सत्याग्रह

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पद्मासन में बइठल बहुत दुब्बर संत जेकर ऊपरी हिस्सा उघार बा आ पसली लउकत बा
श्रीमद राजचंद्र, एगो सम्मानित बिचारक, लेखक आ कवी, जे महात्मा गाँधी के आध्यात्मिक गुरु के रूप में जानल जालें, गाँधी में सत्य आ अहिंसा के लवर लगइने।[1]

सत्याग्रह, मने कि सत्य खातिर आग्रह, सचाई पर मजबूत तरीका से अटल रहल, या सच के ताकत[2] – एक किसिम के बिरोध आ प्रतिरोध के तरीका हऽ जेह में हिंसा के बिना, नागरिक प्रतिरोध कइल जाला। ई ह्रदय परिवर्तन के हथियार हवे।[3][4]

सत्याग्रह एगो साधन हवे, ई एगो अहिंसक साधन हऽ आ एकर आधार प्रेम आ सद्भावना हऽ, सत्याग्रह खातिर निर्भीकता जरूरी होला आ एह तरीका से एक किसिम के आत्मशक्ति हवे।[5]

संदर्भ[संपादन]

  1. Thomas Weber (2 December 2004). Gandhi as Disciple and Mentor. Cambridge University Press. पप. 34–36. ISBN 978-1-139-45657-9.
  2. "Official Website of the Gandhi Research Foundation". Gandhifoundation.net. 1939-03-25. पहुँचतिथी 2018-09-16. Truth (satya) implies love, and firmness (agraha) engenders and therefore serves as a synonym for force. I thus began to call the Indian movement Satyagraha, that is to say, the Force which is born of Truth and Love or nonviolence, and gave up the use of the phrase “passive resistance”, in connection with it, so much so that even in English writing we often avoided it and used instead the word “satyagraha” itself or some other equivalent English phrase.
  3. Dr. Vimal Agarwal (15 December 2016). Social : Political Philosophy: (E-Book). SBPD Publications. पप. 80–. ISBN 978-93-5167-009-4.
  4. Kishan Patanayak (2000). Vikalphin Nahin Hai Duniya. Rajkamal Prakashan Pvt Ltd. पप. 97–. ISBN 978-81-267-0023-3.
  5. Ashok Kumar Sharma. Prarambhik Samaj Evam Rajneeti Darshan. Motilal Banarsidass Publishe. पप. 309–. ISBN 978-81-208-3177-3.