वल्वा ऊपरी हिस्सा के कहल जाला, जेह में दूनो ओर फुल्लल मोट ओठ नियर अंग के लैबिया कहल जाला; लैबिया के बीच में बुर के छेद मौजूद होला
1: क्लाइटो रल हिस्स
2: क्लाइटोरिस
3: लैबिया माइनर
4: पेशाब मार्ग
5: बुर के छेद
6: पेरीनियम
7: गाँड़
डिटेल जानकारी
लातीन Vagina
पहिचानक
Identifiers
ग्रे'स p.1264
TA A09.1.04.001
FMA 19949

शरीररचना बिज्ञान शब्दावली

शरीररचना बिज्ञान शब्दावली

बुर (संस्कृत: योनि, अंगरेजी: वैजाइना[1]) सगरी मैमल (मने स्तनधारी जीव) सभ में, मांसपेशी से बनल आ नली के आकार के एगो अंग होला जवन की मादा जननांग के हिस्सा होला; मनुष्य सभ में ई वल्वा से ले के सर्विक्स तक ले के बीच के हिस्सा होला। बुर के बाहरी छेद, कुछ हद तक हाइमेन नाँव के झिल्ली से तोपाइल हो सके ला आ एकर अंदरूनी माथ पर गर्भाशय के गर्दन नियर हिस्सा, जेकरा सर्विक्स कहल जाला, से जुड़ल होला। शरीर के अंग के रूप में बुर द्वारा सेक्स आ जचगी संभव होले आ समय-समय पर माहवारी के चक्र के अनुसार माहवारी के बहाव एह रस्ता से होला।

बुर के बनावट आ जगह प्रजाति कुल के हिसाब से फरक फरक होला आ आकार में भी अंतर हो सकेला। फीमेल मैमल सभ के आम तौर पर वल्वा में दुगो बाहरी छेद होला, एगो होला मू्त-द्वार मूत्र-पथ खातिर आ एगो होला योनि-द्वार जननांग-पथ खातिर। ई मेल मैमल सभ से अलग होला, मेल मैमल में मूते आ प्रजनन दुनो काम खातिर एकहीगो मूत्र-पथ (मूत-द्वार) होखेला। योनि-द्वार नजदीके के मूत्र-द्वार से बहुत बड़हन होला आ मानव जाति के दुनो छेद के लेबिया द्वारा सुरक्षा प्रदान करल रहेला। उभयचर जंतु जइसे की चिरई कुल, सरीसृप कुल आ अंडजस्तनी (अंडा देवे वाली जीव सभ) में एकहिगो छेद होखेला, मल-नली, जठरांत्र-नली, मूत्र-नली, प्रजनन-नली सभन खातिर एकहिगो द्वार होखेला।

सेक्स के समय, बुर के अंदरूनी सतह पर चिकनाहट वाला पदार्थ भा रस सरवत्त्ते लागे ला जवना से एह में आसानी से घुसाव संभव हो सके, अइसन मनुष्य सभ में आ अन्य मैमल सभ में भी होला। एह रस के नमी के चलते बुर में चिकनाहट बढ़ जाला आ रगड़ में कमी आवे ला जवना से सेक्स आसान हो जाला। बुर के अंदरूनी सतह के बनावट भी लहरदार होले जवना से लाँड़ पर पर्याप्त रगड़ पैदा होले आ बीर्य के निकले तक के प्रक्रिया पूरा होला, जेकरे बाद गरभ धारण हो सके ला। बुर में सेक्स के दौरान आनंद आ प्रेम के लगाव में बढ़त के अलावा अउरी किसिम के परभाव भी हो सके लें, जइसे हेट्रोसेक्सुअल भा लेस्बियन सेक्स के कारण सेक्स संबंधी इन्फेक्शन आ बेमारी (एसआईटी) के एक ब्यक्ति से दुसरे ब्यक्ति में संचार हो सके ला। एह तरह के इन्फेक्शन आ बेमारी सभ से बचाव खाती बिबिध तरह के सेफ तरीका के पालन कइल जा सके ला। एकरे अलावा बुर से संबंधित कई तरह के रोग बाड़ें जिनहन से मनुष्य के बुर परभावित हो सके ले।

