शिक्षण बिधि
शिक्षण विधि भा पढ़ावे के तरीका (अंग्रेजी: Teaching Method) सिद्धांत आ तरीका सभ के एगो समूह हवे, जवना के इस्तेमाल टीचर विद्यार्थी के सीखला में मदद करे खातिर करेलन। ई रणनीति सभ कुछ हद तक पढ़ावल जाए वाला विषय, कुछ हद तक विद्यार्थी के ज्ञान आ दक्षता, आ कुछ हद तक सीखला के वातावरण से पैदा होखे वाली सीमाजन के आधार पर तय होले। कवनो शिक्षण विधि तबे उपयुक्त आ प्रभावी मानल जाले जब ऊ विद्यार्थी, विषयवस्तु के प्रकृति आ अपेक्षित सीखला के परिणाम के ध्यान में रखे।
शिक्षण के तरीका के मोटे तौर पर शिक्षक-केंद्रित आ विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण में बाँटल जा सकेला। हालाँकि व्यवहार में शिक्षक अक्सर विद्यार्थी के पूर्व ज्ञान, अनुभव आ सीखला के लक्ष्य के अनुसार एह दुनो तरीका के बीच संतुलन बनावत रहेलन। शिक्षक-केंद्रित शिक्षण में शिक्षक मुख्य अधिकार प्राप्त व्यक्ति होलें। एह मॉडल में विद्यार्थी के अक्सर अइसन व्यक्ति के रूप में देखल जाला जे मुख्य रूप से व्याख्यान आ प्रत्यक्ष निर्देश के माध्यम से जानकारी ग्रहण करेला। एह तरीका में शिक्षक के प्रमुख भूमिका ज्ञान आ सूचना के हस्तांतरण कइल होला। शिक्षण आ मूल्यांकन के अलग-अलग प्रक्रिया मानल जाला, आ विद्यार्थी के उपलब्धि के माप आमतौर पर लिखित परीक्षा आ वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के माध्यम से कइल जाला। एकरा विपरीत, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण में शिक्षक आ विद्यार्थी दुनो सीखला के प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभावेलन। एह तरीका के कई बेर अधिकारपूर्ण (ऑथोरिटेटिव) दृष्टिकोण भी कहल जाला। एहमें शिक्षक के मुख्य काम मार्गदर्शक आ सहायक के रूप में विद्यार्थी के सीखला आ समझ विकसित करे में मदद कइल होला। विद्यार्थी के प्रगति के मूल्यांकन औपचारिक आ अनौपचारिक दुनो माध्यम से कइल जाला, जइसे समूह परियोजना, विद्यार्थी पोर्टफोलियो आ कक्षा में सहभागिता। एह मॉडल में शिक्षण आ मूल्यांकन एक-दूसरा से जुड़ल रहेला, आ शिक्षक पढ़ावे के दौरान लगातार विद्यार्थी के सीखला के आकलन करत रहेलन।
| ई लेख शिक्षा आ पढ़ाई से संबंधित एगो आधार बाटे। जानकारी जोड़ के एकरा के बढ़ावे में विकिपीडिया के मदद करीं। |