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शिव पुराण

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शिव पुराण (मूल संस्कृत नाँव: शिवपुराण आ शिवमहापुराण) हिंदू धर्म के संस्कृत ग्रंथ सभ में पुराण के कटेगरी के अठारह गो प्रमुख ग्रंथन में से एक हवे। ई शैव मत के साहित्य के हिस्सा भी मानल जाला। एह ग्रंथ में मुख्य रूप से भगवान शिव आ माता पार्वती के कथा–चरचा बा, बाकिर साथे–साथे अउरी दुसरे देवता लोगन के भी उल्लेख आ आदर कइल गइल बा।

शिव पुराण, हिंदू साहित्य के बाकी दूसर पुराण सभ नियर, शायद एगो जिंदा ग्रंथ रहे, जवन लमहर समय तक ले बेर-बेर संपादित, बदलल आ सुधारल जात रहल। शिव पुराण खुद बतावेला कि पहिले एहमें 1,00,000 श्लोक रहलें, जवन बारह गो संहिता (पुस्तक) में बाँटल गइल रहे। बाकिर ग्रंथ ईहो कहेला कि ऋषि व्यास एहके छोट क के संक्षेप रूप में तैयार कइलें, तब जाके उ रोमहर्षण के पढ़वले। आज जवन पांडुलिपि बचल बा, ऊ अलग–अलग रूप आ सामग्री में मिलेला। एक प्रमुख रूप सात गो खंड वाला बा, जवन दक्षिण भारत से जुड़ल मानल जाला। दुसरे रूप में छह गो खंड बा। तिसरका रूप, जवन मध्यकालीन बंगाल इलाका से जुड़ल मानल जाला, ओहमें अलग किताब के बँटवारा ना बा, बल्कि दू बड़ हिस्सा बा — पूर्व–खंड आ उत्तर–खंड। जिनहन रूप सभ में खंड बाड़ें, उहो आपस में खंड सभ के नाँव अलग–अलग तरीका से दिहले बाड़ें। बचले सबसे पुरान पांडुलिपि के बारे में विद्वान क्लाउस क्लोस्टरमायर के अनुमान बा कि ई शायद 10वीं से 11वीं सदी ईस्वी के बीच लिखल गइल होखे। आज जवन शिव पुराण के पांडुलिपि उपलब्ध बा, ओकर कुछ अध्याय संभवतः 14वीं सदी के बाद के समय तक ले लिखल गइल हो सकेला।

शिव पुराण में कई अध्याय मिलेलें जवन शिव–केन्द्रित कॉसमोलॉजी पर आधारित हवें। इनहन में देवता सभ के आपसी रिश्ता, नीति–नियम, योग, तीर्थ–स्थान, भक्ति, नदी आ भूगोल जइसन विषय सभ पर भी चर्चा बा। ई ग्रंथ दूसरी सहस्राब्दी ईस्वी के शुरूआती दौर में शैव मत के अलग–अलग रूप आ उनकर थियोलॉजी समझे खातिर एगो महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत मानल जाला। शिव पुराण के जे सबसे पुरान बाँचल अध्याय बा, ओहमें अद्वैत वेदांत के गहरा दर्शन मिलेला। बाकिर ओही में भक्ति के आस्तिक तत्व भी घुलल–मिलल बा।

19वीं आ 20वीं सदी में वायु पुराण के कई बेर शिव पुराण कह के पुकारल गइल, आ कुछ लोग एकरा के शिव पुराण के हिस्सा भी मानल। बाकिर बाद में चल के जब अउरी पांडुलिपि मिलल, त आधुनिक शोध एह निष्कर्ष पर पहुँचल कि ई दुनो ग्रंथ अलग–अलग बाड़ें। विद्वान लोग के मानल बा कि वायु पुराण जादे पुरान ग्रंथ हवे, जवन शायद दूसरी सदी ईस्वी से पहिले लिखल गइल रहे। कुछ विद्वान एकरा के महापुराण मानेलें, त कुछ एकरा के उपपुराण कहेलें।