बुर शब्द, सामाजिक रूप से पूरा मानव इतिहास में बहुत संबेदनशील रहल बा आ नकारात्मक दृष्टिकोण, भाषा में आ सांस्कृतिक सोच में एकरा के गंदा रूप में प्रस्तुतीकरण, आ तरह-तरह के टैबू (नकारात्मक मान्यता) सभ, औरत के कामुकता के चीन्हा, आध्यात्मिक रहस्यवाद आ जीवनशक्ति आ प्रजनन से जुड़ल बाटे। सामाजिक सोच में बुर, गंदा आ अश्लील चीज से ले के पूजनीय चीज (चीन्हा भा प्रतीक के रूप में) ले बिबिध रूप में देखल गइल बा।

आम भाषा में बुर शब्द औरत के जननांग के बाहरी हिस्सा (अंगरेजी में वल्वा भा संस्कृत में भग) खाती भी इस्तमाल होला आ भीतरी नलीनुमा हिस्सा खाती भी। हालाँकि, मेडिकल शब्दावली आ तकनीकी रूप से खाली अंदरूनी नलीदार हिस्सा के बुर (वैजाइना) कहल जाला। एह बिभेद के जानकारी सेक्स संबंधी ज्ञान आ कई तरह के बेमारी रोके में सहायक हो सके ला। प्राचीन भारतीय ग्रंथ सभ में बुर के आकृती के आधार प कई प्रकार भी गिनावल गइल बा।[2] कामसूत्र में एकर प्रकार आ बिभेद के बिस्तार से बर्णन बा; चरकसंहिता में कई किसिम के बुर संबंधी रोग के बिबरन दिहल गइल बा।[3]

संरचना

सामान्य परिचय

पेडू के काट, आ मादा जननांग के संरचना देखावत चित्र

मनुष्य सभ में बुर मांसपेसी से बनल एगो लचकदार नली होले जे बाहरी हिस्सा #वल्वा से ले के सर्विक्स तक ले जाले।[4][5] एकर रंग गुलाबी होला आ, बाहरी माथ गुप्तांग त्रिभुज में खुले ला आ अंदरूनी माथ गर्भाशय से जुड़े ला, गर्भाशय आ बुर के नली के जोड़ के सर्विक्स कहल जाला। सर्विक्स से बुर के नली के जुड़ाव के अंगरेजी में फोर्निक्स कहल जाला, फोर्निक्स बाहरी नली नियर होला जेह में सर्विक्स अंदरूनी नली के रूप में समाइल होला।[6] बुर के बाहरी माथ, गुप्तांग त्रिभुज में खुले ला, गाँड़ आ बुर के छेद के बीच के सतह के अंगरेजी में पेरीनम कहल जाला, एह पेरीनम के ठीक ऊपर बुर के नली के छेद होला आ बुर के छेद के ठीक ऊपर पेशाब करे वाला छेद, यानी मुतरी या पेशाब मार्ग होला जेकरा अंगरेजी में यूरेथ्रल ओपनिंग कहल जाला। बाहर से अंदर के ओर बुर के नली ऊपर के ओर आ पाछे के ओर बढ़ल होले, ई नली पेशाब मार्ग (यूरेथ्रा) आ मलाशय (रेक्टम) के बीच से हो के गुजरे ले, एकरे अंतिम माथ पर जेकरा के फोर्निक्स कहल जाला लगभग 90 डिग्री के कोण पर एह में सर्विक्स आ के घुसल होला।[7]

