कोशिका (जीव बिज्ञान)

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कोशिका
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पियाज के कोशिका, कोशिका की चक्र की अलग-अलग अवस्था में
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एगो जीवकोशिका (बायें) आ एगो पौधकोशिका (दहिने)
पहिचानक
Identifiers
ग्रे'स p.35
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FMA 68646

शरीररचना बिज्ञान शब्दावली

शरीररचना बिज्ञान शब्दावली
एगो जीव-कोशिका के संरचना

कोशिका जीव शरीर के आधारभूत इकाई ह। कवनो प्रानी मे इहे कोशिका से जीव के अंग बिकाश होला आ वोही अंग समूह के शरीर कहल जाला। कोशिका बहुत प्रकार के उपकोशिका से निर्मित होला, जवना में माइटोकांड्रिया, नुक्लेउस, गोलगिबॉडीएस, आदि मुख्य तत्व होला।

कोशिका के प्रकार[संपादन]

जीव जगत में जीवन, पशु आ पौधा दू रूप में बाँटल गइल बा आ एही से कोशिका भी जीवकोशिका आ पौधकोशिका दू प्रकार के होला।

कोशिका के आधार प जीव के प्रकार[संपादन]

कोशिका के आधार प दू प्रकार के जीव होले। एककोशीय जीव जैसे अमीबा आ बहुकोशिकीय जीव, जैसे आदमी, काहें की आदमी के शरीर ढेर सारा कोशिका से बनल बा।

कोशिका के खोज इतिहास[संपादन]

1965 में सबसे पाहिले रॉबर्ट हुक नाव के बिज्ञानिक कोशिका के बारे में बतवले रहन। दुगो जर्मन जीव वैज्ञानिक एम श्लाइडनटी श्वान 1838-39 में कोशिका सिद्धान्त के स्थापना कइले रहन, जेकरा अनुसार सब जीव के निर्माण कोशिका से होला।

आर्यावर्त में कोशिका के जीवबीज के रूप में ऋषि चरक इ.स. 100 से 200 वर्ष पूर्व बर्णन कइले बाड़े। ऋषि चरक आ सुश्रुताचार्य इ.स. पूर्व 5000 में लिखल गईल अर्थववेद से ज्ञान प्राप्त करके तीन खंडमें आयुर्वेद प प्रबंध लिखले रहन। आज भी सूक्ष्म योग इहे अर्थववेद के कुछ सिद्धांत मन्त्र के शिवजी के द्वारा कुछ कीलित मन्त्र के साथ जोड़ के तंत्रबिद्या में आदमी के बाल आ नोह् से मोहन, मारनबशीकरण जइसन कठिन प्रयोग करे में आज भी सफल बा।इहे कारन से आज भी साधक, साधु, ऋषि आदि आपन दाढ़ी, बार, नोह साधना काल में ना काटत रहन।

कोशिका के संरचना आ प्रकार[संपादन]

जीवधारि में दू प्रकार के कोशकीय संगठन पावल जाला। एक प्रकार ह प्राककेन्द्रकी (प्रोकैरिओट) जवना के कोशिका केंद्रक झिल्लीबद्ध ना होला, जबकि सुकेन्द्रकी (यूकैरिओट) में एक स्पष्ट केंद्रक दुगो झिल्लि से घेरल रहेला। कोशिका के मुख्य अवयव ह -

कोशिका भित्ति

सभ जीवाणु आ हरियर-नीला काई के कोशिका एगो दृढ़ कोशिका भित्ति से बद्ध होला, जवन पौधकोशिका नियन लेकिन जीवकोशिका से अलग होला, जेकरा कारण से ओहनी के पौधकोशिका वर्ग में शामिल कइल जाला। 

जीवद्रव्य कला

सब जीवकोशिका में एगो अईसन झिल्ली होला जवना के आरपार कवनो रस द्रब्य त जा सकेला लेकिन ई देखे में ई एगो विभेदक नियन लउकेला जेकरा के जीवद्रव्यकला कहल जाला। ई कोशिका के बाहर आ भीतर के पदार्थ के  गति के नियंत्रण करेला। 

केंद्रक

सभ यूकैरियोट जीव में एक स्पष्ट केंद्रक (nucleus) होला। ई केंद्रक सभ कोशिकीय क्रिया के नियंत्रण केंद्र होखेला। 

हरित लवक

प्रकाश संश्लेषण क्रिया के केंद्र ह, यह से खाली  प्रकाश संश्लेषित पौधकोशिका में ही पावल जाला। 

सूत्रगुणिका

ई एगो दुहरा झिल्ली से तोपायिल कोशिका के अंग ह। ई ऊर्जा उत्पादन से सम्बंधित होला। एहसे एकरा के कोशिका के शक्ति केंद्र कहल जाला। 

राइबोजोम

राइबोजोम प्रोटीन संश्लेषण के केंद्र ह आ प्रोकैरिओट व यूकैरिओट दोनों कोशिकामें पावल जाला। 

लाइसोसोम

लाइसोसोम अपघटन एंजाइम के थैलि होलिस जवन बहुत सारा पदार्थ के अपघटित करेलिस।

तारक केंद्र

तारक केंद्र सभ जीवकोशिका में आ कुछ पौधकोशिका में भी पावल जाला। ई मुख्य रूप से धुरी तंत्र कोशिका विभाजन के समय नया उत्पन्न कोशिका आ जन्म देबे वाली कोशिका के बीच गुणसूत्र के अलग करे से संम्बन्धित या पक्ष्याभ (Celia) आदि के संगठन से सम्बंधित होला।

कोशिका विभाजन[संपादन]

हर जीव जवना में जनन लैंगिक क्रिया से होला ,जीव के जन्म ज़यगोट से होला, जेकरा बार-बार विभाजित भईला से शरीर के अनेक कोशिका बनेलिस। बे एह विभाजन के अतना प्रकार के ऊतक (tissues) आ अंग (organ) ना बन पायित। यी विभाजन दू चरण में पूरा होला । केंद्रक विभाजन जवना के सूत्रीविभाजन (mitosis) कहलजाला आ दोसरा चरण के कोशिका विभाजन (Cytokinesis) कहलजाला।

सूत्रीविभाजन (Mitosis)

सूत्रीविभाजन जीव के कायिक कोशिका (Somatic cells) में होला। यह से एकरा के कायिक कोशिका विभाजन भी कहल जाला। गुणसूत्र संख्या सूत्रीविभाजन के समय बराबर रहेला यानी नया उत्पन्न कोशिका (Daughter cells) के गुणसूत्र संख्या पैदा करे वाली कोशिका जतना रहेला, एहसे एकरा के समसूत्री विभाजन (equational division) भी कहल जा सकेला।

अद्र्धसूत्रीविभाजन (Meiosis)

सूत्रीविभाजन के उल्टा एकरा में गुणसूत्र संख्या कम हो के आधा रह जाला, काहेकि एकरामे कुल गुणसूत्र समजात गुणसूत्र (homologus chromosomes) अलग हो जाला न कि वोहनीके अद्र्धगुणसूत्र। नया उत्पन्न कोशिका में गुणसूत्र संख्या जन्म देबे वाली कोशिका से आधा होखला  के कारण इस विभाजन को न्यूनीकरण विभाजन (reductional division) भी कहल जाला।

इहो देखल जाय[संपादन]

संदर्भ[संपादन]

टेम्पलेट:जीव-बिज्ञान-आधार