हिमालय

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माउंट एवरेस्ट क हवाई जहाज से खींचल एगो फोटो
हिमालय कि एगो हिस्सा क अन्तरिक्ष से खींचल फोटो

हिमालय विश्व क सबसे ऊँचा परबत हवे जौन भारतीय उपमहाद्वीप की मैदान के मध्य एशियातिब्बत से अलग करेला। ई एगो विशाल परबत तन्त्र हवे जहाँ संसार का सबसे ढेर ऊँचाई वाला अधिकांश पहाड़ी चोटी मौजूद बाड़ी। ए हिमालयी पर्वत तन्त्र में करीब ११० गो अइसन पर्वत चोटी बाड़ी स जवन ७,३०० मी॰ (२४,००० फीट) से अधिका ऊँचाई वाली बाड़ी स।[१] विश्व क सभसे ऊँच परबत शिखर माउंट एवरेस्ट (नेपाली में: सगरमाथा) हिमालये परबत पर बाटे।

भूगर्भबिद्या की हिसाब से देखल जाय त हिमालय परबत सभसे नया परबतन में गिनल जाला। एकर बनला क इतिहास देखल जाय त अन्य पर्वतन के अपेक्षा ई काफी नया बा आ अभी भी विकसित हो रहल बा।

हिमालय पहाड़ 6 गो देशन के सीमा के छूएला। ई देश बाड़न: पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान चीनम्यांमार। हिमालय से निकले वाली नद्दिन क ए इलाका खातिर महत महत्व बा। हिमालय से निकले वाली मेन-मेन नदियन में शामिल बाड़ीं कुल - सिन्धु, सतलज, गंगा, सरजू, गण्डक, कोसी, ब्रह्मपुत्रयांग्त्सी नदी। हिमालय बिलकुल नया बा आ अभी बने के प्रक्रिया से ही गुजर रहल बा। हिमालय रेंज में १५ हजार से ज्यादा ग्लेशियर बाड़न स जिन्हन क बिस्तार १२ हजार वर्ग किलॊमीटर क्षेत्र पर बाटे।

बिस्तार[सम्पादन]

हिमालय परबत की बिस्तार क एगो आसान नक्शा

हिमालय क पच्छिम से पूरुब ओर बिस्तार सिन्धु नदी की घाटी से ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ ले लगभग अढ़ाई हज़ार किलोमीटर (२,५०० कि॰मी॰) आ उत्तर-दक्खिन के चौड़ाई करीब १६० से ४०० कि॰ मी॰ बाटे। हालाँकि एकर पूरबी आ पच्छिमी सीमा कौनो बहुत स्पष्ट रूप से परिभाषित नइखे। सिडनी बुराड नाँव क बिद्वान सिन्धु नदी की मोड़ के एकर पच्छिमी सीमा मनलें।

सबसे पच्छिम ओर क ऊँच परबत चोटी नंगा परबत बा आ पूरुब ओर क चोटी नामचा बरवा बा। एकर देशांतरीय बिस्तार कुल २२ डिग्री की आस्पास हवे। ई अपनी पुरा क्षैतिज बिस्तार में पूरुब से पच्छिम ओर के एगो तलवार की आकार में बा।

हिमालय की पहाड़ी इलाका क कुल क्षेत्रफल लगभग पाँच लाख वर्ग किलोमीटर (५,००,००० कि॰मी॰ बाटे। एकर औसत ऊँचाई समुन्द्र सतह से ६०० मी हवे। राजनैतिक रूप से देखल जाय त हिमालय पहाड़ छह गो देशन क सीमा छूएला। ई देश बाड़न - पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान चीनम्यांमार

परबत श्रेणी में बिभाजन[सम्पादन]

गंगा की मैदानी हिस्सा से अगर उत्तर की ओर बढ़ल जाय त क्रम से हिमालय क तीन गो परबत श्रेणी पड़ी

उप-हिमालय या शिवालिक[सम्पादन]

