पृथ्वी क आंतरिक संरचना

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पृथ्वी क आतंरिक संरचना शल्कीय, मने कि परतदार, बाटे जइसे पियाज क छिलका कई परत में होला। ए परतन क मोटाई का सीमांकन रासायनिक विशेषता अथवा यांत्रिक विशेषता की आधार पर कइल जाला। पृथ्वी क सबसे ऊपरी परत भूपर्पटी एगो ठोस परत हवे, मध्यवर्ती मैंटल बहुत ढेर गाढ़ परत हवे, आ बाहरी क्रोड तरल अउरी आतंरिक क्रोड ठोस अवस्था में हवे।

पृथ्वी की आतंरिक संरचना की बारे में जानकारी क स्रोत को दू तरह क बाड़ें । प्रत्यक्ष स्रोत, जइसे ज्वालामुखी से निकलल पदार्थन क अध्ययन, समुद्र्तलीय छेदन से मिलल आंकड़ा क अध्ययन इत्यादि, जेवन कम गहराई ले का जानकारी उपलब्ध करा पावे लें। दूसरी ओर अप्रत्यक्ष स्रोत की रूप में भूकम्पीय तरंगन क अध्ययन अउर अधिक गहराई की विशेषता की बारे में जानकारी देला।

पृथ्वी क आतंरिक संरचना

पूर्वपीठिका[सम्पादन]

पृथ्वी की द्वारा दूसरी ब्रह्माण्डीय पिण्ड, जइसे चंद्रमा, पर लगावल जाये वाला गुरुत्वाकर्षण एकरी द्रव्यमान की गणना का स्रोत ह। पृथ्वी की आयतन आ द्रव्यमान की अन्तर्सम्बन्ध से एकरी औसत घनत्व क गणना कइल जाले। ध्यान देवे वाला बाति बा कि खगोलशास्त्री पृथ्वी की परिक्रमण कक्षा की आकार आ अन्य पिण्डन पर एकरी प्रभाव से एकरी गुरुत्वाकर्षण क गणना कर सके लें।

संरचना[सम्पादन]

पृथ्वी की अंदर अरीय धनत्व Preliminary Reference Earth Model (PREM) की अनुसार।[१]
(PREM) Preliminary Reference Earth Model की अनुसार पृथ्वी की अन्दर गुरुत्वाकर्षण। [१] Comparison to approximations using constant and linear density for Earth's interior.
पृथ्वी की आतंरिक संरचना क चित्ररूप में निरूपण 1. महाद्वीपीय भूपर्पटी – 2. महासागरीय भूपर्पटी – 3. ऊपरी मैंटल – 4. निचला मैंटल – 5. बाह्य क्रोड – 6. आतंरिक क्रोड – A: मोहो – B: विशर्ट-गुट्टेनबर्ग असातत्य – C: बूलेन-लेहमैन असातत्य.

यांत्रिक लक्षणों की आधार पर पृथ्वी के स्थलमण्डल, दुर्बलता मण्डल, मध्यवर्ती मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला। रासायनिक संरचना की आधार पर भूपर्पटी, ऊपरी मैंटल, निचला मैंटल, बाह्य क्रोड और आतंरिक क्रोड में बाँटल जाला।

गहराई Layer
किलोमीटर मील
0–60 0–37 स्थलमण्डल (स्थानिक रूप से ५ और २०० किमी की बीच परिवर्तनशील)
0–35 0–22 … भूपर्पटी (परिवर्तनशील ५ से ७० किमी की बीच)
35–60 22–37 … सबसे ऊपरी मैंटल
35–2,890 22–1,790 मैंटल
100–200 62–125 … दुर्बलता मण्डल (एस्थेनोस्फियर)
35–660 22–410 … ऊपरी मैंटल
660–2,890 410–1,790 … निचला मैंटल
2,890–5,150 1,790–3,160 बाह्य क्रोड
5,150–6,360 3,160–3,954 आतंरिक क्रोड

पृथ्वी की अंतरतम क ई परतदार संरचना भूकंपीय तरंगों की संचलन और उनहन की परावर्तनप्रत्यावर्तन पर आधारित ह जिन्हन क अध्ययन भूकंपलेखी की आँकड़न से कइल जाला। भूकंप से पैदा भइल प्राथमिक अउरी द्वितीयक तरंगन के पृथ्वी की अंदर स्नेल की नियम के अनुसार प्रत्यावर्तित हो के वक्राकार पथ पर गति होले। जब दू गो परतन की बीच में घनत्व अथवा रासायनिक संरचना क अचानक परिवर्तन होला तब तरंगन क कुछ ऊर्जा उहाँ से परावर्तित हो जाले। परतन की बीच की अइसन जगहन के असातत्य (Discontinuity) कहल जाला।


भूपर्पटी[सम्पादन]

