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पृथिवी के अंदरूनी बनावट

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(पृथ्वी क आंतरिक संरचना से अनुप्रेषित)
पृथिवी क अंदरूनी बनावट देखावत एगो चित्र।

पृथिवी के अंदरूनी बनावट (अंग्रेजी: internal structure of the Earth; हिंदी: पृथिवी की आतंरिक संरचना) के अध्ययन एकरा के कई परत (लेयर) में बाँट के कइल जाला; जइसे पियाज क छिलका कई परत में होला। ए परतन के मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषता आ यांत्रिक (मैकेनिकल) विशेषता की आधार पर कइल जाला। मुख्य रूप से पृथिवी के अंतरतम के कुल तीन गो लेयर में बाँटल जाला - क्रस्ट, मैंटल आ कोर। पृथिवी क सबसे ऊपरी परत क्रस्ट एगो ठोस परत हवे, बीचा में मैंटल बहुत ढेर गाढ़ परत हवे, आ बाहरी कोर तरल अउरी भीतरी कोर ठोस अवस्था में हवे।

पृथिवी के एह आतंरिक संरचना की बारे में जानकारी क स्रोत को दू तरह क बाड़ें। डाइरेक्ट स्रोत, जइसे ज्वालामुखी से निकलल पदार्थन क अध्ययन, समुद्र्तलीय छेदन से मिलल आंकड़ा क अध्ययन वगैरह, जेवन कम गहराई ले का जानकारी उपलब्ध करा पावे लें। दूसरी ओर इनडाइरेक्ट स्रोत की रूप में भूकंपीय तरंगन क अध्ययन अउर अधिक गहराई की विशेषता की बारे में जानकारी देला।

पृथिवी की द्वारा दूसरी ब्रह्माण्डीय पिण्ड, जइसे चंद्रमा, पर लगावल जाये वाला गुरुत्वाकर्षण एकरी द्रव्यमान की गणना का स्रोत ह। पृथिवी की आयतन आ द्रव्यमान की अन्तर्सम्बन्ध से एकरी औसत घनत्व क गणना कइल जाले। ध्यान देवे वाला बाति बा कि खगोलशास्त्री पृथिवी की परिक्रमण कक्षा की आकार आ अन्य पिण्डन पर एकरी प्रभाव से एकरी गुरुत्वाकर्षण क गणना कर सके लें।

पृथिवी की अंदर अरीय धनत्व Preliminary Reference Earth Model (PREM) की अनुसार।[1]
(PREM) Preliminary Reference Earth Model की अनुसार पृथिवी की अन्दर गुरुत्वाकर्षण। [1] Comparison to approximations using constant and linear density for Earth's interior.
भूकम्पीय तरंग से पृथिवी की अंदर कि संरचना क अनुमान
पृथिवी की आतंरिक संरचना क चित्ररूप में निरूपण 1. महाद्वीपीय क्रस्ट – 2. महासागरीय क्रस्ट – 3. ऊपरी मैंटल – 4. निचला मैंटल – 5. बाह्य क्रोड – 6. आतंरिक क्रोड – A: मोहो – B: विशर्ट-गुट्टेनबर्ग असातत्य – C: बूलेन-लेहमैन असातत्य.

यांत्रिक लक्षणों की आधार पर पृथिवी के स्थलमण्डल, दुर्बलता मण्डल, मध्यवर्ती मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला। रासायनिक संरचना की आधार पर क्रस्ट, ऊपरी मैंटल, निचला मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला।

गहराई Layer
किलोमीटर मील
0–60 0–37 स्थलमण्डल (स्थानिक रूप से 5 और 200 किमी की बीच परिवर्तनशील)
0–35 0–22 … क्रस्ट (परिवर्तनशील 5 से 70 किमी की बीच)
35–60 22–37 … सबसे ऊपरी मैंटल
35–2,890 22–1,790 मैंटल
100–200 62–125 … दुर्बलता मण्डल (एस्थेनोस्फियर)
35–660 22–410 … ऊपरी मैंटल
660–2,890 410–1,790 … निचला मैंटल
2,890–5,150 1,790–3,160 बाहरी कोर
5,150–6,360 3,160–3,954 भीतरी कोर

पृथिवी की अंतरतम क ई परतदार संरचना भूकंपीय तरंगों की संचलन और उनहन की परावर्तनप्रत्यावर्तन पर आधारित ह जिनहन क अध्ययन भूकंपलेखी की आँकड़न से कइल जाला। भूकंप से पैदा भइल प्राथमिक अउरी द्वितीयक तरंगन के पृथिवी की अंदर स्नेल की नियम के अनुसार प्रत्यावर्तित हो के वक्राकार पथ पर गति होले। जब दू गो परतन की बीच में घनत्व अथवा रासायनिक संरचना क अचानक परिवर्तन होला तब तरंगन क कुछ ऊर्जा उहाँ से परावर्तित हो जाले। परतन की बीच की अइसन जगहन के असातत्य (Discontinuity) कहल जाला।

