"होली" की अवतरण में अंतर

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==ऐतिहासिक महत्व==
[[File:Holi Bonfire Udaipur.jpg|thumb|left|100px|होलिका जरावल, उदयपुर, राजस्थान]]
 
होली मनवले की पीछे एगो किवंदती बा। “होली” शब्द “होलिका” में से आईल बा, होलिका पंजाब क्षेत्र की मुलतान में असुरन की राजा हिरण्यकश्यप क बोहिन रहे। किवंदती की अनुसार राजा हिरण्यकश्यप
<ref>कबीर भाई-शिष्य उनकी कविता में रैदास, ''प्रह्लाद चरित'', अपने बेटे के रूप में मुल्तान और प्रहलाद के राजा के रूप में हिरण्यकश्यप को संदर्भित करता है; डेविड लोरेंज़ेन, (१९९६), सनी प्रेस , प.१८, [https://books.google.co.uk/books?id=tE3sShuid5gC&pg=PA18&dq=multan+prahlad&hl=en&sa=X&ei=9pH8VJu8A-WE7ga4sICgAQ&ved=0CCAQ6AEwAA#v=onepage&q=multan%20prahlad&f=एक निराकार परमेश्वर को झूठी प्रशंसा: उत्तर भारत से निर्गुणी ग्रंथों]</ref> के एगो वरदान मिलल रहे जवने की वजह से उ लगभग अविनाशी हो गईल रहे और एसे उ आगे चलके अहंकारी हो गईल और खुदके भगवान माने लागल, और फेर सबके आदेश जारी क दिहलस की सभे खाली ओहि क पूजा करे।
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