ई सभसे दक्खिन ओर स्थित बा आ सबसे नया बनल श्रेणी हवे। एके उप-हिमालय, बाहरी हिमालय आ शिवालिक कहल जाला। जम्मू में ए के जम्मू पहाड़ी कहल जाला, पंजाब में एकर बिस्तार पोटवार बेसिन से शुरू होला आ ई कुमायूँ आ नेपाल में होत कोसी नदी ले जाला। नैपाल में बुटवल क पहाड़ी एही का हिस्सा हवे। आसाम-अरुणाचल में डफला, मिरी, अभोर आ मिशमी क पहाड़ी एही क बिस्तार हई कुल। एकरी उत्तर में मध्य हिमालय से एके अलग करे वाला भ्रंश मेन फ्रन्टल फॉल्ट कहल जाला। एकर निर्माण मायोसीन काल से निचला प्लीस्टोसीन की बीच भइल रहे।

मध्य-हिमालय या लघु हिमालय[सम्पादन]

शिवालिक की उत्तर में मध्य हिमालय या लघु-हिमालय श्रेणी बा। एके जम्मू काश्मीर में पीरपंजाल, कुमायूँ में नाग टिब्बा आ नैपाल में महाभारत श्रेणी कहल जाला। धौलाधार, हालाँकि एकरी दक्खिन ओर बा लेकिन एही क हिस्सा मानल जाला। एके महान हिमालय से अलग करे वाला भ्रंश के मेन बाउण्ड्री फॉल्ट कहल जाला।

महान हिमालय या हिमाद्रि[सम्पादन]

अउरी उत्तर में दू गो अउरी श्रेणी बा जेवान तिब्बत क हिस्सा मानल जाला आ बहुत स्पष्ट रूप से लगातार श्रेणी की तरे ना बा फॉल्ट

टेथीज हिमालय[सम्पादन]

ट्रांस-हिमालय[सम्पादन]

क्षेत्रीय वर्गीकरण[सम्पादन]

पच्छिम से पूरुब की ओर

कश्मीर हिमालय[सम्पादन]

सिन्धु नदी से सतलज नदी ले

कुमायूँ हिमालय[सम्पादन]

सतलज से काली नदी ले

नेपाल हिमालय[सम्पादन]

काली नदी से तीस्ता नदी ले

आसाम हिमालय[सम्पादन]

तीस्ता से ब्रह्मपुत्र तक

हिमालय का महत्व[सम्पादन]

हिमालय पहाड़ बहुत तरह की प्राकृतिक, आर्थिक आ पर्यावरणीय कारणन से महत्वपूर्ण बाटे।[२][३] हिमालय पर्वत क ख़ाली एकरी आसपास की देशने खातिर ना बा बाकिर पुरा बिस्व खातिर बाटे काहें से की ई पहाड़ी हिस्सा ध्रुवीय क्षेत्रन की बाद पुरा पृथ्वी पर सबसे बड़हन बर्फ़ वाला क्षेत्र हवे आ एही कारण से ई पुरा बिस्व की जलवायु के प्रभावित करे ला। एकर महत्व निचे बतावल जात बा:

प्राकृतिक महत्व[सम्पादन]

  • उत्तरी भारत क मैदान जेवना के सिन्धु-गंगा-ब्रह्मपुत्र क मैदान भी कहल जाला, एही हिमालय से नद्दी कुल की द्वारा ले आइल गइल जलोढ़ माटी के जमा भइला से बनल हवे।
  • हिमालय क सबसे बड़ महत्व दक्षिणी एशिया की क्षेत्रन खातिर बा जहाँ की जलवायु खातिर ई पहाड़ बहुत महत्वपूर्ण नियंत्रक कारक क काम करे ला। हिमालय क विशाल पर्वत शृंखला कुल साइबेरियाई ठंढा वायुराशियन के रोक के भारतीय उपमहाद्वीप के जाड़ा में बहुत ढेर ठण्ढा होखला से रक्षा करेलीं।[४]
  • इहे पहाड़ मानसूनी हवा की रस्ता में रुकावट पैदा कइ के ए क्षेत्र में पर्वतीय वर्षा करावे ला जेवना पर ए इलाका क पर्यावरण आ अर्थव्यवस्था निर्भर बा।
  • हिमालय क उपस्थितिये अइसन कारण हवे जेवना की वजह से भारतीय उपमहाद्वीप की ओहू इलाकन में भी उष्ण कटिबंधी आ उपोष्ण कटिबंधी जलवायु पावल जाला जेवन इलाका कर्क रेखा की उत्तर ओर परे लन , नाहीं त ए इलाकन में त अक्षांशीय स्थिति की हिसाब से समशीतोष्ण कटिबंधी जलवायु मिले के चाही।
  • हिमालय क सालो भर बरफ से तोपाइल रहे वाला चोटी आ इहँवा पावल जाए वाला हिमनद सदावाहिनी नदियन क स्रोत हवें जिनहन से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, आ बांग्लादेश के महत्वपूर्ण जल संसाधन उपलब्ध होला।

