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लइकी

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(लड़िकी से अनुप्रेषित)
लइकी

लइकी, लड़की, लड़िकी या लईकिनी, (अंग्रेजी: girl) मनुष्य प्रजाति की कम उमिर की मादा (फीमेल) के कहल जाला। पुरहर उमिर के (वयस्क भा एडल्ट) हो जाये के बाद औरत कहल जाला। हालाँकि, दुलार से बबुनी, बुची आ बुचिया बोलावल जा सके ला — खास क के बिटिया (मादा संतान) के अरथ में। अंग्रेजी के संगत शब्द गर्ल के भी कई सेंस में इस्तेमाल होला — जइसे कि जवान औरत, बेटी आ गर्लफेंड के खाती, बाकी एहू के सभसे पहिला आ मुख्य अर्थ उहे ह जे लइकी के होला।

कवनो समाज में लइकिनी सभ के स्थिति आ उनकरा साथे कइल जाए वाला बेहवार आमतौर पर ओह समाज आ संस्कृति में औरतन के स्थिति से गहिराई से जुड़ल होखे ला। जवन समाजन में औरतन के सामाजिक स्थान कमतर होखे भा रहल होखे, ओहिजा कई बेर लइकी सभ के माता-पिता द्वारा कम चाहल जाली, आ समाजो उनकर शिक्षा, सेहत आ बिकास पर तुलनात्मक रूप से कम निवेश करेला। लइका आ लइकी के पालन-पोषण में अंतर समाज दर समाज बदलत रहे ला। कहीं ई अंतर बहुत कम होखेला, त कहीं दुनो के परवरिश, जिम्मेदारी, अवसर आ सामाजिक अपेक्षा सभ में बहुत अधिक अंतर देखे के मिलेला।

लइका आ लइकी के आपसी मेल-जोल के नियम भी संस्कृति के अनुसार अलग-अलग हो सकेला। कुछ समाजन में दुनो लिंग के लोग लगभग सभे उमिर में एक साथ रहे ला आ गतिविधियन में भाग लेला, जबकि कुछ समाजन में उमिर बढ़ला के साथे लिंग-आधारित अलगाव (सेक्स सेग्रिगेशन) के प्रथा देखे के मिलेला, जहाँ लइका आ लइकी के सामाजिक संपर्क पर विभिन्न प्रकार के रोकटोक आ प्रतिबंध लगावल जाला।

जनसंख्या अध्ययन

[संपादन करीं]

जनम के समय मानव लिंग अनुपात में भिन्नता के संभावित कारणन के बारे में विद्वान लोग के बीच अबहियों स्पष्ट सहमति नइखे आ एह विषय पर भरपूर मतभेद मौजूद बा। जेवना देशन में जन्म के समय लिंग अनुपात 108 भा एकरा से बेसी होखे, ओहिजा अक्सर ई मानल जाला कि लिंग चयन (सेक्स सिलेक्शन) के प्रथा प्रचलित हो सके ले। हालाँकि, जन्म के समय लिंग अनुपात में कुछ विचलन प्राकृतिक कारणन से भी हो सकेला।

तब्बो पर, लइकी सभ के प्रति भेदभाव के कई रूप—जइसे लिंग-चुनाव आधारित गर्भपात, कन्या शिशु हत्या, लइकी के त्याग देहल, भा परिवार के संसाधन बाँटे के समय बेटा के प्राथमिकता देहल—दक्षिण एशिया, पूर्वी एशियाकाकेशस क्षेत्र के कुछ हिस्सन में बहुत देखल आ दर्ज कइल गइल बाटे। ई समस्या बिसेस रूप से चीन, भारत आ पाकिस्तान में चिंता के विषय रहल बा। एह समाजन में औरतन के अपेक्षाकृत निचला दर्जा के सामाजिक स्थिति के कारण कई बेर लइकी सभ के प्रति पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण विकसित हो जाला।