भावना

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भावना मन क एगो हिस्सा हवे। आम भासा में मनुष्य कौनों समय जइसन महसूस करत रहेला आ ओकर मन के जवन स्थिति होले ओही के ओह समय के मनोभाव कहल जाला। एही मनोभाव सब के समूह के अलग-अलग परकार की भावना की रूप में समझल जा सकेला, जइसे खीस (क्रोध), आनंद, दुःख नियर चीज हमनी की मन के भावना होले।

सजीव मेँ दू प्रकार के इंद्री बतावल गईल बा पहिलका ज्ञान इंद्री आ दूसरा कर्म इंद्री। जीव के आँख ,नाक कान आ त्वचा के ज्ञान इंद्री कहल जाला। ज्ञान इंद्री के माध्यम से ही जीव के मस्तिष्क तक कवनो भी प्रकार के सन्देश पहुँचेला |स्नेसा पहुँचते ही दिमाग अपना पाहिले के अनुभव के आधार प कवनो प्रतिक्रिया खाती कर्म इन्द्रिय के संदेश भेजेला । एह शारीरिक परिवर्तन के ही भावना कहल जाला भावना मनोभाव, स्वभाव आदि से जुडल शब्द ह।

भावना के वर्गीकरण[संपादन]

दर्शन शास्त्र ,तर्कशास्त्र,मनोबिज्ञान ,जीवबिज्ञान आदि के अधयन आ अनुसन्धान के आधार प भावना  के वर्गीकरण के आधार निचे उल्लेख कइल बा

दर्शन शास्त्र के आधार प सनाम भावना बेनाम भावना
जीव बिज्ञान के आधार प सुभाविक भावना सनाम भावना
मनोबिज्ञान के आधार पर क्षणिक भावना दीर्घकालीन भावना
तर्क शास्त्र के आधार प जटिल भावना सुभाविक भावना

एह प्रकार देखल जाय त भावना के दू गो ही वर्गीकरण भइल बा। जीव बिज्ञान में मस्तिष्क के भावना उत्पन्न भइला के स्थान के आधार प वर्गीकरण कइल बा एमिग्डाला दिमाग के विशेष हिस्सा से उत्पन्न भावना के सुभाविक भावना कहल जाला आ प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स दिमाग के अगिला हिस्सा उत्पन्न भावना सनाम या संज्ञानात्मक भावना कहल जाला।भावना आ  भावना के परिणाम  के बीच संबंधित अंतर मुख्य व्यवहार आ  भावनात्मक अभिव्यक्ति ह अपना  भावनात्मक स्थिति के परिणाम के रूप में लोग क तरह के  अभिव्यक्ति करेले , जैसे रोयेले हँसेले लडेले  या नफरत करेले।  यदि केहु  बिना कवनो  संबंधित अभिव्यक्ति के भावना प्रकट करे त मानल जा सकेला  की भावना खाती अभिव्यक्ति की आवश्यकता न होला ।मनोबिज्ञान के आधार प भावना क्षणिक आ दीर्घ कालीन भावना मानल गईल बा जैसे अन्धेरा में रस्सी के सांप मानल ब्यक्तिगत भ्रम के साथ साथ क्षणिक भावना के भी उदहारण ह वोही तरह से केहु से शत्रुता के दीर्घ कालीन भावना मानल जाला।