धर्मांधता

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धर्मांधता अपना धरम-संप्रदाय में अंधा शरधा होखे के चलते दुसरे धरम के खातिर द्वेष के भावना हवे; अपना धरम आ मजहब के हित के नाँव पर अनुचित काम कइल धर्मांधता हवे।[1][2]

संदर्भ[संपादन करीं]

  1. वर्मा, श्याम बहादुर; वर्मा, धर्मेन्द्र (1 जनवरी 2010). प्रभात बृहत् हिंदी शब्दकोश (खंड - एक) (in Hindi). प्रभात प्रकाशन. p. 1311. ISBN 978-81-7315-769-1.
  2. अग्रवाल, गिरिजाशरण (2002). क्रांतिवीर सुभाष (in Hindi). डायमंड पाकेट बुक्स. p. 49. ISBN 978-81-7182-512-7. Retrieved 17 जनवरी 2022. धर्मांधता, सांस्कृतिक आत्मीयता के मार्ग में सबसे बड़ा काँटा है और इस धर्मांधता को दूर करने के लिए निरपेक्ष एवं वैज्ञानिक शिक्षा से उपयुक्त और कोई उपाय नहीं है। इस प्रकार की शिक्षा एक अन्य प्रकार से भी उपयोगी है। इससे आर्थिक चेतना के विकास में सहायता मिलती है। आर्थिक चेतना का प्रभात धर्मांघता के अंधकार का विनाशक है।