परमात्मा हमार खातिर इ महान जोगी के भेजले बरन । भगवान श्री कृष्ण गीता में कहले बरन कि जब-जब धर्म के हानि अऊर अधर्म के वृद्धि होईला तब-तब हम साकार रूप में प्रगट होइ लीं । योगविद्या में सिद्ध,धर्मशास्त्रों में परकांड विद्वान,अऊर ब्रह्मविद्या में अग्रगण्य कोई महान सन्त भारतभूमि में अवतरित होईल बरन। जब संत पृथ्वी पर जन्म लेवें लन, तब निशिचत हीं पृथ्वी पर खुशी अऊर हरियाली छा जाय ला। बादल समय पर वर्षा करे लगे लन अऊर पृथ्वी धनधान्य से भर जाई लीं। नदियों में नीमन जल अपने आप सब ओर बहे लग जायला। जनसमुदाय,पशु-पक्षी अऊर सब जानवर भी प्रसन्नता से रहे लग जायलन । महान आत्माओं के जन्म के समय वृक्ष फल देवे लग जायलन। संसार में ऍसन लगे ला मानों कलियुग में त्रेतायुग आ गईल बा ।
जन्म और बाल्यकाल [सम्पादन]
भारत के बटवारा के पहले सिंध प्रान्त अपन देश में ही आत रहे जेह् में नवाबशाह नामक जिले में बेराणी गौंव बा। उ गौंव में विख्यात,सनातन धर्म के प्यार करे वालें,कुशल अऊर रतन रूप सेठ थाऊमल रहत रहन जिनकर धर्मपत्नी महँगीबा रहीं। इ परिवार गौ-ब़ाह्मण के सेवा करे वाला सत्यभाषी एवं गृह्स्थ धर्म अऊर अपन कुल धर्म के पालन करे में हमेंशा आगे रहे। ऐहि परिवार में विक्रम संवत १९९८ के चैत महीने के छठवें दिन(रविवार)दिव्य आसुमल जन्म लेईं लन। हृष्टपुष्ट, कुलदीपक, गौरवर्ण सुन्दर बालक के अपन अँखियन से देख माता और पिता बहुत खुश होई लीं।