आर्थिक महत्व[सम्पादन]

हिमाचल प्रदेश में खज्जियार मर्ग
  • वन संसाधन की रूप में शीतोष्ण कटिबंधीय मुलायम लकड़ी वाली बनस्पति आ शंक्वाकार जंगल इहवाँ पावल जाला जवना क काफ़ी आर्थिक महत्व हवे।
  • जंगल से अउरी कई तरह क चीज मिलेले जइसे किजड़ी-बूटी वाला पेड़-पौधा।
  • जानवरन की चरागाह खातिर हिमालय का महत्व हवे काहें से की एकरी घातिन में नर्म घास वाला इलाका मिलेला जिनहन के पश्चिमी हिमालय में मर्ग आ कुमायूँ क्षेत्र में बुग्याल अउरी पयाल कहल जाला।
    लेह क एगो सीन
  • बहुत तरह क खनिज पदार्थ, जइसे की चूना पत्थर, डोलोमाईट, स्लेट, सेन्हा नमक इत्यादि इहाँ पावल जाला।
  • फल की खेती खातिर। सेब, आडू, खुबानी आ तरह तरह क फल आ सूखा मेवा इहाँ पैदा होला।
  • सिंचाई की साधन क स्रोत की रूप में सदावाहिनी नदियों का जलस्रोत।
  • पर्यटन उद्योग आ बहुत गो पर्यटक केन्द्र खातिर।
  • पनबिजली उत्पादन खातिर।

पर्यावरण की हिसाब से महत्व[सम्पादन]

  • जैवविविधता क भण्डार की मामिला में हिमालय पर्वत बहुत महत्वपूर्ण बाटे। ए में कुछ जैव विविधता क्षेत्र फूलवन क घाटी आ अरुणाचल क पूर्वी हिमालय क्षेत्र बा।[५]
  • पूरा दुनिया कि जलवायु परहिमालय क प्रभाव पड़ेला।
  • हिमालय की हिमनदन के आज जलवायु परिवर्तन क प्रमुख संकेतक की रूप में भी देखल जात बा।

सामरिक महत्व[सम्पादन]

  • हिमालय क्षेत्र क दक्षिण एशिया खातिर हमेशा से सामरिक (लड़ाई से संबंधित) महत्व रहल बाटे काहें से कि ई एगो प्राकृतिक रुकावट हवे जेवन एकरी उत्तर ओर से सैनिक आक्रमण रोके ला।
  • वर्तमान समय में कश्मीरसियाचिन विवाद एही क्षेत्र में स्थित बा। चीन हिमालय की ऊँचाई वाला भाग से बनल प्राकृतिक सीमा रेखा, मैकमोहन लाइन के मान्यता देवे से इनकार करेला जेवना से ए क्षेत्र में बहुत तनाव बाटे आ भूराजनैतिक विवाद बाटे।
  • हिमालय की उच्च भूमि पर रहला कि कारण नेपाल आपन बफर स्टेट क इस्थिति सुरक्षित बनवले बा आ कबो गुलाम ना रहल।
  1. ऑनलाइन ब्रिटैनिका विश्वकोश
  2. माजिद हुसैन, हिमालय का महत्व भारत का भूगोल, (गूगल पुस्तक)
  3. हसन जावेद खान, भारत के पर्वत (इण्डिया वाटर पोर्टल)
  4. हसन जावेद खान, भारत के पर्वत (इण्डिया वाटर पोर्टल)
  5. हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR)