बलिया जिला

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ई पन्ना बलिया जिला खातिर बा, बलिया शहर खातिर देखल जाय बलिया टेम्पलेट:ज्ञानसंदूक जिला बलिया ज़िला (अंग्रेज़ी: Ballia District) गंगा नदी अउरी सरजू नदी की बिचा में बसल भारत देश की उत्तर प्रदेश राज्य के सबसे पुरुबी ज़िला हउए आ गंगा जी की तीरे बसल बलिया नाँव के परसिद्ध शहर ए ज़िला क मुख्यालय हउए। बलिया ज़िला आज़मगढ़ कमिश्नरी में आवेला आ ए ज़िला में छह गो तहसील बा – बलिया सदर, बांसडीह, रसड़ा, बैरिया, सिकंदरपुर अउरी बेल्थरा। रसड़ा ए ज़िला के दुसरा नंबर क सबसे बड क़स्बा हवे । बलिया ज़िला भिरगू बाबा के कुटी, ददरी मेला, चित्तू पांडे आ भारत की आज़ादी की लड़ाई में अपनी योगदान खातिर मशहूर बा। प्रसिद्द जननेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण आ भारत के पूर्व परधानमंत्री चंद्रशेखर जी एही बलिया ज़िला क मूल निवासी रहलीं सभे। बलिया ज़िला की लोगन क मुख्य काम खेती-किसानी बा लेकिन ए जिला में कुछ छोट-छोट उद्योगो धंधा क बिस्तार भईल बा। ए जिला में सिकंदरपुर गुलाब की खेती खातिर मशहूर हवे। मनियर में टिकुली (बिंदी) बनेला।

इतिहास[सम्पादन]

मुख्य लेख: बलिया ज़िला क इतिहास

किम्वदंती आ दंतकथा में बलिया में बड़े-बड़े तपस्वी ऋषि मुनि लोगन के आस्थान की रूप में वर्णन मिलेला। बलिया शहर से थोड़ी दूर पर कामेश्वर नाथ के मंदिर बा जहाँ कहल जाला कि भगवान शिव कामदेव के भस्म कइलें रहलीं। भिरगू बाबा के आश्रम बलिया में बा जहाँ महर्षि भृगु रहि के तपस्या कइलें। एकरी आलावा ऋषि अत्रि, पराशर आ वशिष्ठ के भी ए इलाका के यात्रा कइला के कहानी कहल जाला। बलिया के नामकरण की बारे में महर्षि वाल्मीकि से जुड़ाव के बात भी प्रचलन में बा।

महाजनपद काल में बलिया कोसल राज्य की अधीन रहे जेवना के अस्थापना पौराणिक कहानी की हिसाब से सूर्यवंशी क्षत्रिय लोग कइले रहल। चौथी सदी ई. पू. में नंद वंश की शासक महापद्मनंद के शासन अस्थापित भईल जेकरी बाद मौर्य साम्राज्य की अंतर्गत इहाँ बौद्ध स्तूप के अवशेष भी मिलल बा। मौर्य आ शुंग वंश की पतन की बाद कुषाण शासन अस्थापित भइल जेवना समय के सिक्का खैराडीह में मिलल बा ।[१]गुप्त काल में चीनी यात्री फा-हियान (४००-४११ ई.) काशी से पाटलीपुत्र (पटना) की यात्रा में बलिया की लगे कहीं एगो बौद्ध विहार होखला के बात लिखलें।।[२] हर्ष की काल में आइल यात्री ह्वेनसांग (६२९-६४४ ई.) अपनी यात्रा की दौरान बलिया की पास कहीं एगो बौद्ध मठ के वर्णन कइलें जेकर नाँव अविद्धाकर्ण रहे।[३]