वल्वा

हालाँकि, भोजपुरी में बुर नली वाला हिस्सा के भी कहल जाला आ बाहरी हिस्सा के भी, तकनीकी रूप से आ मेडिकल साइंस में इनहन में अंतर कइल जाला। तकनीकी रूप से दुनों जाँघ के बीच के सगरी गुप्तांग सभ के गुप्तांग त्रिभुज के रूप में परिभाषित कइल जाला। औरतन में एह त्रिभुज के संरचना में सभसे ऊपर क्लाइटोरल हुड होला आ सभसे नीचे गाँड़ के छेद जेवना से मल निकास होला।

एह गुप्तांग त्रिभुज के ऊपरी हिस्सा के वल्वा कहल जाला, या आम भाषा में जेकरा के बुर कहल जाला। एह हिस्सा में दू गो छेद होलें, ऊपरी पेशाब मार्ग, निचला बुर के नली के बाहरें खुले वाला छेद; एह दुनों छेद के अगल-बगल सुरक्षा खाती लेबिया माइनरलेबिया मेजर रुपी संरचना होला, मने कि दोहरा ओठ नियर फुल्लल अंग। बाहरी मोट ओठ नियर संरचना के लेबिया मेजोरा कहल जाला आ एकरे अंदर छिपल बाकी सभ अंग वाला हिस्सा के आम भाषा में बुर आ तकनीकी भाषा में वल्वा कहल जाला।[8]

समाज आ संस्कृति में

मय इतिहास में, बुर के बारे में कई किसिम के धारणा आ सोच मिले ला, एकरा के कई तरह से बोध में लिहल गइल मिले ला, एह परसेप्शन सभ में कई चीज सामिल बा। उदाहरण खातिर ई कामुक इच्छा के केंद्र मानल जाय, जनम एही रास्ता से होखे के कारण ई जीवन के प्रतीक आ चीन्हा मानल जाय, लाँड़ से कमतर आँकल जाय, देखे चाहे महक में बेकार बूझल जाय या फिर अश्लीलता से जोड़ल जाय।[9][10][11] एह बिचार आ धारणा सभ खाती बहुत हद तक नर आ मादा के बीचा के अंतर सभ, जेह में सेक्स संबंधी अंतर खास रूप से सामिल बाने, जिम्मेदार मानल जालें आ इहो सामिल कइल जाला कि ई अंतर सभ के कवना तरीका से ब्याख्या कइल जा रहल बा। एगो इवोल्यूशनरी साइकोलाजिस्ट डेविड बस्स के कहल बा कि चूँकि लाँड़ के साइज क्लाइटोरिस के साइज से काफी बड़हन होला आ लाँड़ एक तरह से ढेर लउके वाला अंग हवे जबकि बुर देख्लाई ना पड़े ला (तुलना में), मरदाना लोग लाँड़ से पेसाब करे ला, लइका छोटपने से आपन लाँड़ छुए के सीख लेलें जबकि लइकी सभ के आपन बुर छुए के गलत बतावल सिखावल जाला, एह कारन उनहन के दिमाग में ई आ जाला कि ई एकरा के छुए से कौनों नोकसान होखी। इहे कारन बा कि बहुत सारी औरत सभ अपना बुर के बारे में बहुत जानकारी ना रखे लीं। रिसर्च करे वाला लोग इहो मान्यता रखे ला कि एही कारण लइका सभ लइकिन के तुलना में जल्दी मूठ मारे (हस्त मैथुन/मास्टरबेशन) के सीख जालें आ ई काम लइकी सभ के तुलना में बेसी करे लें।[12]

