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श्रीलाल शुक्ल

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श्रीलाल शुक्ल
श्रीलाल शुक्ल
श्रीलाल शुक्ल
जनम31 दिसंबर 1925
अतरौली, लखनऊ
निधन28 अक्टूबर 2011
लखनऊ
पेशालेखक
भाषाहिंदी
राष्ट्रियताभारतीय
शिक्षा1947 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक
महतारी संस्थाइलाहाबाद विश्वविद्यालय
समय1947
बिधाकथा-साहित्य, व्यंग्य और निबंध
प्रमुख रचनाउपन्यास—सूनी घाटी का सूरज, अज्ञातवास, राग दरबारी, आदमी का जहर, सीमाएँ टूटती हैं, मकान, पहला पड़ाव, बिस्रामपुर का संत, बब्बर सिंह और उसके साथी, राग विराग।
कहानी—यह घर मेरा नहीं, सुरक्षा और अन्य कहानियाँ, इस उम्र में, दस प्रतिनिधि कहानियाँ।
जीवनसाथीगिरिजा देवी

श्रीलाल शुक्ल हिंदी भाषा में उपन्यास, कहानी, व्यंग्य, आलोचना, मोनोग्राफ बगैरह लिखले हवें। श्रीलाल शुक्ल के जनम लखनऊ के मोहनलालगंज क़स्बा के पास के गाँव अतरौली में 31 दिसंबर 1925 के भयल रहे। दो भाई अउर दो बहिन के बीच इनकर बचपन बीतल रहे। इनकर शुरूआती पढाई-लिखाई लखनऊ अउर कानपुर में भयल रहे । इनकर बाबूजी पंडित ब्रजकिशोर सुकुल के हिंदी, उर्दू अउर संस्कृत के कामचलाऊ जानकारी रहे। संस्कृत अउर हिंदी के शुरूआती संस्कार इंहा के अपन बाबूजी से मिलल रहे।[1]

इहो देखल जाय

[संपादन करीं]
  1. अखिलेश (2000). कालिया, रवीन्द्र (ed.). श्रीलाल शुक्ल की दुनिया. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन. p. 94.