परंपरागत रूप से मानल जाला कि सिकंदरपुर परगना के अस्थापना मुसलमानन द्वारा भइल आ कुतुबुद्दीन ऐबक ११९४ में इहाँ से गुजरत घरी एगो किला के अस्थापना कइलें जेवन आज क़ुतुबगंज की नाँव से जानल जाला।[४] जौनपुर सल्तनत के उठान की बाद लगभग १४७९ ई. ले बलिया जिला के हिस्सा जौनपुर की अधीन रहे।[५] एकरी बाद ई इलाका क्रम से बहलोल लोदी, सिकंदर लोदी (जे सिकंदरपुर परगना के अस्थापना कैलें), इब्राहिम लोदी की शासन में रहल आ ओकरी बाद बाबर मुग़ल शासन के अस्थापना कइलें तब १५२६ में बलिया के कुछ हिस्सा बंगाल के शासक नुसरत शाह की कब्ज़ा में रहला के प्रमाण मिलल बा। अकबर १५५९ में बलिया के ए अफ़गान शासकन से छोड़ा के आपनी राज्य में मिला लिह्लें। एकरी बाद बलिया के कुछ हिस्सा गाजीपुर सरकार में आ कुछ जौनपुर सरकार में रहते हुए सूबा इलाहाबाद में शामिल रहे। गाजीपुर सरकार में चार महाल रहे – बलिया, कोपाचित, लखनेसर आ गार्‘हा जबकि जौनपुर सरकार में खारिद, सिकंदरपुर आ भदांव। इलाहाबाद की संधि में मुग़ल शासन की अंत की साथ ई इलाका अंग्रेजी हुकूमत के हिस्सा बन गइल। दुआबा के इलाका बिहार सूबा की शाहाबाद में आवे।


भूगोल[सम्पादन]

लोकेशन आ बिस्तार[सम्पादन]

बलिया ज़िला एगो त्रिभुज जइसन आकार में गंगा नदी अउरी सरजू (घाघरा) जी की बीच में स्थित बाटे। गंगा आ सरजू नदियन की बीच के ए इलाका के दुआबा कहल जाला। एकर पूरबी सीमा गंगाजी आ सरजू जी की संगम से बनेला। बलिया जिला के सीमा उत्तर दिशा में देवरिया जिला, पूरुब ओर बिहार क छपरा जिला, दक्खिन ओर गाजीपुर जिला आ पच्छिम ओर मऊ ज़िला से सटल बा। जिला क बिस्तार उ.- उ. अक्षांश ले आ पू.-पू. देशांतर ले बा। ज़िला के कुल रक़बा २,९८१ वर्ग किलोमीटर बा।

जमीन[सम्पादन]

भौगोलिक दृष्टि से बलिया जिला मध्य गंगा मैदान की केन्द्र में बा। भूगर्भिक दृष्टि से जलोढ़ चट्टान की ऊपर बसल बा। दूनो नद्दिन की सहारे नया जलोढ़ आ बाकी हिस्सा में पुरान जलोढ़ चट्टान मिलेले। कहीं-कहीं कंकड़ के परत मिलेले जेवना क सड़क निर्माण में उपयोग होला आ एकर व्यापारिक खोदाई भी होला। जिला क सामान्य ढाल पच्छिम से पूरुब ओर बा आ छोटी सरजू आ अउरी कुल नाला एही दिशा में बहेलन। सुरहा ताल इहाँ के परसिद्ध ताल (झील) बा। गंगा नदी के पुराना मार्ग वाला इलाका जहाँ पेड़ कम मिलेंलें आ कुश आ मूँज की तरह के घास नाहीं त ख़ाली मैदान पावल जाला दियर कहल जाला। जमीन की अन्दर पानी क स्तर अभिन काफ़ी ऊँचा बा। मानसून से पाहिले की मौसम में भी पानी क लेवल जमीन से १० मीटर से नीचे ना जाला। एही से ए इलाका में कम गहराई पर भी इनार कुइयाँ आ ट्यूबवेल में काम भर के पानी हमेशा मिलल करेला।

नदी-नाला आ ताल[सम्पादन]

गंगा नदी सरजू नदी छोटी सरजू बसनही नदी बुढ़नी नदी कटहर नाला सुरहा ताल गार’हा ताल

जलवायु[सम्पादन]