भूपर्पटी पृथ्वी क सबसे ऊपरी परत हवे जेवना क औसत गहराई २४ किमी तक ह आ ई गहराई ५ किमी से ७० किमी के बीच अलग-अलग जगह पर अलग-अलग मिलेला। समुद्रन की नीचे ई कम मोट समुद्री बेसाल्टिक भूपर्पटी के रूप में मिलेला त महाद्वीपन की नीचे एकर बिस्तार ढेर गहराई ले पावल । सर्वाधिक गहराई पर्वतों के नीचे पावल जाला। भूपर्पटी को भी तीन परतों में बाँटा जाता है - अवसादी परत, ग्रेनाइटिक परत और बेसाल्टिक परत। ग्रेनाइटिक और बेसाल्टिक परत के मध्य कोनार्ड असातत्य पावल जाला। ध्यातव्य है कि समुद्री भूपर्पटी केवल बेसाल्ट और गैब्रो जैसी चट्टानों की बनी होती है जबकि अवसादी और ग्रेनाइटिक परतें महाद्वीपीय भागों में पावल जाला।

भूपर्पटी की रचना में सर्वाधिक मात्रा आक्सीजन की है। एडवर्ड स्वेस ने इसे सियाल नाम दिया था क्योंकि यह सिलिका और एल्युमिनियम की बनल ह। ई सियाल महाद्वीपीय भूपर्पटी के अवसादी और ग्रेनाइटिक परतन खातिर के लिये सही बा। कोनार्ड असातत्य की नीचे सीमा (सिलिका+मैग्नीशियम) क परत शुरू हो जाला। भूपर्पटी आ मैंटल की बीच क सीमा मोहोरोविकिक असातत्य द्वारा बने ला जे के मोहो भी कहल जाला।

मैंटल[सम्पादन]

विश्व मानचित्र पर मोहो की गहराई

मैंटल का विस्तार मोहो से लेकर २८९० किमी की गहराई पर स्थित गुट्टेन्बर्ग असातत्य तक बाटे। मैंटल के इस निचली सीमा पर दाब ~140 GPa पावल जाला। मैंटल में संवहनीय धारा चले लीं जिनकी कारण स्थलमण्डल की प्लेटों में गति होला। मैंटल के दू भाग में बाँटल जाला ऊपरी मैंटल और निचला मैंटल और इनकी बीच की सीमा ७१० किमी पर रेपिटी असातत्य की नाँव से जानल जाला। मैंटल का गाढ़ापन 1021 से 1024 Pa·s के बीच पाया जाता है जो गहराई पर निर्भर करता है। [२] तुलना के लिये ध्यातव्य है कि पानी का गाढ़ापन 10−3 Pa·s और कोलतार (pitch) 107 Pa·s होला।

क्रोड[सम्पादन]

क्रोड का विस्तार मैंटल की नीचे है आर्थात २८९० किमी से लेकर पृथ्वी की केन्द्र तक। किन्तु यह भी दो परतों में विभक्त है - बाह्य कोर और आतंरिक कोर। बाह्य कोर तरल अवस्था में पाया जाला क्योंकि यह द्वितीयक भूकंपीय तरंगों (एस-तरंगों) को सोख लेता है। आतंरिक क्रोड की खोज १९३६ में के. ई. बूलेन ने की थी। यह ठोस अवस्था में माना जाला। इन दोनों की बीच की सीमा को बूलेन-लेहमैन असातत्य कहल जाला।

आतंरिक क्रोड मुख्यतः लोहे का बना है जिसमें निकल की भी कुछ मात्रा है। चूँकि बाह्य क्रोड तरल अवस्था में है और इसमें रेडियोधर्मी पदार्थो और विद्युत आवेशित कणों की कुछ मात्रा पावल जाला, जब इसके पदार्थ धारा के रूप में आतंरिक ठोस क्रोड का चक्कर लगते हैं तो चुंबकीय क्षेत्र बन जाला। पृथ्वी के चुम्बकत्व या भूचुम्बकत्व की यह व्याख्या डाइनेमो सिद्धांत कहल जाला।


ऐतिहासिक विकास[सम्पादन]

पुरान मत[सम्पादन]

  • एडवर्ड स्वेस की संकल्पना-
  • डाली का मत-
  • आर्थर होम्स की संकल्पना-
  • वान डर ग्राट की संकल्पना-

नया मत[सम्पादन]

बूलेन क माडल[सम्पादन]

PREM माडल[सम्पादन]

अउरी पढल जाय[सम्पादन]

संदर्भ[सम्पादन]

  1. १.० १.१ A. M. Dziewonski, D. L. Anderson (1981). "Preliminary reference Earth model". Physics of the Earth and Planetary Interiors 25 (4): 297–356. doi:10.1016/0031-9201(81)90046-7. ISSN 0031-9201. PMC 411539. http://www.gps.caltech.edu/uploads/File/People/dla/DLApepi81.pdf. 
  2. Uwe Walzer, Roland Hendel, John Baumgardner Mantle Viscosity and the Thickness of the Convective Downwellings