बेरोजगारी

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अमेरिकी ब्यापक मंदी (1931) के दौरान शिकागो में एगो सूप किचन के बाहर खड़ा बेरोजगार लोग।

बेरोजगारी (Unemployment) अइसन दसा हऽ जब ब्यक्ति काम के खोज में होखे बाकी ओकरा के कौनों रोजगार ना मिले। कौनों अर्थब्यवस्था में जब अइसन ब्यापक स्तर पर होखे लागे तब ई एक तरह के समस्या के रूप में देखल जाला।

अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी के माप के बेरोजगारी दर कहल जाला आ एकर गणना करे खाती कुल बेरोजगार ब्यक्ति लोग के संख्या से कुल लेबर फोर्स (काम क सके लायक उमिर के जनसंख्या) के भाग दे के प्रतिशत निकाल लिहल जाला। मने कि कुल काम क सके लोग के केतना प्रतिशत लोग बेरोजगार बाटे, इहे बेरोजगारी दर होला। आमतौर पर जब अर्थब्यवस्था में मंदी के स्थिति होखे ले, बेरोजगारी दर अधिका होखे ले।[1] बिस्व मजदूर संगठन (आइएलओ) के एगो रपट के अनुसार साल 2012 में कुल 600 मिलियन लोग, मने कि पूरा दुनियाँ के लेबर फोर्स के 6% लोग बेरोजगार रहलें।[2]

बेरोजगारी कवना कारन से होला एह बात पर अर्थशास्त्री लोग में बहुत बिबाद बाटे।[3] क्लासिकल, नियो-क्लासिकलऑस्ट्रियन स्कूल के मत बा कि बजार के मैकेनिज्म बेरोजगारी के समस्या सोझुरावे में सक्षम होला। कीन्सियन अर्थशास्त्र ई माने ला कि बेरोजगारी के दसा चक्रीय रूप से आवे ले आ एकरा से निपटे में सरकार के हस्तक्षेप के जरूरत होला।

इहो देखल जाय[संपादन]

संदर्भ[संपादन]

  1. The Saylor Foundation. "Unemployment Rate." pp. 1 [1] Retrieved 20 June 2012
  2. "Global employment trends 2013" (PDF). बिस्व मजदूर संगठन. 21 जनवरी 2013. Unknown parameter |trans_title= ignored (मदद)
  3. E McGaughey, 'Will Robots Automate Your Job Away? Full Employment, Basic Income, and Economic Democracy' (2018) SSRN, part 2(1), on 'Three views on unemployment's causes'