बलिया नम उपोष्ण जलवायु की प्रकार में आवेला। कोपेन की बर्गीकरण की हिसाब से Cwg प्रकार के जलवायु पावल जाला जे में जाड़ा, गर्मी, वसंत आ बरसात चार गो ऋतु होलीं। बरखा की ऋतु से ठीक पाहिले भीषण गर्मी आ शुष्क हवा ए जलवायु प्रकार के बिसेसता बा। सबसे गरम महीना मई-जून होला आ १५ जून की बाद मानसून के बारिश शुरू होले। पूरा मई में आ जून की पहिला पाख में गरम हवा लूहि बहेले आ मानसून से पहिले आन्ही-अंधड़ की साथ झंझावाती बरखा होला। जनवरी क महीन सबसे ठंढा होला आ शीतलहरी चलला पर कौनो-कौनो दिन न्यूनतम तापमान ५ डिग्री सेल्सियस से नीचे चल जाला। लूहि आ शीतलहरी छोड़ि के बाकी समय मौसम सुहावन रहेला।

ज़िला में बरखा के रिकार्ड चार गो अस्थानन खातिर मौजूद बा। एकरी आधार पर औसत सालाना बरखा १०१३.१ मिलीमीटर बतावल जाला आ साल में औसतन ५० दिन बरखा वाला होला जहिया कम से कम २.५ मिलीमीटर या अधिका बरखा होला। हालाँकि ई औसत पिछला कुछ साल में कम भइल बा। बरखा ऋतु के आरम्भ १५ जून से होला आ अक्टूबर ले चलेला। मानसून की अइला से पाहिले अप्रैल मई में झंझावाती बरखा होला जेवन तेज आन्ही की साथ दुपहरिया बाद नाहीं त राति में आवेला। सबसे ढेर बरखा जुलाई अगस्त में (सावन-भादों) में होले। मानसूनी चक्रवात क बादर कबो-कबो भण्डार कोन (उत्तर-पच्छिम) की ओर से उठेलें आ हवा की साथ बरखा होला। अक्टूबर में हथिया नछत्तर में तेज हवा कि झकोरा की साथ बरखा होला जेवना के हथिया के झाकड़ि कहल जाला। जाड़ा के बरखा भूमध्य सागर की ओर से उठे वाला चक्रवात पच्छिमी विक्षोभ से होले आ रबी की फसल खातिर बहुत फ़ायदा करेले। बलिया ज़िला में अब ले क २४ घंटा में सबसे अधिक बरखा क रेकार्ड ३२० मिलीमीटर बा जेवन रसड़ा में ३ अक्टूबर १८८४ के रेकार्ड कइल गइल रहे।

बदरी वाला मौसम बरसात में होला आ जाड़ा में पच्छिमी विक्षोभ की सामय होला। जाड़ा में कुहासा पड़ेला आ कौनो कौनो दिन घाम ना होला। तेज हवा खाली लूहि की समय चलेला। पुरुआ हवा चलला पर वातावरण में नमी के मात्रा बढ़ि जाला।


वनस्पति[सम्पादन]

ज़िला में कहीं घन जंगल अब ना बचल बा आ प्राकृतिक रूप से पावल जाए वाला बन अब समाप्त हो गईल बाड़े। कहीं-कहीं छोट टुकड़ा की रूप में बन चालीस-पचास साल पाहिले ले रहलन लेकिन अब इहो खतम हो गइल बा। बनस्पति में आम, महुआ, नीबि, बरगद, पीपर, पाकड़, गूलरि, इमिली, आ अर्जुन क पेड़ मिलेलें। नया वृक्षारोपण में ज्यादातर पेड़ सफ़ेदा, बिलायती बबुर, आ शिरिष के लगावल गइल बा। ऐतिहासिक रूप से ए इलाका में पलाश के पेड़ बहुत पावल जाय जेवन अब बहुत कम हो गईल बा। इमिली, बीजू आम, शीशम (सीसो), महुआ आ देसी बबूल के पेड़ तेजी से खतम होत जात बा।

