हजारी प्रसाद द्विवेदी

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आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी हिंदी, संस्कृत आ भारतीय इतिहास अउरी संस्कृति के बहुत बड विद्वान रहलीं आ आधुनिक युग क एगो मौलिक निबंधकार, उत्कृष्ट समालोचक आ सांस्कृतिक विचारधारा क बहुते नामी उपन्यासकार[१] रहलीं। द्विवेदी जी क जनम 19 अगस्त 1907 ई में बलिया जिला की दुबे-का-छपरा नाँव की गाँव में भइल रहे। उहाँ के परिवार ज्योतिष विद्या खातिर बहुत परसिद्ध रहे आ उहाँ के पिता पं. अनमोल द्विवेदी जी संस्कृत क प्रकांड पंडित रहलीं।

द्विवेदी जी क प्रारंभिक शिक्षा गांव की इस्कूल में भइल आ उहंवें से उहाँ क मिडिल क इम्तिहान पास कइलीं। एकरी बाद उहाँ क इंटर क परीक्षा आ ज्योतिष विषय में आचार्य क परीक्षा पास कइलीं। पढ़ाई लिखाई खतम क के द्विवेदी जी शांतिनिकेतन चलि गइलीं आ कई बरिस ले उहाँ हिन्दी क पठन-पाठन कइलीं । शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर आ आचार्य क्षितिमोहन सेन की परभाव से साहित्य क गहन अध्ययन और रचना शुरू कइलीं।

द्विवेदी जी का व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली आ उहाँ क स्वभाव बड़ा सरल आ उदार रहे। पंडित जी हिन्दी, अंग्रेज़ी, संस्कृतबंगाली भाषा क विद्वान रहलीं। भक्तिकाल की साहित्य का उहाँ के बहुत नीमन आ बिस्तार से ज्ञान ज्ञान रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय उहाँ के डी.लिट. की उपाधि दे के विशेष सम्मान कइलस। उहाँ क बी.एच.यू. में हिन्दी पढ़ावलीं आ उहाँ के भारत सरकार १९५७ में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित कइलस।

बाणभट्ट की आत्मकथा नाँव क उपन्यास पंडित जी क सबसे परसिद्ध आ महत्व वाली रचना मानल जाले।[२]

रचना[सम्पादन]

द्विवेदी जी क प्रमुख रचना नीचे दिहल जात बा -

आलोचना/साहित्‍येतिहास[सम्पादन]

निबंध संग्रह[सम्पादन]

उपन्‍यास[सम्पादन]

अन्‍य[सम्पादन]

सन्दर्भ[सम्पादन]

  1. भगवती चरण मिश्र - हिन्दी के चर्चित उपन्यासकार पृष्ठ १३४।
  2. भगवती चरण मिश्र - हिन्दी के चर्चित उपन्यासकार पृष्ठ १३२।

बाहरी कड़ी[सम्पादन]