अन्य जावनर सभ में

बुर अइसन संरचना हवे जे ओह जानवर सभ में पावल जाले जे सभ में मादा अंदरूनी तरीका से गरभ धारण करे ले, जबकि कुछ वर्टीब्रेट सभ में ई काम शरीर के बहरें होला जैसे कि मेंघुचा सभ में, आ इनहन में बुर ना पावल जाला। बुर के आकृति अलग-अलग जानवर सभ में अलग-अलग होला। खेड़ी वाला आ मार्सूपी जानवर सभ में गर्भाशय से ले के मादा के शरीर के बाहरें ले बुर होला। मादा मार्सूपियल सभ में दू गो बुर होले आ साइड बाई साइड दू गो गर्भाशय से जुड़े लीं बाकी ई शरीर के बहरें खुले लीं एकही ओठदार मुहाना के रूप में, तिसरही बुर परमानेंट भा कुछ समय खाती हो सके ले जे ट्रांजीटरी कनाल कहाला आ बच्चा एह रास्ता से बहरें आवे ला (उदाहरण के रूप में कंगारू सभ में ई तीनों बुर होलीं)।[13] चित्तीदार हाइना (लकडबग्घा) में मादा बाहरी रूप से बुर के छेद वाली ना होखे लीं बलुक पेसाब, मैथुन आ बच्चा जनमावे के काम, तीनों क्लाइटोरिस के जरिये होखे ला।[14] The vagina of the female coyote contracts during copulation, forming a copulatory tie.[15]

इहो देखल जाय

संदर्भ

  1.  . "Vagina | Definition of Vagina by Merriam-Webster". Merriam-webster.com. पहुँचतिथी 2018-02-03.
  2. Mulachara. Bhāratīya Jñānapīṭha Prakāśana. 2002. पप. 285–. ISBN 978-81-263-0784-5.
  3. Shri Jaidev Vidhya Alankar Pranitya (2007). Charaksamhita Mahrishina Bhagvataniveshen Pranita Mahamunina Charken Pratisanskrita Uttro Bhag. Motilal Banarsidass Publishe. पप. 513–. ISBN 978-81-208-2305-1.
  4. Snell RS (2004). Clinical Anatomy: An Illustrated Review with Questions and Explanations. Lippincott Williams & Wilkins. प. 98. ISBN 978-0-7817-4316-7.CS1 maint: Uses authors parameter (link)
  5. Dutta DC (2014). DC Dutta's Textbook of Gynecology. JP Medical Ltd. पप. 2–7. ISBN 9351520684.CS1 maint: Uses authors parameter (link)
  6. Standring S, Borley NR, संपा.. (2008). Gray's anatomy : the anatomical basis of clinical practice (40th संपा.). London: Churchill Livingstone. प. 1281–4. ISBN 978-0-8089-2371-8.CS1 maint: Uses editors parameter (link)
  7. Ginger VA, Yang CC (2011). "Functional Anatomy of the Female Sex Organs". में Mulhall JP, Incrocci L, Goldstein I, Rosen R. Cancer and Sexual Health. Springer. पप. 13, 20–21. ISBN 1-60761-915-6.CS1 maint: Uses authors parameter (link) CS1 maint: Uses editors parameter (link)
  8. Ransons A (May 15, 2009). "Reproductive Choices". Health and Wellness for Life. Human Kinetics 10%. प. 221. ISBN 978-0-7360-6850-5. पहुँचतिथी July 30, 2013.CS1 maint: Uses authors parameter (link)
  9. Stone L (2002). New Directions in Anthropological Kinship. Rowman & Littlefield. प. 164. ISBN 058538424X.
  10. Hutcherson H (2003). What Your Mother Never Told You about Sex. Penguin. प. 8. ISBN 0399528539.
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  13. Hugh Tyndale-Biscoe; Marilyn Renfree (30 January 1987). Reproductive Physiology of Marsupials. Cambridge University Press. ISBN 978-0-521-33792-2.
  14. Szykman M, Van Horn RC, Engh AL, Boydston EE, Holekamp KE (2007). "Courtship and mating in free-living spotted hyenas" (PDF). Behaviour. 144 (7): 815–846. doi:10.1163/156853907781476418.
  15. Bekoff M, Diamond J (May 1976). "Precopulatory and Copulatory Behavior in Coyotes". Journal of Mammalogy. American Society of Mammalogists. 57 (2): 372–375. doi:10.2307/1379696. JSTOR 1379696.

बाहरी कड़ी