शक्तिपीठ

शक्तिपीठ, शाक्त पीठ चाहे सती पीठ (संस्कृत: शाक्त पीठ, मतलब—देवी सती के आसन), हिंदू धर्म के शाक्त परंपरा में सभसे महत्त्व वाला तीर्थ आ पूजा स्थान हवें।[1]), ई शक्तवाद में सभसे बेसी महत्त्व वाला मंदिर अउरी तीर्थयात्रा स्थल हवें, जे हिंदू धर्म में देवी-मत के संप्रदाय (पंथ) बाटे। ई मंदिर आदि शक्ति के विभिन्न रूपन के समर्पित हवें।[नोट 1] ई सगरी मंदिर आदि शक्ति के अलग-अलग रूपन के समर्पित हवें। अलग-अलग पुराण—जइसे देवी भागवत चाहे अउरी कई पुराणन — में शाक्त पीठन के गिनती अलग-अलग बतावल गइल बा, जइसे 51, 52, 64 आ 108।[2][3] एहमें से 18 पीठ के अष्टादश महा (मुख्य) कहल जाला, आ 4 पीठ के चतस्रः आदि (पहिला/प्रारंभिक) नाम से जानल जाला, जिनहन के जिकिर मध्यकालीन हिंदू ग्रंथन में मिले ला।[2]
शक्तिपीठन के उत्पत्ती के बारे में कई तरह के कथा प्रचलित बाड़ी स। सबसे प्रसिद्ध कथा सती के मुअले से जुड़ल बा। हिंदू मान्यता के हिसाब से, जब सती के देह त्याग भइल, त शिव उनका देह के उठवलें, आ उनकर साथ बितावल समय के याद करत-करत ब्यथित हो के मय ब्रह्मांड में बउँड़ियाये लगलें। एह भीषण स्थिती के देख के विष्णु अपना सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 108 टुकड़न[नोट 2] में काट दिहलें, जे धरती पर गिर के पवित्र स्थान बन गइलें, जहाँ आज लोग देवी के पूजा क सकेला। एह काम के पूरा करे खातिर, शिव भैरव के रूप धारण कइलें।[4][5][6]
देवी पूजा से जुड़ल एह ऐतिहासिक अस्थानन में से ज्यादातर भारते में स्थित बाड़ें, बाकिर कुछ अस्थान नेपाल में, सात गो बांग्लादेश में, दू गो पाकिस्तान में, आ एकहक ठो अस्थान तिब्बत, श्रीलंका आ भूटान में पड़े लें।
नोट
[संपादन करीं]संदर्भ
[संपादन करीं]- ↑ Fuller, Christopher John (2004). The Camphor Flame: Popular Hinduism and Society in India. Princeton: Princeton University Press. p. 44. ISBN 978-0-691-12048-5. Archived from the original on 2017-02-15. Retrieved 2016-10-23.
- 1 2 Vanamali (2008). Shakti: Realm of the Divine Mother. Inner Traditions. pp. 83–84, 143–144. ISBN 978-1-59477-785-1. Archived from the original on 2016-04-29. Retrieved 2016-10-23.
- ↑ Kunal Chakrabarti; Shubhra Chakrabarti (2013). Historical Dictionary of the Bengalis. Scarecrow. p. 430. ISBN 978-0-8108-8024-5. Archived from the original on 2017-02-15. Retrieved 2016-10-23.
- ↑ Swami Vijñanananda (1921). "Chapter 30". Śrīmad Devī Bhāgavatam. Vol. Book 7. Munshiram Manoharlal Publishers Pvt. Limited. ISBN 9788121505918.
- ↑ "Mahābhāgavata Purāṇa (Upapurāṇa) - Chapter 11". Wisdom Library.
- ↑ Pratap, Surendra (ed.). "Chapter 18". The Kalika Purana. Translated by Shastri, B. N. Nag Publishers.
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