क्रस्ट पृथिवी क सबसे ऊपरी परत हवे जेवना क औसत गहराई 24 किमी तक ह आ ई गहराई 5 किमी से 70 किमी के बीच अलग-अलग जगह पर अलग-अलग मिलेला। समुद्रन की नीचे ई कम मोट समुद्री बेसाल्टिक क्रस्ट के रूप में मिलेला त महाद्वीपन की नीचे एकर बिस्तार ढेर गहराई ले पावल । सर्वाधिक गहराई पर्वतों के नीचे पावल जाला। क्रस्ट को भी तीन परतों में बाँटा जाता है - अवसादी परत, ग्रेनाइटिक परत और बेसाल्टिक परत। ग्रेनाइटिक और बेसाल्टिक परत के मध्य कोनार्ड असातत्य पावल जाला। ध्यातव्य है कि समुद्री क्रस्ट केवल बेसाल्ट और गैब्रो जैसी चट्टानों की बनी होती है जबकि अवसादी और ग्रेनाइटिक परतें महाद्वीपीय भागों में पावल जाला।

क्रस्ट की रचना में सर्वाधिक मात्रा आक्सीजन की है। एडवर्ड स्वेस ने इसे सियाल नाम दिया था क्योंकि यह सिलिका और एल्युमिनियम की बनल ह। ई सियाल महाद्वीपीय क्रस्ट के अवसादी और ग्रेनाइटिक परतन खातिर के लिये सही बा। कोनार्ड असातत्य की नीचे सीमा (सिलिका+मैग्नीशियम) क परत शुरू हो जाला। क्रस्ट आ मैंटल की बीच क सीमा मोहोरोविकिक असातत्य द्वारा बने ला जे के मोहो भी कहल जाला।

विश्व मानचित्र पर मोहो की गहराई

मैंटल का विस्तार मोहो से लेकर 2890 किमी की गहराई पर स्थित गुट्टेन्बर्ग असातत्य तक बाटे। मैंटल के इस निचली सीमा पर दाब ~140 GPa पावल जाला। मैंटल में संवहनीय धारा चले लीं जिनकी कारण स्थलमण्डल की प्लेटों में गति होला। मैंटल के दू भाग में बाँटल जाला ऊपरी मैंटल और निचला मैंटल और इनकी बीच की सीमा 710 किमी पर रेपिटी असातत्य की नाँव से जानल जाला। मैंटल का गाढ़ापन 1021 से 1024 Pa·s के बीच पाया जाता है जो गहराई पर निर्भर करता है। [2] तुलना के लिये ध्यातव्य है कि पानी का गाढ़ापन 10−3 Pa·s और कोलतार (pitch) 107 Pa·s होला।

क्रोड का विस्तार मैंटल की नीचे है आर्थात 2890 किमी से लेकर पृथिवी की केन्द्र तक। किन्तु यह भी दो परतों में विभक्त है - बाह्य कोर और आतंरिक कोर। बाह्य कोर तरल अवस्था में पाया जाला क्योंकि यह द्वितीयक भूकंपीय तरंगों (एस-तरंगों) को सोख लेता है। आतंरिक क्रोड की खोज 1936 में के. ई. बूलेन ने की थी। यह ठोस अवस्था में माना जाला। इन दोनों की बीच की सीमा को बूलेन-लेहमैन असातत्य कहल जाला।

आतंरिक क्रोड मुख्यतः लोहे का बना है जिसमें निकल की भी कुछ मात्रा है। चूँकि बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है और इसमें रेडियोधर्मी पदार्थो और विद्युत आवेशित कणों की कुछ मात्रा पावल जाला, जब इसके पदार्थ धारा के रूप में आतंरिक ठोस क्रोड का चक्कर लगते हैं तो चुंबकीय क्षेत्र बन जाला। पृथिवी के चुम्बकत्व या भूचुम्बकत्व की यह व्याख्या डाइनेमो सिद्धांत कहल जाला।

इतिहासी विकास

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पुरान मत

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  • एडवर्ड स्वेस की संकल्पना-
  • डाली का मत-
  • आर्थर होम्स की संकल्पना-
  • वान डर ग्राट की संकल्पना-

बूलेन क माडल

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अउरी पढल जाय

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  1. 1 2 A. M. Dziewonski, D. L. Anderson (1981). "Preliminary reference Earth model" (PDF). Physics of the Earth and Planetary Interiors. 25 (4): 297–356. doi:10.1016/0031-9201(81)90046-7. ISSN 0031-9201. PMC 411539. Archived from the original (PDF) on 2013-11-13. Retrieved 2014-05-29.
  2. Uwe Walzer, Roland Hendel, John Baumgardner Mantle Viscosity and the Thickness of the Convective Downwellings