पशु-पक्षी[सम्पादन]

जंगली पशु में अब खाली नीलगाय पावल जालीन आ कहीं-कहीं लोमड़ी आ खेखड़ि मिलेलीं। गौरैया, मैना, कउआ, भुजइठा, महोख, कोयल, बसंता, पत्रिंगा, नीलकंठ, चील्ह, बाजचोंचा पक्षी ए इलाका में पावल जाला। गिद्ध अब लगभग खतम हो गइल बा। साँप की प्रजाति में गेहुअन, करइत, धामिन आ डोड़हा मिलेलें।

जनसंख्या[सम्पादन]

२०११ की जनगणना की हिसाब से बलिया ज़िला के कुल जनसंख्या ३२,३९,७७४ बा जेवन २००१ की जनगणना में २७,५२,६२० रहे आ जनसंख्या क घनत्व १०८६.८ जन पर वर्ग किलोमीटर बाटे जेवन २००१ में ९२६ रहे।।[६] जनसंख्या बृद्धि के दर १९९१ से २००१ की बीच में २२.०७% रहे जेवन २००१ से २०११ की बीच में घट के १७.३१% रहि गइल बा।[७] लिंगानुपात (मर्दाना-जनना अनुपात) २०११ में ९३७ हो गइल बा जेवन २०११ में ९५३ रहे। साक्षरता के दर २००१ में ५७.८६ % रहे जेवन २०११ में बढ़ के ७०.९४% हो गइल बा। [८]

आर्थिक जीवन[सम्पादन]

खेती-किसानी[सम्पादन]

उद्योग धंधा[सम्पादन]

ब्यापार[सम्पादन]

संस्कृति[सम्पादन]

बलिया ज़िला के सबसे ज्यादा बोलल जाये वाली भाषा भोजपुरी हउवे। डॉ. ग्रियर्सन बलिया की भोजपुरी के स्टैण्डर्ड भोजपुरी की अंतर्गत रखले बाड़ीं। सरकारी कामकाज क भाषा हिंदी हवे आ कुछ मात्रा में उर्दू भाषा के प्रचलन भी बा।

तेवहार-मेला[सम्पादन]

पूरा भारत में सामान्य रूप से मनावल जाये वाला त्यौहारन की अलावा बलिया क सबसे परसिद्ध मेला हवे ददरी मेलासोनाडीह मेला


देखे लायक अस्थान[सम्पादन]


परसिद्ध लोग[सम्पादन]

मुख्य लेख: बलिया ज़िला क परसिद्ध लोग

अउरी पढ़ल जाय[सम्पादन]

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. Neville, H. R. : Imperial Gazetteer of India, pp. 166, as cited in Ballia Gazetteer, 1979, Gov. Press Allahabad. pp. 18
  2. Neville, H. R. : Imperial Gazetteer of India, pp. 166, as cited in Ballia Gazetteer, 1979, Gov. Press Allahabad. pp. 18
  3. Neville, H. R. : Imperial Gazetteer of India, pp. 166, as cited in Ballia Gazetteer, 1979, Gov. Press Allahabad. pp. 19
  4. Neville, H. R. : Ballia:A Gazetteer, Vol. XXX, Allahabad, 1907, pp.141; as cited in Ballia Gazetteer, 1979, Gov. Press Allahabad. pp. 20
  5. Neville, H. R. : Imperial Gazetteer of India, pp. 166, as cited in Ballia Gazetteer, 1979, Gov. Press Allahabad. pp. 21
  6. भारत क जनगणना २०११|http://www.census2011.co.in/census/district/564-ballia.html
  7. http://www.census2011.co.in/census/district/564-ballia.html%7C जनगणना २०११
  8. http://www.census2011.co.in/census/district/564-ballia.html%7C जनगणना २०११

बाहरी कड़ी[सम्पादन]