हिन्दू पतरा

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राजस्थान से मिलल एगो भारतीय (हिन्दू) कैलेण्डर (१८७१-७२ ई॰)

हिन्दू पतरा या हिन्दू पंचांग भारत में प्रयोग होखे वाला कैलेण्डरपंचांग हवे। पत्रा चाहे पंचांग से तिथि, वार, नक्षत्र, योग आ करण क हिसाब रक्खल जाला। पाँच चीज क गणना कइले की कारन एके पञ्चांग कहल जाला। हिन्दू पंचांग में शक संवतविक्रमी संवत क प्रयोग साल की गिनती खातिर होला।

हिन्दू पंचांग सूर्यचंद्रमा दूनो पर आधारित गणना करेला।

सौर मास[सम्पादन]

सूर्य की आधार पर गणना कइल जाला। पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगावेले एही से सूर्य आकाश में कौनो-न-कौनो राशि में उगत मालूम होला। बारह गो राशि आ २७ गो नक्षत्र में जवना में सूर्य जब होला ओही हिसाब से सौर मास क नाँव हो जाला। बारह गो सौर मास होला। एक महीना से दुसरा महीन में बदलाव क भी दू गो आधार बा। सायन मास अंग्रेजी कैलेण्डर की हिसाब से २१-२२-२३ तारीख के बदलेला आ निरयन सौर मास १३-१४ तारीख़ के।

साल के दू गो अयन में बाँटल जाला। उत्तरायण आ दक्षिणायन। जब सूर्य मकर रेखा से उत्तर की ओर गति शुरू करेल (खिचड़ी की बाद) त उत्तरायण शुरू होला। सतुआन की बाद जब सूर्य कर्क रेखा से दक्षिण की ओर जाला तब दक्षिणायन शुरू होला।

सायन आ निरयन की हिसाब से दू गो कर्क संक्रांति आ दू गो मकर संक्राति हो जाले।

चन्द्रमास[सम्पादन]

हिन्दू महीना चंद्रमा की कला पर आधारित होला आ एक पुर्नवासी (पूरणमासी या पूर्णिमा) से आगिला पुर्नवासी ले होला। महीना के दू गो पाख में बाँटल जाला। जवना हिस्सा में चन्द्रमा बढ़त रहे ला (अमवसा से पुर्नवासी ले) ओके अँजोरिया चाहे शुक्लपक्ष कहल जाला। जेवना हिस्सा में चंद्रमा घटे लागे ला (पुर्नवासी कि बाद से अमावसा ले) ओके अन्हरिया या कृष्णपक्ष कहल जाला। एगो पाख १३-१५ दिन क होला।

पाख में एक्कम, दुइज, तीज, चउथ, पंचिमी, छठ, सत्तिमी, अष्टिमि, नवमी, दसमी, एकादशी, दुआदसी (द्वादशी), तेरस, चतुर्दशी, आ पुर्नवासी/अमौसा (अमावस्या) तिथि होले। एगो तिथि क समय ओतना होला जेतना देर में चंद्रमा की गति की कारन, चंद्रमा आ सूर्य की बिचा में बारह अंश बीत जाय। चंद्रमा पृथ्वी क चक्कर दीर्घवृत्तीय रास्ता पर लगावेला एही से कबो ई १२ अंश क दूरी जल्दी तय हो जाले आ कबो ढेर समय लागेला आ तिथि छोट-बड़ होत रहेलिन। अमावसा कि अंत आ अँजोरिया की एक्कम क शुरुआत होले जब सूर्य आ चंद्रमा की बिचा में शून्य अंश क कोण बनेला। पुर्नवासी के ई कोण १८० अंश हो जाला मने पृथ्वी सूर्य आ चंद्रमा की बिचा में होले।

महीना क नाँव[सम्पादन]

हिन्दू महीना क नाँव क्रम से चइत, बइसाख, जेठ, असाढ़, सावन, भादो, कुआर, कातिक, अगहन, पूस, माघ, आ फागुन होला।

महीनन के नाम संस्कृत में नाँव पूर्णिमा की दिन चन्द्रमा ए नक्षत्र में होला
चइत चैत्र चित्रा
बइसाख वैशाख विशाखा
जेठ ज्येष्ठ ज्येष्ठा
असाढ़ आषाढ़ पूर्वाषाढ़
सावन श्रावण श्रवण
भादो भाद्रपद पूर्वभाद्र
कुआर आश्विन रेवती(अश्विन)
कातिक कार्तिक कृतिका
अगहन मार्गशीर्ष मृगशिरा (अग्रहायण)
पूस पौष पुष्य
माघ माघ मघा
फागुन फाल्गुन उत्तर फाल्गुन

बाहरी कड़ी[सम्पादन]

संदर्भ[सम्पादन]