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हरे कृष्ण हरे राम

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देवनागरी लिखाई में लिखल महामंत्र।

हरे कृष्ण हरे राम भा हरे कृष्ण मंत्र, जेकरा के अक्सरहा महामंत्र के नाँव से जानल जाला, 16-शब्दन क एगो वैष्णव मंतर हवे। ई मंतर एगो बहुत बाद के हिंदू ग्रंथ कलि संतरण उपनिषद से लिहल गइल ह जे गौड़ीय शाखा के उपनिषद ह आ मानल जाला की लगभग 15वीं-16वीं सदी ईसवी में रचल गइल। मानल जाला की ई मंतर 16वीं सदी में भक्ति आंदोलन के दौरा में संत चैतन्य महाप्रभु द्वारा पॉपुलर बनावल गइल;[1][2][3] बाद के समय में (1960 के दशक में) इस्कान के संस्थापक ए. सी. चैतन्य महाप्रभु (प्रभुपाद) एह मंतर के अपना के अपना शाखा के सभसे प्रमुख मंत्र बनवलें — जे 'हरे कृष्ण आंदोलन' के रूप में जानल गइल।[4]

मंत्र में तीन ठे शब्द भा संस्कृत नाँव "कृष्ण","राम" आ "हरे" आवे लें; "कृष्ण" आ "राम" चार-चार बेर आ "हरे" आठ बेर।

  1. "Hare Krishna mantra". Krishna. Archived from the original on 5 August 2015. Retrieved 28 July 2015.
  2. "Chant and be happy". iskcon. Archived from the original on 20 October 2017. Retrieved 28 July 2015.
  3. Rosen, S. (2006). Essential Hinduism. Praeger Publishers. ISBN 0-275-99006-0.
  4. Religion Encyclopedia – Hare Krishna (ISKCON) Archived 1 जुलाई 2007 at the Wayback Machine

बाहरी कड़ी

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